अघरिया सदन रायगढ़ में जय गुरुदेव संगत द्वारा गुरु पूर्णिमा पर्व हर्षोल्लास से सम्पन्न

अघरिया सदन रायगढ़ में जय गुरुदेव संगत द्वारा गुरु पूर्णिमा पर्व हर्षोल्लास से सम्पन्नतमनार @ संदेशा 24 अघरिया सदन रायगढ़ में जय गुरु देव संगत के सतसंगी प्रेमीयों द्वारा गुरु पूर्णिमा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।जिसमे रायगढ़ जिले के साथ तमनार ब्लॉक के सैकड़ों लोग शामिल हुए।
इस कार्यक्रम में प्रेमीयों ने वक्त के कामिल मुर्शिद संत सतगुरू विश्व विख्यात परम् संत बाबा जय गुरु देव जी महराज के उतराधिकारी जीवों के द:ख हरता एवं पूरे विश्व में शाकाहारी का प्रचार करने वाले वक्त के संत रूहों के रहनुमा बाबा उमाकांत जी महराज के आदेशानुसार सुबह से जय गुरु देव के प्रेमीयों द्वारा नाम धुन 10बजे तक किया गया। तत्पश्चात् सतसंगी भाई प्रवक्ता पोतराम पटेल जी के मधुर वचनों से सतसंग सुनाया गया।
मनुष्य जन्म का उद्देश्य –
बड़ी मुश्किल से हमें यह मनुष्य जन्म मिला है।लेकिन यहाँ इस जामे में आकर मन के अधीन होकर हम इन्द्रियों के भोगों में फँसे बैठे हैं।जितना भी हमारा दुनिया से ताल्लूक या सबंध है सब हमारे शरीर के जरिये ही है।जब तक हम शरीर में बैठे हैं हमें ये यार-दोस्त, रिश्तेदार, भाई-बहन और दुनिया की धन दौलत, क़ौम, मुल्क वगैरह सब अपने ही नज़र आते हैं या कम से कम हम इन्हें अपना बनाने की कोशिश जरूर करते हैं।जिस समय शरीर से हमारा साथ छूट जाता हैं,इन सब चीजों से भी सबंध छूट जाता है।हमें चाहिए कि जब तक परमात्मा ने इस शरीर में बैठने का मौका दिया है, इससे काम लें लें।इसमें बैठकर न तो इसे इतना दुःख देना है कि मालिक की भक्ति ही न हो सके न ही इसे इतने सुख और आराम में रखना है कि हमारा ख्याल ऐशो-इशरत की ओर चला जाये।मालिक की भक्ति ही हमारा असली काम है और हमें वही इससे करवाना है।
स्वामी जी ने अपने वचनों में फ़रमाया _”धाम अपने चलो रे भाई।
पराये देश क्यों रहना।।
काम अपना करो जाई।
पराये काम नही फँसना।।
नाम गुरु का सम्हाले चल।
यही है दाम गंठ बंधना।।
जगत का सब रंग मैला।
धुला ले मान यह कहना।।”इस कार्यक्रम में जिले के सभी जय गुरु देव के अनुयायियों सतसंगी भाई-बहनों ने उपस्थित हो कर सेवा करते हुए सतसंग का लाभ उठाया एवं गुरुपूर्णिमा को सफल बनाया।


