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रायगढ़

ओपीजेयू में ‘रिसेंट एडवांसमेंट्स इन मैटेरियल्स एंड एप्लीकेशंस’ विषय पर पांच-दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सफल आयोजन

ओपीजेयू में ‘रिसेंट एडवांसमेंट्स इन मैटेरियल्स एंड एप्लीकेशंस’ विषय पर पांच-दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सफल आयोजन

रायगढ़ @संदेशा 24

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ओ पी जिंदल विश्वविद्यालय, रायगढ़ के स्कूल ऑफ़ साइंस द्वारा ‘रिसेंट एडवांसमेंट्स इन मैटेरियल्स एंड एप्लीकेशंस’ विषय पर पांच-दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सफल आयोजन हुआ। ऑनलाइन माध्यम से 13 जनवरी से 17 जनवरी 2025 के दौरान आयोजित इस पांच-दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का संयोजन रसायन विभाग द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं और उद्योग के पेशेवरों को एक मंच पर लाकर मैटेरियल्स साइंस और इसके विभिन्न अनुप्रयोगों में हाल की प्रगति की एक व्यावहारिक समझ प्रदान करना और एक सहयोगी शिक्षण वातावरण को बढ़ावा देना था। साथ ही साथ शिक्षकों, नवप्रवर्तकों और शोधकर्ताओं को उन्नत सामग्रियों में नवीनतम अंतर्दृष्टि और वर्तमान रुझानों और प्रौद्योगिकियों पर नवीन जानकारी साझा करते हुए उन्नत सामग्रियों से संबंधित नई शिक्षण पद्धतियाँ और उपकरणों से परिचित कराना था। यह कार्यक्रम शोध, नवाचार और शिक्षण के क्षेत्र में नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था, जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित शिक्षकों, विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने भाग लिया और अपना ज्ञानवर्धन किया।

13 जनवरी को आयोजित उदघाटन समारोह में ओ. पी. विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ आर. डी. पाटीदार ने अपने उद्बोधन में स्कूल ऑफ़ साइंस को अद्यतन विषय पर फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित करने के लिए बधाई दिया। उन्होंने कहा की यह अद्वितीय और महत्वपूर्ण फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम केवल एक शैक्षिक पहल नहीं है, बल्कि यह शिक्षकों एवं शोधार्थियों के लिए एक नए प्रयासों की शुरुआत है। ‘रिसेंट एडवांसमेंट्स इन मैटेरियल्स एंड एप्लीकेशंस’ जैसे अत्याधुनिक विषयों पर विचार-विमर्श करना और उन पर काम करना, न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए बल्कि समाज और उद्योग के लिए भी आवश्यक है।

यह कार्यक्रम हमें यह याद दिलाता है कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य सिर्फ ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उन विचारों, दृष्टिकोणों और कौशलों को साकार करना है जो भविष्य की दिशा तय करेंगे। आज जब विज्ञान और प्रौद्योगिकी इतनी तेजी से विकसित हो रही हैं, तब शिक्षकों का निरंतर अपडेटेड रहना और नई तकनीकों को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। डॉ पाटीदार ने सभी शिक्षकों से अपील किया की आप इस कार्यक्रम का पूरा लाभ उठाएं, और न केवल ज्ञान प्राप्त करें, बल्कि उसे एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण के रूप में अपनाएं, जो आपके विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक प्रभाव डाल सके।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. सुशांत सिंह, प्रोफेसर, शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा-ने विश्वविद्यालय को ‘रिसेंट एडवांसमेंट्स इन मैटेरियल्स एंड एप्लीकेशंस’ विषय पर पांच-दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के आयोजन के लिए बधाई दिया। उन्होंने कहा की आज के समय में, जब विज्ञान और प्रौद्योगिकी की गति इतनी तेज़ है, हमें निरंतर अद्यतन रहने की आवश्यकता है। यह कार्यक्रम हमें नए विचारों, तकनीकों और अनुसंधान क्षेत्रों से परिचित कराएगा, जिससे हम अपने विद्यार्थियों को बेहतर तरीके से मार्गदर्शन कर सकेंगे और उन्हें भविष्य के लिए तैयार कर पाएंगे। शिक्षकों का निरंतर विकास केवल शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए नहीं, बल्कि हमारे समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए भी आवश्यक है। इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से हम अपने ज्ञान को साझा कर सकते हैं और एक दूसरे से सीख सकते हैं, जो न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामूहिक सफलता की ओर भी हमें अग्रसर करेगा। उद्घाटन समारोह के अंत में स्कूल ऑफ़ साइंस के डीन डॉ गिरीश चंद्र मिश्र ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम के तकनीकी सत्रों में डॉ. सुशांत सिंह, प्रोफेसर, शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा ने सेरियम ऑक्साइड नैनोमटेरियल की बहुमुखी भूमिका: निदान, चिकित्सा विज्ञान और जैव चिकित्सा अनुसंधान में नवाचारों की खोज; डॉ. टी. एस. राठौर, एसोसिएट प्रोफेसर, ओपीजेयू, रायगढ़ ने पार्किंसंस रोग और त्वचा कैंसर में टायरोसिनेस का एंजाइमेटिक विरोध; डॉ. सत्यप्रकाश अहिरवार, सहायक प्रोफेसर, आईआईटी गोवा ने कैंसर के लिए फोटोडायनामिक थेरेपी के लिए प्रभावी फोटोसेंसिटाइज़र के रूप में जीक्यूडी; डॉ. रणवीर कुमार, प्रोफेसर, डॉ. एचएस गौर विश्वविद्यालय, सागर ने सुपरियोनिक सॉलिड्स: डिवाइस अनुप्रयोगों के लिए सामग्री; डॉ. संदीप एस. शिंदे, वरिष्ठ वैज्ञानिक, अनुसंधान एवं विकास, वन सेल डायग्नोस्टिक्स इंक. पुणे ने उन्नत नैनोमटेरियल बायोसेंसर: गुण और अनुप्रयोग; डॉ. आर. एस. सिंह, सीनियर एसोसिएट प्रोफेसर, ओपीजेयू, रायगढ़ ने सुपरकैपेसिटर के लिए ग्राफीन-निकल फोम कम्पोजिट का नया संश्लेषण; डॉ. आशुतोष शर्मा, सहायक प्रोफेसर, अजौ विश्वविद्यालय, दक्षिण कोरिया ने पाउडर धातु विज्ञान के माध्यम से हल्के वजन वाले उच्च-एंट्रॉपी मिश्र धातु प्रसंस्करण की क्षमता की खोज; डॉ. सत्यब्रत दास, स्टील चेयर प्रोफेसर, ओपीजेयू, रायगढ़ ने धातु फोम: ऊर्जा अवशोषण के लिए एक संभावित हल्के वजन वाली सामग्री; डॉ. कमलेश श्रीवास, प्रोफेसर, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर ने सामग्रियों के लक्षण वर्णन के लिए आधुनिक विश्लेषणात्मक वाद्य तकनीक, डॉ. हरित झा, एसोसिएट प्रोफेसर, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर ने बायोमटेरियल में प्रगति: स्रोत और अनुप्रयोग; डॉ. ए. के. झा, वरिष्ठ शोधकर्ता, टीएम भागलपुर विश्वविद्यालय, बिहार ने औद्योगिक और बायोमेडिकल अनुप्रयोगों के लिए नैनोमटेरियल का ग्रीन संश्लेषण; डॉ. प्रशांत एस. अलेगांवकर, प्रोफेसर, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय बठिंडा ने ऊर्जा संचयन मेटामटेरियल; डॉ. गौतम के. पात्रा, प्रोफेसर, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर ने आयन पहचान के लिए फ्लोरोसेंट कलरिमेट्रिक संवेदी सामग्रियों पर हालिया प्रगति; डॉ. सुभाष बनर्जी, सहायक प्रोफेसर, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय ने कार्बनिक संश्लेषण में ग्रीन उपकरण तथा डॉ. संतोष एस. ठाकुर, एसोसिएट प्रोफेसर, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय ने मूल्यवान चिरल मध्यवर्ती के निरपेक्ष विन्यास को निर्दिष्ट करने के लिए घनत्व कार्यात्मक सिद्धांत का अनुप्रयोग आदि विषयो पर अपने व्याख्यान दिए।

17 जनवरी को कार्यक्रम के समापन समारोह में डॉ. संतोष एस. ठाकुर, एसोसिएट प्रोफेसर, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय ने कहा की ‘रिसेंट एडवांसमेंट्स इन मैटेरियल्स एंड एप्लीकेशंस’ जैसा महत्वपूर्ण विषय शिक्षा, शोध और उद्योग के बीच एक पुल बनाने का कार्य करता है। इस कार्यक्रम में आपने जिन नये दृष्टिकोणों और तकनीकी ज्ञान को समझा है, वह आने वाले समय में न केवल आपके विद्यार्थियों की सफलता में सहायक होंगे, बल्कि आपके शोध कार्यों और शैक्षिक दृष्टिकोणों में भी सकारात्मक परिवर्तन लाएंगे। आज का शैक्षिक परिप्रेक्ष्य लगातार बदल रहा है और हमें इसके साथ कदम से कदम मिलाकर चलना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से जिस तरह से प्रतिभागियों ने अपनी सोच और कौशल को अपडेट किया है, वह न केवल उनकी व्यक्तिगत यात्रा को प्रभावित करेगा, बल्कि उनके द्वारा पढ़ाए जा रहे छात्रों के जीवन को भी नया आकार देगा। कार्यक्रम के अंत में मानविकी विभाग के प्राध्यापक डॉ संजय कुमार सिंह ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ आर. डी. पाटीदार जी, आयोजन में सहयोग देनेवाले सभी प्राध्यापकों, आयोजन समिति के सभी सदस्यों एवं आईटी विभाग के सहयोगियों के प्रति कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
ज्ञातव्य हो की इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का उद्देश्य सामयिक और सामग्रियों के बारे में ज्ञान साझा करना था, जो उद्योग और शैक्षिक क्षेत्रों में प्रगति को उत्प्रेरित कर सकते हैं। इसमें विभिन्न सत्रों के माध्यम से सामग्रियों के गुण, उनके विभिन्न अनुप्रयोग और आगामी शोध क्षेत्रों पर चर्चा की गई और यह कार्यक्रम अपने उद्देश्यों की पूर्ति में सफल रहा। इस कार्यक्रम के आयोजन में रसायन विभाग के प्राध्यापकों डॉ अंकुर रस्तोगी, डॉ दीपक पटेल, डॉ संजना देवांगन एवं डॉ कविता पटेल की महती भूमिका रही।

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