जगत् की माता पिता सा देवी जगतां माता स शिवो जगतःपिता। *पित्रोःशुश्रूषके नित्यं कृपाधिक्यं हि वर्धते।।

जगत् की माता पिता
सा देवी जगतां माता स शिवो जगतःपिता। *पित्रोःशुश्रूषके नित्यं कृपाधिक्यं हि वर्धते।।तमनार @संदेशा 24 @ आचार्य पं.किशोर पाणिग्राही वे देवी उमा(बंजारी )जगत् की माता हैं और भगवान् शिव(बाबा बंजारा)जगत् के पिता।जो इनकी सेवा करता है ,उन पुत्र -पुत्रियों पर इन दोनों माता – पिताकी कृपा नित्य अधिकाधिक बढ़ती रहती है।वे पूजकपर अर्थात सेवक पर अपना आन्तरिक ऐश्वर्य प्रदान करते हैं।
*कृपयान्तर्गतैश्वर्यं पूजकस्य ददाति हि* ।*तस्मादन्तर्गतानन्दलाभार्थं मुनिपुङ्गवाः।*
*पितृमातृस्वरुपेण शिवलिंङ्ग प्रपूजयेत्*।(श्रीशि.म.वि.अ.१६,९३)
आन्तरिक आनन्दकी प्राप्तिके लिये शिवलिंग को माता -पिताका स्वरुप मानकर उसकी पूजा करनी चाहिये।
साक्षात् उमामहेश्वर बंजारीधाम तराईमाल में बंजारीमाई-बंजाराबाबा के स्वरुप में बिराजमान हैं माँ बाबा के प्रत्येक भक्तको इस श्रावणमास के परमपावन पर दर्शन ,रुद्राभिषेक, जलाभिषेक कर पुण्य प्राप्त करना चाहिये।
*श्रीशिवाय नमस्तुभ्यं*🌹🙏🚩
आचार्य पं.किशोर पाणिग्राही
(ज्योतिष, कर्मकाण्ड, भागवत)
गोल्डमैडेलिस्ट


