स्वावलंबन परियोजना के तहत मौहापाली में जिंदल फाउंडेशन द्वारा दिया गया प्रशिक्षण @ मशरूम उत्पादन महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने का अच्छा मौका है: सक्सेना

मशरूम उत्पादन महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने का अच्छा मौका है: सक्सेना
स्वावलंबन परियोजना के तहत मौहापाली में जिंदल फाउंडेशन द्वारा दिया गया प्रषिक्षण
तमनार @संदेशा 24
महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए ग्राम पंचायत मौहापाली में स्वालंबन परियोजना के अंतर्गत जिंदल फाउंडेषन द्वारा मषरूम उत्पादन के लिए महिलाओं को प्रषिक्षण दिया गया। इस प्रषिक्षण में गांव के करीब सात स्व सहायता समूहों की महिलाएं बड़ी संख्या में षामिल हुईं। महिलाओं ने प्रषिक्षण के बाद अपने घर में मषरूम की फसल लेने का निर्णय लिया। जिंदल फाउंडेषन द्वारा सभी महिलाओं को मषरूम का बीज निषुल्क वितरित किया गया।
प्रषिक्षण में षामिल महिलाओं को संबोधित करते हुए जेपीएल के वाइस प्रेसिडेंट और डोलेसरा प्रोजेक्ट हेड श्री नीरज सक्सेना ने प्रषिक्षण को महिलाओं के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि हम सब किसान से फपर उठे हैं। घर की महिलाओं को गृह लक्ष्मी कहा जाता है, यह प्रषिक्षण भी महिलाओं के लिए लक्ष्मी बनने का एक मौका है। श्री सक्सेना ने कहा कि महिलाएं स्वयं ही अपने घर में इसे कर सकेंगीं। इससे होने वाली कमाई से बच्चों को पढ़ा सकतीं हैं, पुरूशों की आय में आर्थिक मदद करने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर चल सकतीं हैं।
मैनेजर सीएसआर षीतल पटेल ने कहा कि अधूरी जानकारी के साथ काम करने पर रिजल्ट सही नहीं आता है, इसलिए प्रषिक्षण की आवष्यकता पड़ती है। प्रषिक्षण के बाद निष्चित रूप से मषरूम का उत्पादन अच्छा होगा। मषरूम उत्पादन कम खर्च में अधिक फायदा देने वाला, इसमें समय भी कम लगता है। उन्होंने कहा कि जिंदल फाउंडेषन चाहता है कि महिलाएं खुद कमाकर काबिल बनें। ग्राम पंचायत मौहापाली के सरपंच ष्याम लाल राठिया ने कहा कि जिंदल फाउंडेषन द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए अच्छा कार्य किया जा रहा है, इससे उनका आर्थिक स्तर सुधरेगा। कार्यक्रम में जनपद पंचायत सदस्य श्रीमती गीता पैकरा, उपसरपंच तैल सिंह, विद्याधर साहू सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित थे।
तालाब का होगा गहरीकरण स्कूल में बनेगी बाउंड्रीवाॅल
सरपंच ष्याम लाल राठिया की मांग पर वीपी और प्रोजेक्ट हेड श्री नीरज सक्सेना ने गांव के दो तालाबों का जिंदल द्वारा गहरीकरण कराने व स्कूल में बाउंड्रीवाॅल बनवाने की घोशणा की। जिसका गांव के लोगों ने तालियों के साथ स्वागत किया। इससे पहले संतोश षर्मा द्वारा महिलाओं को मषरूम उत्पादन के प्रत्येक प्रक्रिया की चरणबद्ध जानकारी दी गई।
काम करने के बाद खाली समय में कमा रहीं
सुभाशिनी गुप्ता ने बताया कि वह दिन भर काम करतीं हैं। नौकरी के बाद जितना समय मिलता है, उसमें वे अपने घर लिबरा में मषरूम उत्पादन का काम करतीं हैं। उन्होंने बताया कि 2010 में मषरूम उत्पादन का काम षुरू किया था, इस दौरान अनेक स्व सहायता समूह की महिलाओं को जोड़ा अब वह खुद ही एक सीजन में डेढ़ से दो लाख रूपए तक कमा रहीं हैं। गांव की महिलाओं को बताया गया कि समूह में मषरूम उत्पादन करने पर षेड बनाने के लिए जिंदल द्वारा 50 प्रतिषत आर्थिक सहयोग भी किया जाएगा।


