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हिंडालको कर रहा आदिवासी हितों का खुला उल्लंघन, जबरिया विस्थापन का प्रयास , हाईकोर्ट ने प्रशासन से किया जवाब तलब…

हिंडालको कर रहा आदिवासी हितों का खुला उल्लंघन, जबरिया विस्थापन का प्रयास , हाईकोर्ट ने प्रशासन से किया जवाब तलब…

रायगढ़ 28.7.2020

रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में बसे आदिवासी बाहुल्य गांव बाजीखोल मैं हिंडालको कंपनी की ओर से आदिवासी हितों की उपेक्षा करते हुए उनके अधिकारों का हनन किए जाने की बातें सामने आ रही है । कुछ आदिवासी परिवारों को तहसीलदार ने बेदखली का आदेश दिया जिस पर हाईकोर्ट ने प्रशासन से जवाब तलब किया है। आदिवासी हितों की रक्षा के लिए हाईकोर्ट में ग्रामीणों की बेदखली के विरुद्ध याचिका लगाई गई थी जिसमें सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हिंडाल्को कंपनी के पीड़ित आदिवासियों को राहत देते हुए तमनार तहसीलदार द्वारा बेदखली के आदेश के विरुद्ध आगामी 05 अगस्त तक जवाब देने आदेश पारित किया है।

पांचवीं अनुसूचि के तहत आने वाले क्षेत्र रायगढ़ के तमनार चले आईए तो यह स्थिति अपने आप स्पष्ट हो दिखाई देगी। आदिवासी बाहुल्य गांव बांजीखोल में रहने वाले चार आदिवासी परिवारों को रायगढ़ जिला प्रशासन के ओर से नोटिस दिया गया है। जिसमें घर का मुआवजा चेक लेकर घर तुरंत छोड़ने की बात कही गई है। ये हैं ….. रुखमन भगत,कमलेश भगत, लालकुंवर, विमला भगत..। गारे पल्मा के 4/4 एवं 4/5 कोयला खदानें जो कभी जायसवाल निको एवं मोनेट कंपनी को मिली थी वो हिंडाल्को यानि कि बिड़ला ग्रुप के हिस्से आ गई है।

ग्राम सभा की अनुमति भी नहीं और ना ही जारी हुआ नोटिफिकेशन

पूर्व की कंपनियां वैधानिक प्रावधानों के प्रति लापरवाही के कारण अपने खदानों को सही तरीके से संचालन नहीं कर पाई। उसे हिंडाल्को कंपनी मैनेजमेंट एक झटके में हासिल कर लेना चाह रही है। गारे पल्मा खदान 4/4 में पहले क्लोज्ड माईनिंग थी अब ओपेन कास्ट माईनिंग करना चाह रहें हैं। जाहीर है ऐसा करने से कंपनी का पैसा बचता है। लेकिन माईनिंग का मोड चेंज करने पर भी सोशल एवं एनवायरमेंटल इंपेक्ट एसेसेमेंट करना आवश्यक रहता है और इसके लिए 8 किलोमिटर तक के रेडियस में आने वाले गांव वालों को इजाजत, ग्राम सभा के माध्यम से ली जाती है। इसके लिए नोटिफिकेशन की प्रक्रिया भी होनी चाहिए।

पीड़ितों का कहना है कि जमीन बेदखली करने से पहले नियमो के मुताबिक मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास किया जाता है। उसकी कहीं बात नहीं की जा रही है। इस प्रकार के निर्णय से पहले ग्राम सभा की अनुमति ली जाती है। पर यहां तो ग्राम सभा ही नहीं हुआ। बस हमें कंपनी के ओर से धमकी दी जा रही है, जान से मारने तक की धमकी मिल चुकी है। पुलिस भी हमारा संरक्षण करने की जगह कंपनी वालों की तरफदारी कर रही है। चूंकि कोरोना के संक्रमण काल में जूलूस धरना प्रदर्शन सब प्रतिबंधित है। इसलिए कंपनी प्रबंधन की ओर से बेदखली के लिए तेजी से प्रयास जारी है ताकि ग्रामीण अपना विरोध प्रदर्शन न कर सके।

पुनर्वास और पुनर्वास थापन संबंधी कई प्रक्रियाओं में हुई है कमी फिर भी विस्थापन की कर रहे बात

शासन के नियम के मुताबिक पुनर्वास पुनर्व्यवस्थापन और उचित प्रतिकर ही नहीं हुआ, सोशल इंपैक्ट एसेसेमेंट और वनाधिकार की संपूर्ण प्रक्रिया ही नहीं हुआ है। रहवास क्षेत्र में प्रभावितों के सहमति और सबसे जरूरी ग्राम सभा के लिए जब अनापत्ति ही नहीं ली गई है तो वर्षों से यहां अपना बसेरा कर रहे आदिवासियों को वह भी पांचवी अनुसूचि में पड़ने वाली जमीन से कोई कैसे अपना घर छोड़ने के लिए बाध्य कर सकता है। कलेक्टर के जिस कागज का हवाला देकर जमीन खाली करवाने की बात कही जा रही है उसमें भी अनुमति नहीं मिली है।

केवल 11.540 हेक्टे पर ही मिली है सरफेस राइट

एक आदेश के मुताबिक हिंडाल्को कोल माइंस को शासन के पुनर्वास और पुनर्स्थापन योजना के प्रावधानों के पालन के शर्तों पर रायगढ़ के बंजीखोल में 44.565 हेक्टे. शासकीय भूमि पर प्रवेश की अनुमति है जिसमें केवल 11.540 हेक्टे. में कम्पनी को सरफेस राइट प्राप्त है। इसके विपरीत कम्पनी द्वारा गांव के सामुदायिक निस्तार की समस्त भूमि यों और आदिवासी बसाहट से महज दस फीट की समीप तक परियोजना का विस्तार, खनन कार्य और विस्फोट किया जाना आदिवासी अधिकारों का खुला उल्लंघन है।

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