ओपीजेयू में ‘इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स फॉर सस्टेनेबल इनोवेशंस ‘ विषय पर IEEE प्रायोजित दो-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न

ओपीजेयू में ‘इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स फॉर सस्टेनेबल इनोवेशंस ‘ विषय पर IEEE प्रायोजित दो-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न
(27–28 मार्च 2026 को आयोजित इस नवाचार और तकनीक के महाकुंभ में देश-विदेश के प्रबुद्ध विद्वानों ने किया गहन मंथन, 230 से अधिक शोध पत्रों का हुआ प्रभावी प्रस्तुतीकरण )
रायगढ़ @संदेशा 24
ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय, रायगढ़ के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा IEEE प्रायोजित “इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स फॉर सस्टेनेबल इनोवेशंस” विषय पर द्वितीय दो-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 27–28 मार्च 2026 के दौरान किया गया। यह सम्मेलन विश्वविद्यालय के पूंजीपथरा परिसर में हाइब्रिड मोड में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस दो-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों, कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों तथा नीति-निर्माताओं को एक साझा मंच प्रदान करना था, जहाँ वे नवीकरणीय ऊर्जा, इंटेलिजेंट सिस्टम्स एवं एआई-आधारित ऊर्जा प्रबंधन अनुकूलन, ऊर्जा-कुशल उपकरणों एवं स्मार्ट ग्रिड के विकास, सौर, पवन एवं हाइब्रिड प्रणालियों जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के एकीकरण, तथा कुशल ऊर्जा रूपांतरण हेतु पावर इलेक्ट्रॉनिक्स में नवाचार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने शोध एवं विचार प्रस्तुत कर सकें। इस अंतर्राष्ट्रीय आयोजन में अकादमिक जगत एवं उद्योग से जुड़े विशिष्ट वक्ताओं ने “इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स फॉर सस्टेनेबल इनोवेशंस” से संबंधित प्रमुख क्षेत्रों पर अपने विचार साझा किए, साथ ही शोधार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। सम्मेलन को IEEE एमपी सेक्शन, IEEE IAS एवं PELS सोसाइटी चैप्टर तथा भारत सरकार के एएनआरएफ/डीएसटी से तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ।
सम्मेलन का उद्घाटन 27 मार्च 2026 को मुख्य अतिथि श्री सुशील कुमार सूनी (पूर्व सीईओ एवं संस्थापक, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) तथा श्री देबज्योति रॉय (कार्यकारी निदेशक, जिंदल स्टील लिमिटेड, रायगढ़) की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों में प्रो. (डॉ.) तरुण कांति भट्टाचार्य (आईआईटी खड़गपुर), प्रो. (डॉ.) मनोज त्रिपाठी (आईआईटी रुड़की), डॉ. आर. डी. पाटीदार (कुलपति, ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय, रायगढ़) एवं कुलसचिव डॉ. अनुराग विजयवर्गीय सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। उद्घाटन समारोह के आरंभ में कुलपति डॉ. आर. डी. पाटीदार ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन में उन्होंने “इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स फॉर सस्टेनेबल इनोवेशंस” विषय की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित करते हुए कहा कि आधुनिक ऊर्जा चुनौतियों का समाधान अब केवल उत्पादन बढ़ाने में नहीं, बल्कि स्मार्ट, कुशल एवं पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों के विकास में निहित है। उन्होंने विशेष रूप से अपने संबोधन में कहा कि सतत विकास के लिए इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती जा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी नवाचारों के माध्यम से ऊर्जा दक्षता बढ़ाना, कार्बन उत्सर्जन कम करना तथा स्वच्छ ऊर्जा समाधान विकसित करना समय की प्रमुख आवश्यकता है। साथ ही, उन्होंने युवाओं और शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे अनुसंधान को समाजोपयोगी बनाते हुए सस्टेनेबल तकनीकों के विकास में सक्रिय योगदान दें। डॉ. पाटीदार ने इस अवसर पर ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, उसके दूरदर्शी विज़न तथा STEEL करिकुलम के अंतर्गत किए जा रहे नवाचारपूर्ण प्रयासों की जानकारी भी दी। उन्होंने सतत मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए जिंदल स्टील के चेयरमैन श्री नवीन जिंदल एवं विश्वविद्यालय की चांसलर श्रीमती शालू जिंदल के प्रति आभार व्यक्त किया।
इसके पश्चात विशिष्ट अतिथियों—श्री देबज्योति रॉय, प्रो. (डॉ.) तरुण कांति भट्टाचार्य तथा प्रो. (डॉ.) मनोज त्रिपाठी—ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि “इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स फॉर सस्टेनेबल इनोवेशंस” केवल एक विषय नहीं, बल्कि भविष्य की अनिवार्य दिशा है। उन्होंने ऊर्जा दक्षता, हरित प्रौद्योगिकी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स में नवाचार तथा नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों के एकीकरण को सतत विकास की आधारशिला बताया। मुख्य अतिथि श्री सुशील कुमार सूनी ने अपने संबोधन में “इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स फॉर सस्टेनेबल इनोवेशंस” थीम के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान समय में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करना और स्वच्छ, नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सस्टेनेबल ऊर्जा समाधान न केवल पर्यावरण संरक्षण में मददगार हैं, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि और समाज के समग्र कल्याण को भी सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने सभी शोधकर्ताओं, विद्वानों एवं प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे नवाचार, अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग के माध्यम से एक स्वच्छ, हरित एवं ऊर्जा-सुरक्षित भविष्य के निर्माण में योगदान दें। इस अवसर पर अतिथियों के द्वारा सम्मेलन की स्मारिका का विमोचन किया गया, साथ ही सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में सम्मेलन के संयोजक डॉ. संदीप बिस्वाल ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
सेमिनार के उद्घाटन समारोह के पश्चात मुख्य अतिथि श्री सुशील कुमार सूनी ने विश्वविद्यालय के नव स्थापित “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन ड्रोन टेक्नोलॉजी” (Centre of Excellence in Drone Technology) का उद्घाटन किया। वर्तमान समय में ड्रोन तकनीक की बढ़ती उपयोगिता और बहुआयामी संभावनाओं को देखते हुए इस केंद्र की स्थापना की गई है। इसका उद्देश्य ड्रोन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करना तथा कृषि, निगरानी, आपदा प्रबंधन, ऊर्जा प्रबंधन और स्मार्ट अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में ड्रोन के प्रभावी उपयोग को विकसित करना है। यह केंद्र उद्योग और अकादमिक जगत के बीच सेतु का कार्य करते हुए व्यावहारिक ज्ञान, कौशल विकास और रोजगारोन्मुख अवसरों को भी प्रोत्साहित करेगा।
सम्मेलन में दो दिनों के दौरान कीनोट संबोधनों के साथ-साथ विषयगत ट्रैक के अंतर्गत तकनीकी सत्रों में लगभग 230 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में उद्घाटन एवं समापन सत्रों के साथ-साथ कीनोट व्याख्यान और 18 विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिसमें भारत सहित सात से अधिक देशों के शोधकर्ता, संकाय सदस्य, छात्र और उद्योग विशेषज्ञ शामिल हुए। सम्मेलन को संबोधित करने वाले प्रमुख वक्ताओं में डॉ. संजय कुमार परिदा (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना), प्रो. (डॉ.) तरुण कांति भट्टाचार्य (प्रोफेसर एवं हेड, E&TC, IIT खड़गपुर), डॉ. मनोज त्रिपाठी (प्रोफेसर, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग, IIT रुड़की), डॉ. नरेंद्र डी. लोंधे (एनआईटी रायपुर), डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा (एसजीआईएसटीएस, इंदौर) और डॉ. नरेंद्र सिंह बेनीवाल (बीआईईटी, झांसी) आदि शामिल थे। इन विशेषज्ञों ने सस्टेनेबल ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई-आधारित ऊर्जा प्रबंधन और ऊर्जा दक्षता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने शोध और विचार साझा किए, तथा सम्मेलन की थीम “इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स फॉर सस्टेनेबल इनोवेशंस” के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि ऐसे मंच नवाचार, तकनीकी उत्कृष्टता और सतत विकास के लिए अनिवार्य हैं।
28 मार्च 2026 को आयोजित समापन समारोह मुख्य अतिथि डॉ. मनीष बी. भल्ला, कुलपति, डी. वाई. पाटिल इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, पुणे, और विशिष्ट अतिथियों—डॉ. सालकुटी सुरेंद्र रेड्डी (एसोसिएट प्रोफेसर, वूसॉंग यूनिवर्सिटी, दक्षिण कोरिया), श्री निकोलस डी बोर (चीफ ऑफ स्टाफ, थाए एनर्जी, न्यूयॉर्क, यूएस), और डॉ. आर. डी. पाटीदार, कुलपति, ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय, की उपस्थिति में संपन्न हुआ। अपने संबोधन में सभी अतिथियों ने सम्मेलन के थीम की वैश्विक प्रासंगिकता और महत्व पर जोर दिया। मुख्य अतिथि डॉ. मनीष बी. भल्ला ने कहा कि सस्टेनेबल इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इनोवेशंस केवल तकनीकी प्रगति का माध्यम नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और समाज के समग्र कल्याण का महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों को इस दिशा में अंतर्विषय शोध, नवाचार और तकनीकी उत्कृष्टता के माध्यम से ठोस योगदान देने का आह्वान किया। समापन समारोह के दौरान सम्मेलन का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया और बेस्ट पेपर अवार्ड्स प्रदान किए गए। इस अवसर पर ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय के छात्र, सभी स्कूल के डीन, प्राध्यापक, स्टाफ और प्रतिभागी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन मानविकी विभाग के प्राध्यापक डॉ. संजय कुमार सिंह ने किया। सम्मेलन के संयोजक डॉ. संदीप ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के मंच नवाचार और सतत विकास की दिशा में शोध और विचार-विमर्श को बढ़ावा देते हैं। इस सम्मेलन ने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध और ज्ञान साझा करने का अवसर प्रदान किया, बल्कि सस्टेनेबल ऊर्जा, स्मार्ट ग्रिड और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स में नवाचार के क्षेत्र में छात्रों, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा का स्रोत भी बना।
ज्ञातव्य हो कि रायगढ़ के पुंजिपथरा स्थित NAAC “A” ग्रेड प्राप्त ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय की स्थापना 2014 में (राज्य बिल अधिनियम 13) देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक समूह – जिंदल ग्रुप द्वारा देश और विदेश के छात्रों को विश्व स्तरीय शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। विश्वविद्यालय विश्वस्तर के पाठ्यक्रम, विश्वस्तरीय शिक्षक, आधुनिक शिक्षण विधियाँ, अत्याधुनिक बुनियादी ढाँचे और शिक्षार्थियों को एक जीवंत परिसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित यह विश्वविद्यालय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन का सबसे विशिष्ट और विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय बनने की ओर अग्रसर है।


