WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.27
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.25 (2)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.25 (1)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.27 (2)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.19 (1)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.24 (1)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.24
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.29
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.26 (1)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.28 (1)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.26
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.28 (2)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.27 (1)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.20
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.29 (1)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.19
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.23
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.20 (1)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.21
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.28
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.34.25
रायगढ़

50 दिन तक मौत से लड़ता रहा नवजात, मेडिकल कॉलेज रायगढ़ के डॉक्टरों ने बचाई जिंदगी

50 दिन तक मौत से लड़ता रहा नवजात, मेडिकल कॉलेज रायगढ़ के डॉक्टरों ने बचाई जिंदगी

*उम्मीद छोड़ चुके माता-पिता को स्वस्थ शिशु सौंपा, चिकित्सकों की सेवा भावना बनी मिसाल

WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.53.03
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.53.05 (1)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.53.06 (1)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.53.07 (2)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.53.06
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.53.06 (2)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.53.05
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.53.04 (1)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.53.07 (1)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.53.07
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.53.05 (2)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 15.53.04

*33 सप्ताह में जन्मे 1.7 किलो के गंभीर नवजात का निःशुल्क हुआ सफल उपचार

रायगढ़ @संदेशा 24

स्व.श्री लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय, रायगढ़ के चिकित्सकों ने सेवा, समर्पण और मानवीय संवेदनाओं की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने एक नन्ही जिंदगी को नया जीवनदान दिया। जूटमिल निवासी दंपति श्री ललित एवं श्रीमती सुगंधी के समयपूर्व जन्मे गंभीर रूप से बीमार नवजात को 50 दिनों तक चले जटिल उपचार के बाद स्वस्थ अवस्था में उनके परिजनों को सौंप दिया गया। गर्भावस्था के मात्र 33वें सप्ताह में जन्मा यह शिशु केवल 1.7 किलोग्राम वजन का था। जन्म के तुरंत बाद उसे गंभीर श्वसन संबंधी परेशानी होने लगी और पहले ही दिन से बार-बार दौरे पड़ने लगे। जांच में फेफड़ों में रक्तस्राव, गंभीर संक्रमण (सेप्सिस) और निमोनिया जैसी जटिल बीमारियों का पता चला। स्थिति अत्यंत गंभीर होने के कारण नवजात को तत्काल नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।

उपचार के दौरान चिकित्सकों ने शिशु को कई बार रक्त और प्लाज्मा चढ़ाया। संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए व्यापक स्तर पर एंटीबायोटिक और एंटीफंगल दवाओं का उपयोग किया गया। लगातार चिकित्सकीय निगरानी और उपचार के बाद शिशु की स्थिति में सुधार होने लगा। इसके बाद उसे वेंटिलेटर से हटाकर नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन (एनआईव्ही) पर लाया गया। भर्ती अवधि के दौरान हुए कोलेस्टेटिक पीलिया का भी सफलतापूर्वक उपचार किया गया। बाल्य एवं शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मणेश्वर कुमार सोनी ने बताया कि उपचार के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब शिशु की हालत अत्यंत गंभीर हो गई थी। परिस्थितियां इतनी चुनौतीपूर्ण थीं कि माता-पिता ने भी उम्मीद लगभग छोड़ दी थी और अस्पताल आना बंद कर दिया था। लेकिन एनआईसीयू की टीम ने हार नहीं मानी और पूरे समर्पण के साथ उपचार जारी रखा। धीरे-धीरे शिशु ने दूध लेना शुरू किया, उसका वजन बढ़ा और सामान्य गतिविधियां विकसित होने लगीं। पूरे उपचार के दौरान शिशु 23 दिन वेंटिलेटर और 17 दिन ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहा। करीब 50 दिनों तक चिकित्सकों, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ ने दिन-रात उसकी निगरानी कर उपचार किया। अंततः शिशु पूरी तरह स्थिर, दौरे-मुक्त और सामान्य ऑक्सीजन स्तर के साथ स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज किया गया।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. दुर्गा शंकर पटेल ने बताया कि यह उपलब्धि चिकित्सकों, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ के सामूहिक प्रयास और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि मरीज की जान बचाना अस्पताल की सर्वोच्च प्राथमिकता है और कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी पूरी निष्ठा के साथ उपचार किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस उपचार में लगे रक्त, प्लाज्मा और अन्य चिकित्सा सुविधाओं का पूरा खर्च अस्पताल प्रबंधन द्वारा वहन किया गया, जबकि निजी अस्पतालों में ऐसे उपचार पर लगभग 6 से 7 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता था। मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. संतोष कुमार ने इस उपलब्धि पर एनआईसीयू टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता चिकित्सकीय दक्षता, सतत निगरानी, उत्कृष्ट टीमवर्क और सेवा भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के अथक प्रयासों ने एक नन्ही जिंदगी को नया जीवन प्रदान किया है, जो पूरे संस्थान के लिए गर्व का विषय है। इस सफलता के पीछे विभागाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मणेश्वर कुमार सोनी के नेतृत्व में सहायक प्राध्यापक डॉ. गौरव क्लॉडियस, वरिष्ठ रेसिडेंट डॉ. फारूज अहमद, डॉ. पल्लवी तथा समस्त नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.07.59 (2)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.08.00
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.07.56
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.07.59 (1)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.07.56 (1)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.08.03 (1)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.08.02 (1)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.08.04 (2)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.08.08 (2)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.07.59
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.08.07
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.08.02
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.08.04
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.08.03
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.08.05
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.08.07 (1)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.08.06
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.08.05 (2)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.08.08 (1)
WhatsApp Image 2026-01-26 at 16.08.06 (1)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Latest
🚨ऑपरेशन आघात का ताबड़तोड़ प्रहार, 48 घंटे में 83.840 लीटर महुआ... 🚨अभियान संवदेना” में लैलूंगा पुलिस की त्वरित कार्रवाई, नाबालिग... 🚨पोल्ट्री फार्म से बोर पंप चुराने वाले दो युवक चढ़े पुलिस के ह... 🚨ऑपरेशन क्लीन हंट' में रायगढ़ पुलिस को बड़ी सफलता, सहारा इंडिय... 🚨पुसौर पुलिस ने घर में चोरी का किया खुलासा, चोर और चोरी का साम... लगातार बारिश के बीच कलेक्टर ने शहर के बाढ़ एवं जल भराव संभावित ... स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों को लेकर कलेक्टर ने विभागों... चिरायु टीम की तत्परता से तीन माह के मासूम को मिली नई मुस्कान लैलूंगा के पाकरगांव के सुगंधित जवांफूल चावल की खुशबू पहुंच रही... स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं, निर्धारित समय...