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रायगढ़

मशरूम उत्पादन से बदली जिंदगी: बिहान ने पुष्पा साव को बनाया आत्मनिर्भर

मशरूम उत्पादन से बदली जिंदगी: बिहान ने पुष्पा साव को बनाया आत्मनिर्भर

*मजदूरी से स्वरोजगार तक का प्रेरक सफर, मशरूम उत्पादन से सालाना डेढ़ लाख रुपये की आय*

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*कुरमापाली की पुष्पा साव ने मेहनत, हौसले और बिहान के सहयोग से लिखी सफलता की नई इबारत*

रायगढ़ @संदेशा 24

कभी मजदूरी ही परिवार की आजीविका का एकमात्र सहारा थी। दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद भी आय इतनी नहीं होती थी कि घर की सभी जरूरतें आसानी से पूरी हो सकें। बच्चों की पढ़ाई, परिवार का भरण-पोषण और भविष्य की चिंता हमेशा बनी रहती थी। लेकिन आज वही पुष्पा साव मशरूम उत्पादन के माध्यम से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़ने के बाद उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि अपने आत्मविश्वास और सम्मान को भी नई पहचान दिलाई। आज वे मशरूम उत्पादन से सालाना लगभग 1.50 लाख रुपए की आय अर्जित कर रही हैं और अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।

*आर्थिक तंगी से जूझ रहा था परिवार, बिहानश् से मिली नई दिशा*

रायगढ़ जिले के ग्राम कुरमापाली निवासी श्रीमती पुष्पा साव बताती हैं कि कुछ वर्ष पहले तक उनका परिवार पूरी तरह मजदूरी पर निर्भर था। मेहनत के बावजूद आमदनी सीमित थी, जिससे परिवार का खर्च चलाना भी कठिन हो जाता था। बच्चों की अच्छी शिक्षा और परिवार के बेहतर भविष्य का सपना आर्थिक अभाव के कारण अधूरा लगता था। ग्राम पंचायत के माध्यम से उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान की जानकारी मिली। उन्होंने संस्कार स्व-सहायता समूह से जुड़कर नियमित बचत शुरू की। समूह के माध्यम से प्रशिक्षण, कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (सीआईएफ) तथा बैंक से वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ। यही सहयोग उनके जीवन में बदलाव का आधार बना।

*आर्थिक मजबूती के साथ बढ़ा आत्मविश्वास

पुष्पा साव ने सीआईएफ से प्राप्त 10 हजार रुपए की राशि से घर पर मशरूम उत्पादन शुरू किया। गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और लगातार मेहनत से उनके मशरूम की स्थानीय बाजार में अच्छी मांग बनने लगी। बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने लगभग 70 हजार का अतिरिक्त निवेश कर अपने व्यवसाय का विस्तार किया।

आज वे मशरूम उत्पादन से सालाना लगभग 1.50 लाख रुपए की आय अर्जित कर रही हैं। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है। मशरूम उत्पादन से होने वाली आय ने पुष्पा साव के परिवार को आर्थिक संबल दिया है। अब वे बच्चों की बेहतर शिक्षा, घरेलू जरूरतों और भविष्य की बचत पर ध्यान दे पा रही हैं। परिवार के भोजन में भी मशरूम शामिल होने से पोषण स्तर में सुधार आया है।

*दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

पुष्पा साव कहती हैं कि यदि उन्हें बिहान का सहयोग नहीं मिला होता, तो शायद आज भी उनका परिवार मजदूरी पर ही निर्भर रहता। आज वे सम्मानपूर्वक अपना व्यवसाय संचालित कर रही हैं और गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। सही मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ और निरंतर मेहनत किसी भी व्यक्ति के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान हम ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में नए अवसर प्रदान कर रहा है।

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