ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय में उन्नत सामग्री, स्वच्छ ऊर्जा एवं स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी पर वैश्विक मंथन

ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय में उन्नत सामग्री, स्वच्छ ऊर्जा एवं स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी पर वैश्विक मंथन
(IEEE-प्रायोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन AMSCEHT-2026 सफलतापूर्वक संपन्न)
तमनार @ संदेशा 24
ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय, रायगढ़ के स्कूल ऑफ साइंस द्वारा IEEE प्रायोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “एडवांस्ड मैटेरियल्स फॉर सस्टेनेबल क्लीन एनर्जी एंड हेल्थकेयर टेक्नोलॉजीज (AMSCEHT-2026)” का आयोजन 11 से 13 सितंबर 2026 तक सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन का केंद्रीय विषय उन्नत सामग्री, सतत स्वच्छ ऊर्जा तथा स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवीनतम शोध, नवाचार एवं तकनीकी विकास पर केंद्रित रहा। सम्मेलन में देश-विदेश के प्रख्यात शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों एवं तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञों ने सहभागिता करते हुए समकालीन वैज्ञानिक चुनौतियों और उनके संभावित समाधानों पर व्यापक विचार-विमर्श किया।
AMSCEHT-2026 का उद्देश्य उन्नत सामग्री विज्ञान, स्वच्छ ऊर्जा तथा स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम अनुसंधान को एक साझा मंच प्रदान करना तथा अकादमिक जगत, शोध संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग को सुदृढ़ करना था। सम्मेलन के दौरान प्रतिभागियों ने अपने शोध कार्यों, नवीन विचारों एवं तकनीकी उपलब्धियों को साझा किया तथा सतत विकास, ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए उन्नत सामग्रियों एवं नवीन प्रौद्योगिकियों की संभावनाओं पर मंथन किया।
सम्मेलन के प्रथम दिन, 11 सितंबर 2026 को ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय, रायगढ़ के पूंजीपथरा परिसर में आयोजित उद्घाटन समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. डी. पाटीदार ने सभी अतिथियों, विषय-विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन के उद्देश्यों एवं रूपरेखा से अवगत कराया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि AMSCEHT-2026 का उद्देश्य उन्नत सामग्री, सतत स्वच्छ ऊर्जा एवं स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे वैश्विक अनुसंधान एवं तकनीकी विकास से जुड़े शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों एवं अन्य हितधारकों को एक साझा मंच पर लाना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं जैसी वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार तथा अकादमिक-औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि देश-विदेश से प्रख्यात विशेषज्ञों एवं शोधकर्ताओं की सहभागिता तथा शोध कार्यों की गुणवत्ता सम्मेलन की अकादमिक प्रासंगिकता एवं सफलता को दर्शाती है। उन्होंने आगे कहा कि यह सम्मेलन युवा शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय शोध समुदाय से जुड़ने, अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने तथा नवीनतम वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रवृत्तियों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। इस अवसर पर उन्होंने ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय की निरंतर प्रगति एवं शोध उत्कृष्टता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए जिंदल स्टील के चेयरमैन श्री नवीन जिंदल एवं विश्वविद्यालय की चांसलर श्रीमती शालू जिंदल के मार्गदर्शन एवं सतत सहयोग के लिए हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. विजय कुमार गोयल, चेयरमैन, छत्तीसगढ़ प्राइवेट यूनिवर्सिटीज रेगुलेटरी कमीशन, रायपुर उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. आशीष कुमार पांडा, निदेशक, नीति आयोग, भारत सरकार, नई दिल्ली; प्रो. डॉ. अहमद लुत्फी अमरी रामली, डीन, स्कूल ऑफ मैथेमेटिकल साइंसेज, यूनिवर्सिटी सैन्स मलेशिया, पेनांग, मलेशिया (ऑनलाइन); प्रो. एस. जे. धोबले, वरिष्ठ प्रोफेसर, आरटीएम नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर; तथा डॉ. एस. एस. राठी, डायरेक्टर एवं प्लांट हेड, नलवा स्टील एंड पावर, रायगढ़ ने सहभागिता की और अपने विचार व्यक्त किए। मुख्य अतिथि प्रो. विजय कुमार गोयल ने अपने संबोधन में ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी संस्थान को अकादमिक एवं शोध उत्कृष्टता के उच्च स्तर तक पहुँचाने के लिए दृढ़ प्रतिबद्धता, दूरदर्शिता एवं निरंतर समर्पण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन ज्ञान एवं विचारों के आदान-प्रदान के साथ-साथ नए शोध सहयोग और नवाचार की संभावनाओं को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों का आह्वान किया कि वे सम्मेलन को केवल शोध प्रस्तुत करने के मंच के रूप में न देखते हुए इसे नए विचारों, सहयोग एवं भविष्य की संभावनाओं के निर्माण के अवसर के रूप में उपयोग करें।

उद्घाटन समारोह के दौरान सभी गणमान्य अतिथियों द्वारा AMSCEHT-2026 की स्मारिका का विमोचन भी किया गया। समारोह के अंत में स्कूल ऑफ साइंस के डीन डॉ. गिरिश चंद्र मिश्रा ने सभी गणमान्य अतिथियों, विषय-विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन के तीन दिनों के दौरान कीनोट व्याख्यान एवं 23 तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें देश-विदेश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों एवं विषय-विशेषज्ञों ने सम्मेलन के मूल विषय से संबंधित अपने शोध, अनुभव एवं नवीनतम वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रतिभागियों के साथ साझा किए। कीनोट सत्रों के प्रमुख वक्ताओं में प्रो. राजू कुमार गुप्ता, आईआईटी कानपुर; प्रो. सागर मित्रा, आईआईटी बॉम्बे; श्री मनीष कुमार पांडे, वरिष्ठ निदेशक, इन्फोसिस, भुवनेश्वर; डॉ. रेजिनाल्ड एभिन मास्तो, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख, सीएसआईआर–सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च (CSIR-CIMFR), धनबाद, झारखंड; प्रो. एस. जे. धोबले, वरिष्ठ प्रोफेसर, भौतिकी विभाग, आरटीएम नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर; टी.एस. डॉ. सरथा सथासिवम, यूनिवर्सिटी सैन्स मलेशिया, पेनांग, मलेशिया; तथा प्रो. रमन सिंह, विभागाध्यक्ष/प्रोफेसर, मैकेनिकल एवं एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग, मोनाश यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया प्रमुख रूप से शामिल रहे। सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित तकनीकी सत्रों में लगभग 230 शोध-पत्रों का प्रस्तुतीकरण किया गया, जिनमें उन्नत सामग्री, स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, नैनोप्रौद्योगिकी, बायोमैटेरियल्स, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी तथा सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल प्रौद्योगिकियों से जुड़े नवीनतम शोध एवं निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए। प्रतिभागियों द्वारा किए गए शोध प्रस्तुतियों के पश्चात विशेषज्ञों के साथ प्रश्नोत्तर एवं संवाद के माध्यम से विभिन्न विषयों पर गहन एवं सार्थक चर्चा हुई।
13 सितंबर 2026 को सम्मेलन का समापन सत्र आयोजित किया गया, जिसमें अतिथि के रूप में प्रो. डॉ. अहमद लुत्फी अमरी रामली, डीन, स्कूल ऑफ मैथेमेटिकल साइंसेज, यूनिवर्सिटी सैन्स मलेशिया, पेनांग, मलेशिया की गरिमामयी उपस्थिति रही। विश्वविद्यालय के कुलपति एवं सम्मेलन के चेयरमैन डॉ. आर. डी. पाटीदार ने अपने संबोधन में ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय परिवार की ओर से सम्मेलन से जुड़े सभी विशेषज्ञों, प्रमुख वक्ताओं, शोधकर्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से IEEE जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्था के सहयोग एवं मार्गदर्शन के लिए कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि इनके सहयोग से सम्मेलन को सफलतापूर्वक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित करना संभव हुआ। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों के विचार, शोध-दृष्टिकोण और प्रयास ही भविष्य के समाज एवं उद्योग की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का आह्वान किया कि वे वैज्ञानिक ज्ञान एवं तकनीकी नवाचार को मानव कल्याण से जोड़ते हुए ऐसे भविष्य के निर्माण की दिशा में सामूहिक प्रयास करें, जहाँ प्रौद्योगिकी का प्रत्येक उपयोग समाज और पर्यावरण के हित में हो। समापन सत्र में उपस्थित अतिथियों ने ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय, रायगढ़ तथा सम्मेलन आयोजन समिति को AMSCEHT-2026 के सफल आयोजन के लिए बधाई दी तथा उन्नत सामग्री, स्वच्छ ऊर्जा एवं स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इस सम्मेलन के योगदान और सतत विकास की दिशा में इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
सम्मेलन में देश-विदेश से वैज्ञानिकों, प्रख्यात शिक्षाविदों, प्रोफेसरों, शोधकर्ताओं, शोधार्थियों एवं उद्योग विशेषज्ञों ने सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता निभाई। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने मौलिक शोध कार्य, नवीन विचार एवं अनुसंधान निष्कर्ष प्रस्तुत करने के साथ-साथ उन्नत सामग्री, स्वच्छ ऊर्जा एवं स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकास तथा उभरती अनुसंधान प्रवृत्तियों से परिचित होने का महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ। सम्मेलन में नैनोमैटेरियल्स, स्मार्ट एवं फंक्शनल मैटेरियल्स, ऊर्जा भंडारण, सौर ऊर्जा, हाइड्रोजन एवं अन्य स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियाँ, बैटरी एवं सुपरकैपेसिटर, फ्यूल सेल, बायोमैटेरियल्स, मेडिकल एवं हेल्थकेयर एप्लीकेशन्स, सेंसर एवं डायग्नोस्टिक टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग तथा सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल प्रौद्योगिकियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान एवं तकनीकी चर्चाएँ आयोजित की गईं।
ज्ञातव्य हो कि रायगढ़ के पुंजिपथरा स्थित NAAC “A” ग्रेड प्राप्त ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2014 में राज्य बिल अधिनियम 13 के माध्यम से जिंदल समूह द्वारा विश्वस्तरीय शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। विश्वविद्यालय आधुनिक पाठ्यक्रम, अनुभवी एवं विशेषज्ञ शिक्षकों, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और उत्कृष्ट आधारभूत संरचना के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं उद्योग-उन्मुख शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय शोध, नवाचार, उद्यमिता और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देते हुए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।


