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रायगढ़

मोर गांव, मोर पानी’ अभियान बना ग्रामीण विकास का आधार, जल संरक्षण के साथ हजारों लोगों को मिल रहा रोजगार

मोर गांव, मोर पानी’ अभियान बना ग्रामीण विकास का आधार, जल संरक्षण के साथ हजारों लोगों को मिल रहा रोजगार

*500 से अधिक जल संरक्षण कार्यों में 36 हजार से ज्यादा श्रमिकों को मिल रहा स्थानीय स्तर पर रोजगार

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*तालाब गहरीकरण, डबरी निर्माण और नाला उपचार से बढ़ेगा भूजल स्तर, किसानों को मिलेगा सिंचाई का लाभ

रायगढ़।@संदेशा 24

जिले में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से संचालित ‘मोर गांव, मोर तरिया’ एवं ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा हैं। एक ओर जहां इन अभियानों के माध्यम से जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर हजारों ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने से उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है।
कलेक्टर के निर्देशन एवं सीईओ जिला पंचायत श्री अभिजीत बबन पठारे के मार्गदर्शन में जिलेभर में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। मानसून पूर्व जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण और मरम्मत कार्यों को गति देने के लिए ग्राम पंचायतों में बड़ी संख्या में श्रमप्रधान कार्य शुरू किए गए हैं, जिनमें ग्रामीण श्रमिक उत्साहपूर्वक सहभागिता कर रहे हैं। अभियान के अंतर्गत तालाबों का गहरीकरण, पुराने जलाशयों का जीर्णोद्धार, खेत तालाब और डबरी निर्माण, नाला उपचार, कंटूर ट्रेंच निर्माण, मेडबंधान, जल निकासी संरचनाओं का विकास तथा अन्य प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े कार्य व्यापक स्तर पर किए जा रहे हैं। इन कार्यों का उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन सुनिश्चित करना और ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता को स्थायी रूप से बढ़ाना है।

वर्तमान में जिले में 500 से अधिक जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े कार्य प्रगति पर हैं। इन कार्यों के माध्यम से प्रतिदिन 36 हजार से अधिक श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। विशेष बात यह है कि ग्रामीणों को अपने ही गांव में काम मिलने से पलायन की समस्या पर भी प्रभावी नियंत्रण हुआ है। स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने से ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हो रही है और गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। मनरेगा तथा वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025 के समन्वय से संचालित यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनकर सामने आया है। प्रशासन का प्रयास है कि प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो तथा जल संरक्षण के माध्यम से भविष्य की जल आवश्यकताओं को भी सुरक्षित किया जा सके।
जल संरक्षण के लिए जिले में पारंपरिक और आधुनिक दोनों प्रकार की तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के तहत तालाबों का गहरीकरण, जीर्णोद्धार और डबरी निर्माण किया जा रहा है। वहीं भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए नाला उपचार, स्टॉप डेम, कंटूर ट्रेंच तथा मेडबंधान जैसे कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ ही वर्षा जल संचयन और जल निकासी संरचनाओं में सुधार के माध्यम से आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कार्यों के पूरा होने के बाद वर्षा जल का अधिकतम संचयन संभव होगा, जिससे भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार आएगा। भूजल स्तर बढ़ने से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा, जिसका सीधा लाभ कृषि उत्पादन और पशुपालन गतिविधियों को मिलेगा। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण रोजगार, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, कृषि विकास और भविष्य की जल सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। जल संरक्षण के ये प्रयास आने वाले वर्षों में सूखा जैसी परिस्थितियों से निपटने की क्षमता को भी मजबूत करेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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