महलोई में जयगुरूदेव सत्संग जनजागरण में उमड़ा जन सैलाब ? युवा संस्कारी, शाकहारी सदाचारी बन नशामुक्त समाज का निर्माण करें – पूज्य पंकज जी महाराज

महलोई में जयगुरूदेव सत्संग जनजागरण में उमड़ा जन सैलाब
? युवा संस्कारी, शाकहारी सदाचारी बन नशामुक्त समाज का निर्माण करें – पूज्य पंकज जी महाराज
तमनार @संदेशा 24 # दुलेंद्र पटेल 10.1.2023
जयगुरुदेव आश्रम, मथुरा उ.प्र.से निकली शाकाहार सदाचार मद्यनिषेध जनजागरण यात्रा 15वाँ पड़ाव केलो बनांचल आदिवासी बाहुल्य तहसील तमनार के ग्राम महलोई में हजारो प्रेमी बन्धुओ का जन सैलाब उमड़ पड़ा। गुरु की महत्ता,सुमिरन ध्यान भजन एवं मानव जीवन को भवसागर से पार आध्यात्मिक प्रवचन के साथ शाकाहार सदाचार सद्चरित्रवान बनकर मांस भक्षण मद्यपान ना करने आग्रह किया गया।
आध्यात्मिक सत्संग में जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था, मथुरा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूज्य पंकज जी महाराज ने कहा कि वर्तमान में युवाओं के अन्धकारमय भविष्य को लेकर भी महाराज जी ने बड़ी चिन्ता जताई और कहा कि ये युवा पीढ़ी देश का भविष्य हैं, देश की धरोहर हैं। इनको डिग्री के साथ अच्छे संस्कार की भी जरूरत है। इसी के अभाव में घर बंट गया, खेती बंट गई, जर-जमीन बंट गई, अरे और कहां तक कहूं यहां तक कि मां, बाप भी बंट गये।

कहते हैं कि दस दिन तुम खिलाओ और दस दिन बाद हमारे पास छोड़ देना। संस्कार पड़ेंगे महात्माओं के सत्संग व उनके सत वचनों से। आप बच्चों को भी सत्संग में लायें। उनको शाकाहारी बनाओ, उनको सदाचारी बनाओ। तमी संस्कार जगेगा। वे आप का और देश का नाम रोशन करेंगे। हम सभी समाजसेवियों, धार्मिक लोगों, बुद्धिजीवियों से अपील करते हैं कि लोगों को शाकहार-सदाचारी बनायें तथा शराब जैसे दुर्व्यसन से मुक्त करके अच्छे समाज के निर्माण में सहयोग करें।
सन्तों महात्माओं के सत्संग में किसी की निन्दा, आलोचना नहीं की जाती यहाँ तो भगवान की भक्ति के प्रति प्रेम, प्यार पैदा किया जाता है। प्राण अन्न में चला आया तथा मन की चंचलता बहुत बढ़ गई इसलिये पिछले युगों की साधनायें इस समय सम्भव नहीं हैं। प्रभु ने बहुत दया करके अपने संदेश से संतों को भेजा और उन्होंने आकर सुरत-शब्द योग (नाम-योग) साधना का रास्ता जारी किया, जिसे गृहस्त आश्रम में रहकर आसानी से किया जा सकता है। हमारे मानव शरीर में दोनों आंखों के मध्य भाग से प्रभु के पास जाने का रास्ता है जिसका भेद संत महात्मा जानते हैं। “सतयुग त्रेता द्वापर बीता काहू, न जानी शब्द की रीता। कलयुग में स्वामी दया बिचारी प्रगट करके शब्द पुकारी।” पंक्तियों को उद्धृत करते हुये उन्होंने कहा कि सारी आत्मायें आकाशवाणी देववाणी पर उतार कर लाई गई।

अब यहाँ आकर आत्मा का सम्बन्ध शब्द से टूट गया। अब उसे बोध नहीं रहा कि हम कहाँ से आये और मृत्यु के बाद लोग कहाँ जा रहे हैं। जब प्रभु की प्राप्ति करने वाले महापुरुष मिलेंगे तब इसका बोध होगा और होगा और आत्म कल्याण भी हो जायेगा। यही मानव जीवन पाने का सबसे बड़ा लक्ष्य है।
उल्लेखनीय है कि अपने चौदहवें पड़ाव कोटरीमाल,घरघोड़ा से निकल कर औराईमूड़ा, बरकसपाली, कोलम, चितवाही, सराईडीपा, कठरापाली, डोलेसरा, बांधापाली सत्संग भवन, जयगुरुदेव आश्रम कुंजेमुरा, हुंकराडीपा चौक-गारे संगत, सलिहाभाठा होते हुये काफिला अपने पड़ाव महलोई पहुँचा। घण्टों से प्रतीक्षारत स्थानीय भाई-बहनों ने इन सभी जगहों पर काफिले का भव्य स्वागत किया। सभी घरों के सामने रंगोली व दीप कलश सजे हुये थे। हर जगह टोलियों में साज-बाज के साथ परम्परागत शैली के कर्मा नृत्य बहुत ही मनमोहक लग रहे थे। ग्राम महलोई में स्वागत की छटा अनोखी थी। पूरे गाँव में बहनें अपने सिर पर दीप प्रज्वलित कलश लेकर श्रद्धाभाव से खड़ी थीं। चार-चार टोलियों में कर्मा नृत्य अद्भुत छटा बिखेर रहे थे। पड़ाव स्थल पर भी कई स्वागत द्वारों के साथ विद्युत प्रकाश की आकर्षक साज सज्जा की गई थी।
इस अवसर पर जयगुरुदेव संगत छत्तीसगढ़ के पर्यवेक्षक जसवन्त प्रसाद चौरसिया, प्रान्तीय अध्यक्ष डॉ. कमल सिंह पटेल, जिलाध्यक्ष हेमशंकर पटेल मुन्ना, प्रवक्ता बैरागीराम राठिया, विधायक विद्यावती सिदार, दिलचन्द साव, चम्पूराम राठिया, गुरुचरन पटेल, कृष्णाराम राठिया, चित्रसेन परनायक, सरपंच तीरथ राठिया, उप सरपंच राम परनायक,संतीश बेहरा,रमेश बेहरा,अरुण बेहरा,पत्रकार दुलेंद्र पटेल,अश्वनी मालाकार,बनमाली सिदार अन्य जनप्रतिनिधियों गणमान्य नागरिक एवं हजारो सत्संगी प्रेमी भइयो बहनो की उपस्थिति रही।


