बाल मधुमेह की समय पर पहचान और प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ की पहल

बाल मधुमेह की समय पर पहचान और प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ की पहल
*105 मितानिन प्रशिक्षकों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण, समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने पर जोर*
रायगढ @संदेशा 24
बच्चों में बढ़ते मधुमेह, विशेषकर टाइप-1 डायबिटीज की समय पर पहचान, प्रभावी उपचार और समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जिला स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कलेक्टर के निर्देश पर आयोजित इस कार्यशाला में जिले भर के 105 मितानिन प्रशिक्षकों, विकासखंड समन्वयकों, एसपीएस एवं जिला समन्वयकों ने भाग लिया।
कार्यशाला में यूनिसेफ के विशेषज्ञों ने बताया कि टाइप-1 डायबिटीज बच्चों में होने वाली एक गंभीर लेकिन प्रबंधनीय बीमारी है। इसकी समय पर पहचान और उचित उपचार से बच्चों को स्वस्थ एवं सामान्य जीवन प्रदान किया जा सकता है। प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को बीमारी के लक्षणों की शीघ्र पहचान, उपचार, परामर्श एवं समग्र प्रबंधन संबंधी तकनीकी जानकारी प्रदान करना था, ताकि वे समुदाय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा सकें।
प्रशिक्षण के दौरान टाइप-1 डायबिटीज की पहचान, उपचार एवं प्रबंधन, रोगी परामर्श एवं सहायता समूहों की भूमिका, समुदाय आधारित जागरूकता रणनीतियां तथा मानसिक स्वास्थ्य एवं पारिवारिक सहयोग के महत्व जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने समूह गतिविधियों एवं अनुभव साझा करते हुए विषय की गहन समझ विकसित की, जिससे भविष्य में बाल मधुमेह से प्रभावित बच्चों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण एवं सराहनीय पहल है। इससे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की क्षमता में वृद्धि होगी और बाल मधुमेह के मामलों की समय पर पहचान एवं उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा। प्रशिक्षण का संचालन यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह एवं श्री अक्षय तिवारी के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति रही, जो इस विषय के प्रति स्वास्थ्यकर्मियों की गंभीरता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
कार्यक्रम में जिला नोडल अधिकारी (एनसीडी) डॉ. कैनन डेनियल, जिला नोडल अधिकारी सिकल सेल डॉ. जावेद, जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री रंजना पैकरा, डीपीएचएन श्रीमती सीमा बरेठ तथा सहायक नोडल सलाहकार डॉ. सुमित मंडल सहित जिला स्तर के अधिकारियों का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। विशेषज्ञों ने बताया कि टाइप-1 डायबिटीज के प्रमुख लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार भूख लगना, अचानक वजन कम होना, कमजोरी एवं थकान, धुंधला दिखाई देना, घाव का देर से भरना तथा बच्चों में चिड़चिड़ापन या व्यवहार में बदलाव शामिल हैं। उन्होंने संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण, मीठे पेयों से परहेज तथा नियमित स्वास्थ्य जांच को स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। स्वास्थ्य विभाग ने विश्वास व्यक्त किया है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से बाल मधुमेह की समय पर पहचान और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित कर बच्चों के स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की जा सकेगी।

