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रायगढ़

धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलें बनेंगी किसानों की आय का नया आधार

धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलें बनेंगी किसानों की आय का नया आधार

*कृषि महाविद्यालय ने ऊंची भूमि के लिए सुझाईं उन्नत किस्में, दलहनी एवं तिलहनी फसलों की खेती होगी अधिक लाभकारी*

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रायगढ़ @संदेशा 24

कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, रायगढ़ ने किसानों को मौसम एवं भूमि की परिस्थितियों के अनुरूप फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह दी है। विशेष रूप से ऊंची भूमि वाले क्षेत्रों में धान के स्थान पर दलहनी एवं तिलहनी फसलों की खेती को बढ़ावा देने की अनुशंसा की गई है। इससे किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ आय बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, रायगढ़ के अधिष्ठाता डॉ. ए.के. सिंह ने बताया कि ऊंची भूमि में धान के स्थान पर अरहर, मूंग, उड़द जैसी दलहनी तथा सोयाबीन, मूंगफली, रामतिल और तिल जैसी तिलहनी फसलों की खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प है। इन फसलों की खेती से उत्पादन में विविधता आने के साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने किसानों से कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित उन्नत किस्मों का चयन कर वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने की अपील की।
डॉ. सिंह ने बताया कि धान की कम अवधि वाले किस्म बस्तर धान-1, इंद्रावती धान-1, इंदिराबरानी धान-1, छत्तीसगढ़ तेजस्वी बरानी धान-2, छत्तीसगढ़ धान-1919, विक्रम टीसीआर सहित प्रोटाजीन किस्मों की अनुशंसा की गई है। वहीं कोदो के लिए इंदिरा कोदो-1, छत्तीसगढ़ कोदो-2 एवं 3, कुटकी के लिए छत्तीसगढ़ कुटकी-1, छत्तीसगढ़ कुटकी-2 एवं छत्तीसगढ़ सोन कुटकी तथा रागी के लिए इंदिरा रागी-1, 2 एवं 3 उपयुक्त किस्में बताई गई हैं। दलहनी फसलों में अरहर की राजीवलोचन, छत्तीसगढ़ अरहर-1, छत्तीसगढ़ अरहर-2 (सावित्री), बीडीएन-716 एवं केआरजी-33, कुल्थी की बस्तर कुल्थी, इंदिरा कुल्थी-1, छत्तीसगढ़ कुल्थी-2 एवं 3, शबरी कुल्थ, अलख तथा बिलासा कुल्थी, मूंग की विराट एवं शिखा तथा उड़द की ठंदिरा उड़द प्रथम, नर्मदा एवं दृष्टि किस्मों की अनुशंसा की गई है।
इसी प्रकार तिलहनी फसलों में इंदिरा सोया-9, छत्तीसगढ़ सोयाबीन-1, आरएससी-10, आरएससी-10-52 (ई), आरएससी-10-07, आरएससी-10-71, आरएससी-11-35 एवं सीजी सोया-11-15 सोयाबीन की उन्नत किस्में, मूंगफली की छत्तीसगढ़ मूंगफली-1 एवं छत्तीसगढ़ ट्राम्बे मूंगफली, रामतिल की जेएनसी-9 एवं जेएनएस-6 तथा तिल की टीकेजी-21, टीकेजी-22, जवाहर तिल-12 एवं जवाहर तिल-14 किस्में किसानों के लिए अनुशंसित की गई हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि किसान अपनी भूमि की प्रकृति के अनुरूप इन अनुशंसित फसलों एवं उन्नत किस्मों का चयन कर वैज्ञानिक तकनीकों के साथ खेती करें। इससे खेती अधिक लाभकारी बनने के साथ उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि होगी।

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