ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय में “आरम्भ 2026” के साथ नवप्रवेशी छात्रों के उज्ज्वल भविष्य और शैक्षणिक यात्रा का भव्य शुभारंभ

ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय में “आरम्भ 2026” के साथ नवप्रवेशी छात्रों के उज्ज्वल भविष्य और शैक्षणिक यात्रा का भव्य शुभारंभ
(“आप सभी विद्यार्थी अपने सपनों और संभावनाओं के सशक्त वाहक हैं। इस यात्रा में धैर्य, समर्पण और निरंतर प्रयास ही आपकी सफलता की कुंजी होंगे। नई सोच के साथ आगे बढ़ें, चुनौतियों को अवसर में बदलें और अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहें। यही आरंभ आपको उत्कृष्टता की ओर ले जाकर आपके भविष्य को नई दिशा प्रदान करेगा।” — डॉ. आर. डी. पाटीदार, कुलपति, ओ.पी.जे.यू.)
रायगढ़ @ संदेशा 24
ओ. पी. जिंदल विश्वविद्यालय, रायगढ़ में स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट तथा स्कूल ऑफ साइंस के नवप्रवेशित प्रथम वर्ष (बी.टेक., बी.एससी., बीबीए, बीकॉम, बीए, एमबीए, एम.एससी. एवं डिप्लोमा) के सभी विद्यार्थियों के लिए 21 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक आयोजित दो सप्ताहीय इंडक्शन प्रोग्राम (अभिमुखीकरण कार्यक्रम) का शुभारंभ 21 जुलाई को हुआ।
विश्वविद्यालय के पूंजीपथरा परिसर में आयोजित इस प्रेरणादायक उद्घाटन सत्र का उद्देश्य नवप्रवेशी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करना तथा उन्हें विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश से परिचित कराना है, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ अपने नए शैक्षणिक जीवन की सफल शुरुआत कर सकें।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान एवं दीप प्रज्वलन के साथ गरिमामय वातावरण में हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. डी. पाटीदार ने अपने उद्बोधन में सभी नवप्रवेशित विद्यार्थियों का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा,
“आज से आप सभी एक नई और सार्थक यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं। यह केवल उच्च शिक्षा का आरंभ नहीं, बल्कि आपके व्यक्तित्व निर्माण, कौशल विकास और नेतृत्व क्षमता को सशक्त करने का महत्वपूर्ण चरण है। ओ. पी. जिंदल विश्वविद्यालय आपको केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आपको जिम्मेदार, संवेदनशील और दूरदर्शी नागरिक के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। आपके भीतर अपार क्षमताएं निहित हैं—यह संस्थान आपको उन्हें पहचानने, संवारने और उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। चुनौतियों को बाधा नहीं, बल्कि सीखने और आगे बढ़ने का माध्यम समझें। यह अभिमुखीकरण कार्यक्रम आपके भीतर जिज्ञासा, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का एक सशक्त प्रयास है।”
उन्होंने आगे कहा,
“आप सभी विद्यार्थी अपने सपनों और संभावनाओं के सशक्त वाहक हैं। इस यात्रा में धैर्य, समर्पण और निरंतर प्रयास ही आपकी सफलता की कुंजी होंगे। नई सोच के साथ आगे बढ़ें, चुनौतियों को अवसर में बदलें और अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहें। यही आरंभ आपको उत्कृष्टता की ओर ले जाकर आपके भविष्य को नई दिशा प्रदान करेगा।”
इस अवसर पर डॉ. पाटीदार ने जिंदल स्टील के चेयरमैन श्री नवीन जिंदल जी के प्रेरणादायी नेतृत्व तथा उनके राष्ट्र निर्माण के दृष्टिकोण का उल्लेख किया। साथ ही, उन्होंने कुलाधिपति श्रीमती शालू जिंदल जी के संदेश को साझा करते हुए बताया कि विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और समग्र विकास की भावना का संवर्धन ही विश्वविद्यालय की मूल प्रतिबद्धता है। उन्होंने दोनों के मार्गदर्शन एवं सतत समर्थन के लिए अपनी कृतज्ञता भी व्यक्त की तथा अंत में सभी विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. एल. आर. भंडारकर (प्रमुख – प्रथम वर्ष, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग) ने प्रेरण कार्यक्रम के उद्देश्यों एवं उसकी प्रासंगिकता को विस्तार से स्पष्ट किया। उन्होंने विद्यार्थियों को एक उत्तरदायी, आत्मविश्वासी और सक्षम पेशेवर के रूप में विकसित होने के लिए प्रेरित करते हुए इस कार्यक्रम को उनके समग्र व्यक्तित्व निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सार्थक पहल बताया।
इस अवसर पर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के वाइस डीन डॉ. एम. रामासामी ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यह उनके जीवन का अत्यंत निर्णायक चरण है, जहाँ वे अपने भविष्य की दिशा निर्धारित कर रहे हैं। उन्होंने सकारात्मक सोच, सुदृढ़ मानसिकता और दृढ़ संकल्प के महत्व पर बल दिया तथा कहा कि वर्तमान उद्योग जगत आत्म-प्रेरित, जिज्ञासु और उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत युवाओं को प्राथमिकता देता है।
इसी क्रम में, स्कूल ऑफ साइंस के प्राध्यापक (मानविकी विभाग) एवं वाइस डीन–यूएसआर, डॉ. संजय कुमार सिंह ने कौशल विकास, अनुकूलनशीलता और नवाचार की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आज के उद्योग जगत में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता, सृजनात्मक सोच और सतत सीखने की प्रवृत्ति अत्यंत आवश्यक है।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अनुराग विजयवर्गीय ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा,
“ज्ञान के प्रति गंभीरता, समस्याओं को नए दृष्टिकोण से देखने का साहस और पहल करने की क्षमता ही आपको विशिष्ट बनाती है तथा सफलता की ओर अग्रसर करती है।”
उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार के साथ-साथ सामाजिक एवं पर्यावरणीय उत्तरदायित्वों को समझने और उन्हें अपने आचरण में आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय, रायगढ़ के कुलपति प्रो. विनय चौहान ने शिक्षा और उद्योग के मध्य विद्यमान अंतर को पाटने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे व्यवहारिक रूप में लागू करने की दक्षता तथा उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को निरंतर अद्यतन करना अनिवार्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से आजीवन सीखने की आदत विकसित करने, नवाचार, नैतिक मूल्यों और सस्टेनेबिलिटी को अपनाने का आह्वान किया।
इंडक्शन कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा हेतु विभिन्न विषय विशेषज्ञों और अनुभवी शिक्षाविदों के व्याख्यान आयोजित किए गए। इस अवसर पर डॉ. महेश भिवापुरकर, डॉ. आशीष शर्मा, डॉ. दीप्ति स्वैन एवं डॉ. कल्याण फणी ने शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार, कौशल विकास, नेतृत्व क्षमता एवं व्यावसायिक दृष्टिकोण के महत्व पर अपने विचार साझा किए। सभी वक्ताओं ने विश्वविद्यालय की उद्योगोन्मुख एवं कौशल-आधारित शिक्षा प्रणाली की सराहना की।
उद्घाटन सत्र का सफल समापन डॉ. स्वाति वर्मा द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी विशिष्ट अतिथियों, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. सुजाता पांडा एवं डॉ. वत्सला चतुर्वेदी द्वारा किया गया।
दो सप्ताह के इस इंडक्शन कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु कार्यशालाएँ, विशेषज्ञ व्याख्यान, औद्योगिक भ्रमण, टीम-बिल्डिंग सत्र, संवाद कौशल विकास कार्यक्रम, खेलकूद तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ आयोजित की जाएँगी। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता, सहयोगात्मक दृष्टिकोण, समय प्रबंधन एवं सामाजिक कौशल का भी विकास होगा। साथ ही, उन्हें नए संबंध स्थापित करने तथा एक समृद्ध अकादमिक एवं सामाजिक समुदाय का हिस्सा बनने का अवसर प्राप्त होगा, जिससे उनका विश्वविद्यालय जीवन अधिक सार्थक एवं सफल बन सकेगा.

