वर्षा ऋतु में संक्रामक रोगों से बचाव के लिए बरतें सावधानी
वर्षा ऋतु में संक्रामक रोगों से बचाव के लिए बरतें सावधानी
रायगढ़ @ संदेशा 24
वर्षा ऋतु में कभी तेज धूप तो कभी बारिश होने के कारण विभिन्न प्रकार के संक्रामक एवं मौसमी रोगों के फैलने की आशंका बढ़ जाती है। इस दौरान दूषित पानी एवं भोजन से डायरिया, पीलिया और टायफाइड जैसे जलजनित रोग, जबकि सर्दी-खांसी, न्यूमोनिया एवं इन्फ्लूएंजा-ए एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) जैसे श्वसन तंत्र के संक्रमण होने की संभावना रहती है। वहीं, घरों एवं आसपास पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या बढ़ने के कारण डेंगू और मलेरिया जैसे वेक्टर जनित रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत ने नागरिकों से सावधानी बरतने तथा संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी उपाय अपनाने की अपील की है।
डायरिया दूषित पानी एवं भोजन के सेवन से फैलता है। इसके प्रमुख लक्षणों में बार-बार पतला दस्त, भूख कम लगना, शरीर में पानी की कमी, अधिक प्यास लगना और उल्टी शामिल हैं। इसी तरह दूषित भोजन एवं संक्रमित पानी से पीलिया तथा टायफाइड भी हो सकता है। पीलिया में भूख न लगना, गहरे पीले रंग का पेशाब, सिरदर्द, उल्टी, कमजोरी, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द तथा आंखों और त्वचा का पीला होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। टायफाइड में भूख न लगना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, तेज बुखार, सुस्ती और दस्त की शिकायत हो सकती है। इनसे बचाव के लिए पीने के पानी को उबालकर ठंडा करने के बाद ही उपयोग करें तथा पानी को हमेशा ढककर रखें। कुएं एवं नलकूपों में लिक्विड क्लोरीन तथा मटके के पानी में क्लोरीन टेबलेट का निर्धारित मात्रा में उपयोग करें। खाना बनाने से पहले, भोजन करने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ अच्छी तरह धोएं। खुले में रखी, बासी या सड़ी-गली खाद्य सामग्री, फल एवं सब्जियों का उपयोग न करें। हमेशा ताजा एवं गर्म भोजन करें तथा पर्याप्त मात्रा में पानी एवं अन्य तरल पदार्थ लेते रहें। उल्टी-दस्त होने पर ओआरएस का सेवन करें और बच्चों में दस्त होने पर ओआरएस के साथ जिंक की गोली का उपयोग चिकित्सकीय सलाह के अनुसार करें।
*स्वाइन फ्लू सहित श्वसन रोगों से बचाव के लिए रहें सतर्क*
इन्फ्लूएंजा-ए एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) श्वसन तंत्र का संक्रामक रोग है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने एवं श्वसन संबंधी बूंदों के माध्यम से फैल सकता है। इसके प्रमुख लक्षणों में बुखार, सर्दी, खांसी, छींक, कफ, गले में खराश, सिरदर्द, बदनदर्द, ठंड लगना, थकान, उल्टी, दस्त और पेटदर्द शामिल हैं। स्वाइन फ्लू से घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन सतर्कता जरूरी है। खांसते या छींकते समय नाक और मुंह को रूमाल या टिशू पेपर से ढंकें। खांसने या छींकने वाले व्यक्ति से उचित दूरी बनाए रखें और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। हाथों को बार-बार साबुन एवं पानी से धोते रहें। पर्याप्त नींद लें, तनाव से बचें और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। पर्याप्त पानी, तरल पदार्थ एवं पौष्टिक भोजन का सेवन करें। यदि स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में जांच एवं उपचार कराएं। संक्रमण की आशंका होने पर घर पर रहें और स्कूल अथवा कार्यालय जाने से बचें, ताकि संक्रमण दूसरे लोगों तक न पहुंचे।
*मच्छरों की रोकथाम ही डेंगू-मलेरिया से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय*
वर्षा के दौरान घर के अंदर और आसपास पानी जमा न होने दें। किसी भी पात्र, टायर, गमले, डिब्बे या अन्य स्थान पर खुले में पानी जमा न होने दें, क्योंकि इनमें मच्छरों के पनपने की संभावना रहती है। पानी रखने वाले पात्रों को हमेशा ढककर रखें। आवश्यकतानुसार घर एवं आसपास कीटनाशक का छिड़काव कराएं। खिड़की-दरवाजों पर जाली लगाएं तथा सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। मच्छररोधी उपकरणों का भी उपयोग किया जा सकता है। बच्चों के बाहर खेलने जाने पर चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त मच्छररोधी क्रीम का इस्तेमाल करें और उन्हें ऐसे कपड़े पहनाएं, जो शरीर को अधिकतम ढकें। आसपास डेंगू या मलेरिया से पीड़ित व्यक्ति की जानकारी मिलने पर तत्काल स्वास्थ्य विभाग अथवा संबंधित नगरीय निकाय को सूचना दें, ताकि समय पर मच्छर नियंत्रण के उपाय किए जा सकें। वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम में त्वरित निदान एवं शीघ्र उपचार सबसे महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी अपील की है कि प्रत्येक बुखार में एंटीबायोटिक दवा लेना जरूरी नहीं है। चिकित्सक की सलाह के बिना किसी भी दवा का सेवन न करें। दवा दुकान से सीधे एंटीबायोटिक खरीदकर खाना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। सावधानी, स्वच्छता और समय पर उपचार अपनाकर वर्षा ऋतु में होने वाले संक्रामक एवं मौसमी रोगों से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।

