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रायगढ़

चार प्रमुख कोयला एवं विद्युत परियोजनाएं संरक्षित क्षेत्र घोषित

चार प्रमुख कोयला एवं विद्युत परियोजनाएं संरक्षित क्षेत्र घोषित

*कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी ने जारी किए आदेश*

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*निर्बाध कोयला उत्पादन, विद्युत आपूर्ति और महत्वपूर्ण अधोसंरचनाओं की सुरक्षा के लिए लिया गया निर्णय*

रायगढ़ @ संदेशा 24

जिले में कोयला उत्पादन, संप्रेषण एवं विद्युत उत्पादन से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की सुरक्षा और निर्बाध संचालन सुनिश्चित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री मयंक चतुर्वेदी ने छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 की धारा 25, 26 एवं 28 के तहत अडानी पावर लिमिटेड, एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड की तलाईपल्ली परियोजना, एसईसीएल छाल ओपनकास्ट माइंस तथा जिंदल पावर लिमिटेड की प्रमुख परियोजनाओं एवं संबंधित परिसंपत्तियों को संरक्षित-प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने के आदेश जारी किए हैं।
यह निर्णय संबंधित परियोजनाओं के महत्व, ऊर्जा सुरक्षा, निर्बाध कोयला एवं विद्युत उत्पादन तथा महत्वपूर्ण औद्योगिक अधोसंरचनाओं के सुरक्षित संचालन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। संबंधित संस्थाओं द्वारा प्रस्तुत आवेदनों के आधार पर अनुविभागीय दंडाधिकारी एवं राजस्व अधिकारियों से जांच एवं वस्तुस्थिति प्रतिवेदन प्राप्त किए गए थे। इन प्रतिवेदनों में परियोजनाओं की सुरक्षा एवं संचालन की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की अनुशंसा की गई थी।

*अडानी पावर का छोटेभंडार परियोजना क्षेत्र संरक्षित*

अडानी पावर लिमिटेड के ग्राम छोटेभंडार, बड़ेभंडार, अमलीभौना, सरवानी एवं अन्य संबंधित ग्रामों में स्थित सम्पूर्ण परियोजना क्षेत्र को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है। इसमें छोटेभंडार क्षेत्र स्थित ऊर्जा उत्पादन संयंत्र शामिल है। प्रशासनिक प्रतिवेदन में संयंत्र को राज्य के ऊर्जा उत्पादन की दृष्टि से महत्वपूर्ण इकाई बताते हुए निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक बताई गई थी।

*तलाईपल्ली कोयला खदान और संबंधित परिसर दायरे में*

एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड की तलाईपल्ली कोल माइनिंग परियोजना, तहसील घरघोड़ा के सम्पूर्ण परियोजना क्षेत्र, खदान क्षेत्र तथा संबंधित महत्वपूर्ण परिसरों और पहुंच मार्गों को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है। इसमें कोल हैंडलिंग प्लांट एवं कोल स्टॉक यार्ड, वार्फवाल नंबर 1, 2 एवं 3, ईस्ट पिट, वेस्ट पिट एवं सेंट्रल पिट सहित माइनिंग ऑपरेशन एरिया, प्रशासनिक भवन एवं कोल लैब, रेलवे साइडिंग, मैगजीन परिसर, पिट ऑफिस, वे-ब्रिज, स्टेबलाइजेशन सेंटर, वीटीसी एवं सेफ्टी पार्क, सब-स्टेशन, कांट्रेक्टर कैम्प, एनटीपीसी कोसल विहार टाउनशिप, कंचनपुर तथा संबंधित पहुंच मार्ग शामिल हैं।

*एसईसीएल छाल के छह महत्वपूर्ण परिसर संरक्षित*

एसईसीएल छाल ओपनकास्ट माइंस (सीम-III परियोजना) के छह महत्वपूर्ण परिसरों को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है। इनमें साइलो, रेलवे साइडिंग एवं मोबाइल क्रेशर, कोल स्टॉक एरिया, माइनिंग ऑपरेटिंग एरिया एवं वर्कशॉप, कोल सैंपलिंग एरिया, सिक्योरिटी चेक पोस्ट तथा सब एरिया मैनेजर कार्यालय एवं सेंट्रल स्टॉक क्षेत्र शामिल हैं। इन परिसरों की सीमाएं संबंधित मार्गों, चौकों, नदी एवं आसपास की भूमि के आधार पर आदेश में निर्धारित की गई हैं।

*जिंदल पावर की छह प्रमुख परियोजनाएं भी शामिल*

जिंदल पावर लिमिटेड की छह प्रमुख परियोजनाओं एवं संबंधित परिसंपत्तियों को भी संरक्षित-प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है। इनमें गारे पेलमा IV/1, गारे पेलमा IV&283 एवं गारे पेलमा IV/6 कोयला खदानें एवं संबंधित माइनिंग/ऑपरेशनल क्षेत्र, 3400 मेगावाट तमनार पावर प्लांट एवं ऐश डाइक, कोल हैंडलिंग प्लांट एवं कोल वॉशरीज, क्रॉस कंट्री पाइप कन्वेयर (CCPC) एवं संबंधित कॉरिडोर, डोंगामहुआ कैप्टिव पावर प्लांट तथा कोल स्टॉक यार्ड, मैगजीन, ANFO प्लांट एवं अन्य महत्वपूर्ण ऑपरेशनल एवं सेफ्टी इंस्टॉलेशन शामिल हैं।

*प्रवेश के लिए वैध अनुमति आवश्यक*

जारी आदेशों के अनुसार संरक्षित क्षेत्रों में बिना सक्षम अनुमति प्रवेश नहीं किया जा सकेगा। अधिकृत प्राधिकारी द्वारा जारी वैध पहचान पत्र अथवा प्रवेश पत्र के आधार पर ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रवेश की अनुमति होगी। प्रवेश पत्र में संबंधित क्षेत्र, प्रवेश का उद्देश्य, कार्य की प्रकृति तथा अनुमति की वैधता अवधि का स्पष्ट उल्लेख किया जाना आवश्यक होगा। संरक्षित क्षेत्रों में जिला दंडाधिकारी की पूर्व लिखित अनुमति के बिना सभा, बैठक, धरना-प्रदर्शन, नारेबाजी, जुलूस, चक्काजाम अथवा सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जा सकेंगे। इसी प्रकार निर्धारित अनुमति के बिना वायरलेस सेट, अनधिकृत कैमरा अथवा रिकॉर्डिंग उपकरण, हथियार, विस्फोटक सामग्री, रासायनिक एवं ज्वलनशील पदार्थ लेकर प्रवेश पर भी प्रतिबंध रहेगा।
आदेशों में संरक्षित क्षेत्रों के सुरक्षित एवं व्यवस्थित संचालन के लिए अनधिकृत प्रवेश तथा अनधिकृत गतिविधियों पर नियंत्रण के प्रावधान किए गए हैं। निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति अथवा संगठन के विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 की धारा 25, 26 एवं 28 तथा अन्य सुसंगत वैधानिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि जिले में ऊर्जा क्षेत्र की महत्वपूर्ण परियोजना एनटीपीसी लिमिटेड लारा के सम्पूर्ण परियोजना क्षेत्र को भी पूर्व में छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 की धारा 26 के तहत संरक्षित क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। जिला प्रशासन के इन निर्णयों से जिले में कोयला उत्पादन, कोयला संप्रेषण एवं विद्युत उत्पादन से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के सुरक्षित एवं निर्बाध संचालन के लिए निर्धारित व्यवस्था को और मजबूती मिली है।

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