गायत्री शक्तिपीठ तमनार में आओ गढें संस्कारवान पीढ़ी गर्भवती माताओं का पुंसवन संस्कार यज्ञीय वातावरण में सम्पन्न

गायत्री शक्तिपीठ तमनार में आओ गढें संस्कारवान पीढ़ी गर्भवती माताओं का पुंसवन संस्कार यज्ञीय वातावरण में सम्पन्न

तमनार @ संदेशा 24 दुलेन्द्र पटेल
दिनांक 10.08.2021 को गायत्री शक्तिपीठ तमनार में आओ गढें संस्कारवान पीढ़ी 09 दिवसीय आनलाइन प्रशिक्षण की अंतिम दिवस गर्भवती माताओं का पुंसवन संस्कार यज्ञीय वातावरण में सम्पन्न किया गया।

2 अगस्त से 10 अगस्त तक जूम वर्चुवल के पश्चात 10 अगस्त को गर्भवती बहनो का गर्भ पूजन गर्भ संस्कार का विशेष क्रम में गर्भस्थ शिशु में सुसंस्कारों की स्थापना हेतु वैदिक मंत्रों द्वारा गर्भ संस्कार दिव्य आध्यात्मिक वातावरण में सीधे शांतिकुंज गायत्री तीर्थ से संस्कार का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

हिन्दू धर्म में, संस्कार परम्परा के अंतर्गत भावी माता-पिता को यह तथ्य समझाए जाते हैं कि शारीरिक, मानसिक दृष्टि से परिपक्व हो जाने के बाद, समाज को श्रेष्ठ, तेजस्वी नई पीढ़ी देने के संकल्प के साथ ही संतान पैदा करने की पहल करें। गर्भ ठहर जाने पर भावी माता के आहार, आचार, व्यवहार, चिंतन, भाव सभी को उत्तम और संतुलित बनाने का प्रयास किया जाय। उसके लिए अनुकूल वातवरण भी निर्मित किया जाय। गर्भ के तीसरे माह में विधिवत पुंसवन संस्कार सम्पन्न कराया जाय, क्योंकि इस समय तक गर्भस्थ शिशु के विचार तंत्र का विकास प्रारंभ हो जाता है। वेद मंत्रों, यज्ञीय वातावरण एवं संस्कार सूत्रों की प्रेरणाओं से शिशु के मानस पर तो श्रेष्ठ प्रभाव पड़ता ही है, अभिभावकों और परिजनों को भी यह प्रेरणा मिलती है कि भावी माँ के लिए श्रेष्ठ मनःस्थिति और परिस्थितियाँ कैसे विकसित की जाए।


