पुजारीपाली गांव की रहस्यमयी कहानी..यहाँ विराजमान है देवो के देव…मंदिर में सैकड़ों पुरातत्व अवशेष सुरक्षित ..

पुजारीपाली गांव की रहस्यमयी कहानी..यहाँ विराजमान है देवो के देव…मंदिर में सैकड़ों पुरातत्व अवशेष सुरक्षित ..
पत्थर में उकेरी गई भगवान विष्णु, भगवान शिव व मां काली से लेकर भगवान के कई रूप
शिवालय का निर्माण शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा ने एक रात में किया…

बरमकेला संदेशा @ हुमेश जायसवाल 13.7.2020
हम आपको शिव के उस रूप से मिलाएंगे जो पाताल गामी के नाम से जाना जाता है इस शिवलिंग की खास बात यह है कि यहां कितना भी आप जल चढ़ाओ लेकिन जलाभिषेक किया हुआ जल कहां जाता है इसका अब तक पता नहीं चल पाया वही उसका मंदिर भी काफी पुराना है कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने की थी यह मंदिर करीब पंद्रह सौ साल पहले यानी पांचवी छठी शताब्दी का है क्या इस मंदिर की खास बात देखें इस खास रिपोर्ट में….
छठवीं शताब्दी की प्रतिमाओं को मंदिर में सुरक्षित रखकर रोज पूजा कर रहे पुजारीपाली के ग्रामीण
जिले में आज भी कई ऐसे स्थान व पुरातत्व सामग्री देखने को मिलते हैं। जिससे कई दशक पहले की याद ताजा हो जाती है। ऐसा ही.
जिले में आज भी कई ऐसे स्थान व पुरातत्व सामग्री देखने को मिलते हैं। जिससे कई दशक पहले की याद ताजा हो जाती है। ऐसा ही एक गांव जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी की दूरी पर बरमकेला ब्लॉक के पुजारीपाली स्थित है।
गांव में जाने के बाद हर कोई इतिहास में ही वापस लौट जाता है। यहां एक मंदिर में सैकड़ों पुरातत्व अवशेष रखे गए हैं। छठवीं शताब्दी का पुरातत्व अवशेष मानकर गांव के लोग उसकी बड़ी ही जिम्मेदारी के साथ न सिर्फ हिफाजत कर रहे है, बल्कि शिव मंदिर में रखकर सुबह शाम पूजा भी करते हैं। यही नहीं उन पुरातत्व सामग्रियों से कई कहानियां भी जुड़ी है। जिसे गांव के लोगों ने अपने पूर्वजों से सुनकर आज खुद उसका बखान कर रहे हैं और ऐसे स्थान पर पहुंचने के बाद लोगों के मन में उसे जानने के लिए कई तरह की जिज्ञासा हिचकोले खाने लगती है।
छठवीं शताब्दी के अवशेष
सभी पुरातत्व सामग्रियों को एक मंदिर में रखा गया है। जहां गांव के ग्रामीणों का कहना है कि यहां सैकड़ों पुरातत्व सामाग्री हैं और सभी के सभी छठवीं शताब्दी के अवशेष हैं। आज वाली इसमें कोई बात नहीं है। इन अवशेषों में भगवान के कई रूप भी देखे जा सकते हैं।
राजा-रानी के निशान मौजूद
पत्थर में उकेरी गई भगवान विष्णु, भगवान शिव व मां काली से लेकर भगवान के कई रूप हैं। जिनकी पूजा अर्चना की जाती है। वहीं मंदिर के बाहर राजा व रानी पैर के निशान भी देखे जा सकते हैं। उसे मंदिर के ही मुख्य द्वार के सामने रखा गया है। इसके पीछे भी कुछ कारण होना बताया जाता है।
नाराज हुए भगवान विश्वकर्मा
पुजारीपाली में कई दशक पहले का एक ऐसा प्रवेश द्वार भी है। जो पूरी तरह नहीं बन सका था। इसके पीछे गांव के ग्रामीणों का कहना है कि भगवान विश्वकर्मा जब सृष्टि की रचना कर रहे थे तो वे यहां एक मंदिर भी बना रहे थे, लेकिन रात में धान कुटने की आवाजों से परेशान होकर भगवान नाराज हो गए और इस मंदिर को अधूरे में ही छोड़ उन्होंने छोड़ दिया।
चंद्रहासिनी की बड़ी बहन विराजमान
छटवीं शताब्दी के पुरातात्विक अवशेष।
भगवान विष्णु के अवशेष अंतिम- ग्रामीणों ने बताया है कि करीब एक दशक पहले आखिरी बार पुरातत्व सामाग्री मिला। जिसमें भगवान विष्णु का रूप बना हुआ है और उसे ग्रामीणों ने सुरक्षित रूप से रखा है। इसके बाद से अभी कोई पुरातत्व सामाग्री नहीं मिला है। मंदिर की देखरेख कर रहे पुजारी का कहना है कि पुजेरीपाली में चंद्रपुर की देवी सिद्धपीठ मां चंद्रहासिनी की बड़ी बहन बोर्राहसिनी व उनकी छोटी बहन लोटाहसिनी देवी विराजमान है। जिसकी सुबह व शाम पूजा अर्चना की जाती है। आसपास गांव के श्रद्धालु भी इनकी पूजा-अर्चना के लिए यहां आते हैं।
रखवाल के भरोसे गांव
ग्रामीणों का कहना है कि गांव की पूरी सुरक्षा मंदिर के सामने स्थापित मूर्ति करती है और इसे गांव के सभी लोग रखवाल के नाम से जानते हैं। इनकी भी मान्यता है कि पहले के समय में जहां रखवाल की मूर्ति स्थापित है, उस मार्ग से रात के दौरान कोई भी गर्भवती महिला पार नहीं हो सकती थी। अगर ऐसा होता था तो उस महिला की मौत तत्काल हो जाती थी।
एक रात में तैयार हुआ था महादेव मंदिर
बोर्राहासिनी मंदिर के पुजारी ने बताया कि भगवान विश्वकर्मा ने एक ही रात में महादेव मंदिर का निर्माण किया। जहां आज भगवान शिव की पूजा कई दशक पहले से हो रही है। इस मंदिर को लेकर भी कई विशेषता है। वहीं इस मंदिर के निर्माण के बाद ही एक ओर मंदिर तैयार किया जा रहा था, जो अधूरा रह गया था।

