हौसलों की उड़ान मेहनत का परिणाम पढ़िये ये खबर..

“रख भरोसा खुद पर क्यों ढूंढता है फरिश्ते?
पंछियों के पास कहाँ होते हैं नक्शे?
फिर भी ढूढ़ लेते अपने घोंसले।।”
मोहन नायक@बरमकेला।ऐसे ही हौसलों की उड़ान और अपनी मेहनत से कुछ ऐसा कर दिखाया मुंगेली के दो छात्रो ने । जिससे पूरा दिन मीडिया की सुर्खियों में रहा मुंगेली जिला और उनकी सफलता।आखिर हो भी कैसे नहीँ।कुछ ऐसा करिश्मा जो कर दिखाया इन होनहा yuर बालको ने।
इसका कारण है आज माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूल का परीक्षा परिणाम ।जिस पर समूचे छत्तीसगढ़ की निगाहें थी।कक्षा दसवीं की बोर्ड परीक्षा में जिसमें 3.84 लाख छात्रों ने भाग लिया था। वही 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 2.77 लाख छात्रों ने भाग लिया था इस तरह से 6.61 लाख छात्रों एवं उनके पालक ,शिक्षक परिजन सारे मिला के लाखों लोगों को इस परिणाम का बेसब्री से इंतजार था। जो आज निर्धारित समय11 बजे शिक्षा मंत्री प्रेमसाय टेकाम एवं सचिव डॉ आलोक शुक्ला के द्वारा परिणाम जारी करते ही मिनटों में मुंगेली जिला सुर्ख़ियों में आ गया ।
प्रज्ञा कश्यप ने रचा इतिहास
इसका कारण शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जरहागांव की छात्रा कुमारी प्रज्ञा कश्यप जो कि एक सरकारी विद्यालय में पढ़कर भी न सिर्फ टॉप टेन में फर्स्ट रैंक हासिल किया बल्कि शत प्रतिशत अंक हासिल कर एक नया रिकॉर्ड कायम किया ।पूरे 600 अंकों में 600 अंक हासिल करके। प्रज्ञा कश्यप एक मध्यमवर्गीय शिक्षक परिवार की लड़की है जो कि ऊंचे मुकाम, ऊंचे सोच, ऊंचा हौसला रखती है उसकी तमन्ना है आईएएस बनने की। अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने की देश एवं समाज की सेवा करने की।देखिये आखिर क्या कहती है-
टॉपर बना टिकेश वैष्णव
वही दूसरा जो नाम है हायर सेकंडरी की टॉप टेन की सूची में फास्ट रैंक अर्जित कर सफलता की इबारत लिखने वाला मुंगेली बिलासपुर रोड पर एक मामूली सा पान दुकान चलाने वाला और मुश्किल से परिवार का गुजारा चलाने वाला का होनहार लड़का टिकेश वैष्णव।जो सरस्वती शिशु मंदिर मुंगेली में पढ़कर 97.80 प्रतिशत अंक हासिल करके मुंगेली के गौरव को बढ़ाया। अपनी हौसला और मेहनत के बल पर समस्याओं को कभी आड़े नहीं आने दिया और एक नई इबारत लिखी मुंगेली जिले के इतिहास में प्रज्ञा एवं टिकेश ने। टिकेश का आखिर क्या है कहना खुद सुने-
हौसला और लक्ष्य से मिलती है सफलता
आखिर हौसलों की उड़ाने और मेहनत से मुकाम हासिल करने वालों की जज्बे को सलाम। आने वाले होनहार छात्रो के लिए एक सन्देश है सफलता के लिए न बड़े नामी गिरामी स्कूल चाहिए न सुविधाओं का अम्बार।चाहिए तो बस हौसला -मेहनत और एक लक्ष्य मुकाम तक पहुंचने की।

