श्री देव्यथर्वशीर्षम् पाठ का विशेष महासंयोग

श्री देव्यथर्वशीर्षम् पाठ का विशेष महासंयोग

रायगढ़ संदेशा @ ज्योतिषाचार्य पं किशोर पाणिग्रही
इस महिने 14 जुलाई के दिन मंगलवार
और अश्विनी नक्षत्र है ।
मंगलवार के दिन जब अश्विनी नक्षत्र होता है,
तब श्री देवी अथर्वशीर्ष स्तोत्र के पठन
का बहुत महत्त्व है ।
भगवती दुर्गाजी के साधक
श्री देवी “अथर्वशीर्ष स्तोत्र”से परिचित होते है ।
इस स्तोत्र मे भगवती ने स्वतः समस्त देवताओं
को अपने गोपनीय स्वरुप के बारे मे बताया है ।
समस्त ब्रह्मांड की उत्पत्ती मुझसे ही हुयी है ,
और ब्रह्माण्ड मे सब कुछ मै ही हूं ,
यह बात इस स्तोत्र के द्वारा भगवती
ने स्पष्ट रुप से प्रतिपादित किया है ।
भगवती के सगुण और निर्गुण स्वरुप
एवम इस सृष्टी के समस्त चराचर मे ,
उनका होना इस बात का भी स्पष्ट उल्लेख है।
इस स्तोत्र मे भगवती के दस महाविद्या
स्वरुप के बारे मे भी स्पष्ट रुप ,
से बताया गया है ।
उक्त स्तोत्र मे भगवती ललिता महात्रिपुरसुंदरी
के ध्यान मंत्र एवं उनके पंचदशी मंत्र के ,
बारे मे भी बताया गया है ।
और भगवती भुवनेश्वरी के बीज मंत्र
जो की शक्ति प्रणव कहा जाता है,
” ह्रीं ” का भी उल्लेख है ।
साथ मे भगवती के प्रसिद्ध
नवार्ण मंत्र ” ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे ”
का भी उल्लेख है ।
शक्ति उपासक के लिये इस देवी
अथर्वशीर्ष स्तोत्र का अनन्य साधारण
महत्त्व है ।
प्रत्येक साधक को इस स्तोत्र का,
नित्य साधना मे पाठ करना चाहिये।
आप भगवती के किसी भी स्वरुप की
साधना करते हो तो भी आपके लिये
इस स्तोत्र का पाठ लाभदायी है ।
भगवती के किसी भी यंत्र या,
मूर्ती का अभिषेक करते समय
आप इस स्तोत्र का पाठ कर सकते है ।
इस स्तोत्र के पाठ से भगवती के
मूर्ती एवं यंत्र की प्राणप्रतिष्ठा होती है।
इस स्तोत्र के फलश्रुति मे यह कहा गया है,
कि जो व्यक्ती केवल इस देवी अथर्वशीर्ष स्तोत्र
का पाठ करता है उसे अन्य सभी देवताओं
के अथर्वशीर्ष स्तोत्र के पाठ का
फल भी प्राप्त होता है ।
इस स्तोत्र मे यह भी कहा गया है
कि मंगलवार के दिन अश्विनि नक्षत्र
होने पर भगवती के किसी भी मूर्ती ,यंत्र
या चित्र के सामने बैठकर इस स्तोत्र
का पाठ किया गया तो साधक
मनुष्य ” महामृत्यु ” से भी तर सकता है।
” भौम्याश्विन्यां महादेवीसन्निधौ
जप्त्वा महामृत्युं तरति !
स महामृत्युं तरति य एव वेद !! ”
एक वर्ष मे मंगलवार और अश्विनि नक्षत्र
का संयोग एक या दो बार होता है ।
इस पर्व पर देवी अथर्वशीर्ष स्तोत्र के
10 पाठ करना चाहिये।
स्तोत्र पाठ के पहले भगवती दुर्गा
या देवी के अन्य कोइ भी
स्वरुप का ध्यान एवं
पंचोपचार पूजन( गंध , पुष्प , धूप ,
दीप , नैवेद्य यह पांच उपचार ) अवश्य करे ।
आप मानसिक पूजन भी कर सकते है ।
14 जुलाई को मंगलवार है
और अश्विनी नक्षत्र भी है ।
(प्रातः काल से 2 बजे दोपहर तक)
तो आप उस दिन यह साधना जरुर करे ।
और भविष्य मे जब भी यह योग
होगा तब तब करे ।
कोइ भी साधना किसी विशिष्ट
समय विशेष पर श्रद्धापूर्वक
संपन्न करे तो अनुभूती निश्चित होती है ।
वर्तमान में यह महामारी से
आपके बचाव में सहायक हो
ऐसी भगवती जगदम्बा से
प्रार्थना है।

@ ज्योतिषाचार्य पं किशोर पाणिग्रही
