ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय में पाँच-दिवसीय ड्रोन टेक्नोलॉजी बूटकैंप सफलतापूर्वक सम्पन्न

ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय में पाँच-दिवसीय ड्रोन टेक्नोलॉजी बूटकैंप सफलतापूर्वक सम्पन्न
(9–13 फरवरी 2026 के दौरान राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT), भुवनेश्वर के सहयोग से आयोजित उद्योगोन्मुख तकनीकी प्रशिक्षण से 67 विद्यार्थियों को मिला व्यावहारिक अनुभव)
रायगढ़ @संदेशा 24
ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय (ओपीजेयू), रायगढ़ में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी (NIELIT), भुवनेश्वर के सहयोग से “ड्रोन टेक्नोलॉजी : कॉन्सेप्ट्स, डिज़ाइन & इम्प्लीमेंटेशन” विषयक 22वाँ पाँच दिवसीय ड्रोन टेक्नोलॉजी बूटकैंप 9 से 13 फरवरी 2026 तक सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस उद्योगोन्मुख तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को ड्रोन तकनीक के सैद्धांतिक आधार के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था। बूटकैंप में कुल 67 विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की और ड्रोन डिजाइन, असेंबली, परीक्षण एवं संचालन की प्रक्रियाओं को व्यवहारिक रूप से सीखा।
9 फरवरी को आयोजित उद्घाटन सत्र में कार्यक्रम का शुभारंभ गरिमामय वातावरण में ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. डी. पाटीदार ने एनआईईआईटी, भुवनेश्वर के बिज़नेस डेवलपमेंट ऑफिसर श्री अंजन जोशी, जिंदल स्टील के स्ट्रक्चरल स्टील डिवीजन के बिज़नेस हेड श्री एम. डी. इनाम, ओपीजेयू के कुलसचिव डॉ. अनुराग विजयवर्गीय तथा अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में किया। अपने प्रेरक उद्बोधन में उन्होंने ड्रोन तकनीक को आधुनिक तकनीकी क्रांति का महत्वपूर्ण अंग बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में यह तकनीक कृषि, उद्योग, सर्विलांस, अवसंरचना निरीक्षण, खनन तथा आपदा प्रबंधन जैसे विविध क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोग की जा रही है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि ड्रोन तकनीक न केवल कार्यों को अधिक सुरक्षित और सटीक बनाती है, बल्कि समय और संसाधनों की भी बचत करती है। डॉ. पाटीदार ने विद्यार्थियों को अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप उन्मुख सोच विकसित करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य उन्हें उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ऐसे कौशल-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करते हैं, जो उनके भविष्य के करियर निर्माण में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं।
श्री अंजन जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान तकनीकी युग में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है; आज के उद्योग और तकनीकी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के लिए विद्यार्थियों को व्यावहारिक कौशल और वास्तविक परियोजनाओं पर अनुभव होना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि कौशल-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को न केवल तकनीकी दक्षता प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें समस्या सुलझाने की क्षमता, टीम वर्क, समय प्रबंधन और उद्योगोन्मुख सोच विकसित करने का अवसर भी देते हैं। वहीं, श्री एम. डी. इनाम ने औद्योगिक दृष्टिकोण से ड्रोन तकनीक के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि बड़े औद्योगिक संयंत्रों, ऊँची संरचनाओं, खतरनाक क्षेत्रों और निर्माण स्थलों में ड्रोन तकनीक निरीक्षण, निगरानी और डेटा संग्रह के लिए अत्यंत प्रभावी साबित हो रही है। यह तकनीक न केवल सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि कार्यों को अधिक सटीक, तेज़ और संसाधन-कुशल तरीके से पूरा करने में सहायक होती है। श्री इनाम ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे इस तकनीक के औद्योगिक अनुप्रयोगों को समझकर अपने कौशल को इस दिशा में विकसित करें, ताकि भविष्य में वे वास्तविक उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार और दक्ष बन सकें।
इस पाँच दिवसीय बूटकैंप के दौरान कुल 14 सैद्धांतिक और 5 प्रायोगिक सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों का उद्देश्य प्रतिभागियों को ड्रोन तकनीक के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं का व्यापक ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था। सैद्धांतिक सत्रों में ड्रोन एरोडायनामिक्स, फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम, सेंसर इंटीग्रेशन, एआई आधारित कैमरा सिस्टम, DGCA नियमन, 3D प्रिंटिंग और मिशन प्लानिंग जैसे विषयों पर गहन प्रशिक्षण दिया गया। वहीं प्रायोगिक सत्रों में प्रतिभागियों ने वास्तविक ड्रोन मॉडल का असेंबली, कैलिब्रेशन, परीक्षण और लाइव फील्ड डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से तकनीक को व्यवहारिक रूप से समझा।
13 फरवरी को आयोजित बूटकैंप के समापन सत्र में कुलपति डॉ. आर. डी. पाटीदार के मार्गदर्शन में प्रमुख अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर एनआईईआईटी, भुवनेश्वर के श्री अंजन जोशी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के डीन डॉ. एम. भिवपुरकर, कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख डॉ. आशीष शर्मा, मानविकी विभाग के प्राध्यापक डॉ. संजय कुमार सिंह एवं विश्वविद्यालय के अन्य सभी प्राध्यापकों ने भाग लिया। अपने-अपने संबोधन में सभी अतिथियों ने ड्रोन तकनीक की वर्तमान प्रासंगिकता, भविष्य में इसके बढ़ते महत्व और व्यावहारिक कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ड्रोन तकनीक न केवल उद्योग, कृषि, निगरानी और आपदा प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है, बल्कि इसके उपयोग में नियामक और तकनीकी चुनौतियों को समझना भी आवश्यक है। अतिथियों ने सभी प्रतिभागियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बधाई दी और उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएँ प्रदान की। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा प्रमाणपत्र प्रदान किए गए, जिससे उनके पाँच दिवसीय प्रशिक्षण में सफलता और सक्रिय सहभागिता को मान्यता मिली। विशेष रूप से उन विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने बूटकैंप के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन दिखाया और तकनीकी सत्रों में विशिष्ट योगदान दिया।
अंत में डॉ. हेमंत नायक ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, प्रशिक्षकों और प्रतिभागियों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता में उनके मार्गदर्शन, सहयोग और सक्रिय सहभागिता की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए सभी का हृदयपूर्वक आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. हेमंत नायक, डॉ. सरोज कुमार, डॉ. आर. एन. शुक्ला एवं डॉ. नीरज कुमार भोई के साथ ही प्रोफेसर असीम किरण दंडपत और श्री यश कौशिक (RPTO इंस्ट्रक्टर, ओपीजेयू) का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने प्रशिक्षण सत्रों का संचालन, व्यावहारिक डेमोंस्ट्रेशन और प्रतिभागियों के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बूटकैंप का समन्वयन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन ड्रोन टेक्नोलॉजी के समन्वयक डॉ. सरोज कुमार एवं डॉ. नीरज कुमार भोई के मार्गदर्शन में किया गया, जिन्होंने आयोजन की संपूर्ण रूपरेखा तैयार कर कार्यक्रम को व्यवस्थित और प्रभावशाली ढंग से संपन्न कराने में नेतृत्व प्रदान किया। उनके समन्वित प्रयासों से बूटकैंप ने प्रतिभागियों को तकनीकी ज्ञान, व्यावहारिक अनुभव और नवाचार की दिशा में एक सशक्त मंच प्रदान किया। यह बूटकैंप विद्यार्थियों के लिए तकनीकी ज्ञान, व्यावहारिक कौशल एवं नवाचार की नई संभावनाओं को साकार करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ।



