एडीजी जीपी सिंह खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज

एडीजी जीपी सिंह खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज ..सरकार के खिलाफ साजिश भी करते थे डायरी में विधायकों-अफसरों के खिलाफ बातें लिखीं, नफरत भड़काने के सबूत मिले,
रायपुर/साभार दैनिक भास्कर। छत्तीसगढ़ के सीनियर IPS अफसर जीपी सिंह के खिलाफ ACB के बाद अब पुलिस का भी शिकंजा कसना शुरू हो गया है। उनके खिलाफ देर रात राजद्रोह का केस दर्ज हो चुका है। इसमें आरोप लगाया गया है कि सस्पेंड किए गए ADG सिंह सरकार के खिलाफ साजिश रच रहे थे। विधायकों और अफसरों के खिलाफ भी डायरी में बातें मिली हैं। वहीं, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि ACB ने जो कार्रवाई की है, वो दस्तावेजों में मिले सबूतों के आधार पर की है। इसी आधार पर ही उन पर धाराएं लगाई गई हैं।
एयरपोर्ट से आए दो मेहमान !
शुक्रवार की सुबह से ही सस्पेंडेड ADG के रायपुर स्थित पेंशन बाड़ा इलाके के सरकारी बंगले के बाहर चहल-पहल बढ़ गई थी। सादे कपड़ों में पुलिस की खुफिया टीम भी नजर रखे हुए मौजूद थी। दोपहर के वक्त एक कार जीपी सिंह के बंगले पर आकर रुकी। इसमें से दो सिख युवक उतरे। दोनों के पास बड़े बैग थे। इनके आने की खबर पहले से ही बंगले के अंदर मौजूद अर्दली को दे दी गई थी। लिहाजा कार के रुकते ही उसने दरवाजा खोला। एक ब्रीफकेस भी इन दो युवकों के हाथ में था, इसे लिए दोनों अंदर की तरफ चले गए। इनके बैग पर एयरपोर्ट से यात्रा के दौरान लगाया जाने वाला एयरलाइंस का टैग भी था।
फटे डायरी के पन्नों से ACB ने जोड़ी साजिश की कड़ी
रायपुर के सिटी कोतवाली थाने में ACB अफसरों ने अहम सबूत के साथ राजद्रोह की FIR दर्ज कराई है। सिंह के बंगले की तलाशी में पिछले हिस्से से फटे हुए डायरी के पन्ने और A4 साइज के पेपर मिले हैं। अफसरों ने बताया कि छापे की खबर लगते ही इन कागजों को ठिकाने लगाने की कोशिश की गई थी। जब टीम मौके पर पहुंची तो वह उन तमाम कागज के टुकड़ों को वापस जीपी सिंह के बंगले में लेकर आई। फिर कुछ गवाहों के सामने उन कागजों को जोड़कर पढ़ने की कोशिश की गई।
सरकारी योजनाओं और धार्मिक मामलों के खिलाफ बातें
जानकारी के मुताबिक, पता चला है कि उन पन्नों और डायरियों में कुछ विधायकों और उम्मीदवारों के खिलाफ सीक्रेट बातें लिखी थीं। कुछ सरकारी योजनाओं और धार्मिक मामलों के खिलाफ भी बातें इन कागजों पर लिखी गई थी। इन डायरी के पन्नों पर लिखी यह बातें देखकर अफसर भी हैरान थे। इन्हें देख कर पहली नजर में यह समझ आया कि कहीं ना कहीं उम्मीदवारों और विधायकों के खिलाफ माहौल बनाने के लिए यह मुद्दे नोट किए गए होंगे। इसके बाद ही कड़ी जोड़ने का प्रयास किया गया।
सरकार के प्रति घृणा पैदा करने का सबूत
ACB ने अपनी जांच में जो कागज हासिल किए हैं, उसके बाद दावा किया गया है कि जानबूझकर सरकार के खिलाफ बातें लिखी गईं। इससे लोगों के मन में सरकार के प्रति नफरत पैदा हो और असंतोष का माहौल बने। अकेले जीपी सिंह के घर पर ही नहीं बल्कि इनके दोस्त SBI के मैनेजर मणि भूषण के घर की तलाशी लेने पर भी 5 पेज का डॉक्यूमेंट मिला है। जिसमें अंग्रेजी में विधायकों और छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग के अलावा कुछ IAS अफसरों के खिलाफ भी बातें लिखी मिली हैं।
जानें क्या है राजद्रोह कानून
भारतीय दण्ड संहिता (Indian Penal Code, IPC) की धारा 124 ए में राजद्रोह की परिभाषा के अनुसार अगर कोई व्यक्ति सरकार-विरोधी सामग्री लिखता या बोलता है या ऐसी सामग्री का समर्थन करता है या राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान करने के साथ संविधान को नीचा दिखाने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज हो सकता है। इसके अलावा अगर कोई शख्स देश विरोधी संगठन के खिलाफ अनजाने में भी संबंध रखता है या किसी भी प्रकार से सहयोग करता है तो वह भी राजद्रोह के दायरे में आता है।
150 साल पहले कानून लागू हुआ
दरअसल, 1870 में जब से यह कानून प्रभाव में आया, तभी से इसके दुरुपयोग के आरोप लगने शुरू हो गए थे। अंग्रेजों ने उनके खिलाफ उठने वाली आवाज को दबाने के लिए इस कानून का इस्तेमाल किया। इस धारा में सबसे ताजा मामला किसान आंदोलन टूलकिट मामले से जुड़ी पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि पर दर्ज हुआ था।
अब आगे क्या होगा
IPC की इस धारा में स्पष्ट किया गया है कि सरकार या प्रशासन के विरुद्ध किसी भी प्रकार की आलोचनात्मक टिप्पणी करना अपराध है। इसके तहत गिरफ्तारी के लिए वारंट की आवश्यकता नहीं होती है। धारा 124A के अनुसार, यह एक गैर-जमानती अपराध है। हालांकि, सज़ा तब तक नहीं दी जा सकती, जब तक कि अपराध सिद्ध न हो जाए। मुकदमे की पूरी प्रक्रिया के दौरान जिस व्यक्ति पर भी आरोप लगे हैं उससे उसका पासपोर्ट ज़ब्त कर लिया जाता है। इस दौरान कोई भी सरकारी नौकरी प्राप्त नहीं कर सकता


