@ ब्राम्हण समाज,धार्मिक सामाजिक,राजनीतिक, व्यापारी संगठन,चिकित्सक,अधिवक्ता,पत्रकारगण गणमान्य नागरिक सहित 5 हजार से अधिक लोग शामिल..
तमनार / दुलेंद्र पटेल 24.2.2022

रायगढ़ जिले के लोकप्रिय भागवत आचार्य श्री श्री योगेश जी महाराज राधा माधव सेवा आश्रम व नेत्रहीन विद्यालय कसडोल तमनार के संस्थापक संचालक एवं प्रख्यात कथा वाचक श्री देवकीनंदन ठाकुर जी के कृपापात्र शिष्य का असामयिक देहवासन 12 फरवरी 2022 को हो जाने से केलो वनांचल तहसील तमनार जिला रायगढ़ सहित छत्तीसगढ़,उड़ीसा,झारखंड में शोक संव्याप्त है।

द्वादशकर्म 24 फरवरी को प्रातः 11 बजे से शाम तक ब्राम्हण समाज,धार्मिक सामाजिक,राजनीतिक, व्यापारी संगठन,चिकित्सक,अधिवक्ता,पत्रकारगण बच्चे युवा महिला गणमान्य नागरिक सहित करीबन 5 हजार लोगों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

समस्त क्षेत्रवासी कसडोल तमनार रायगढ़ छत्तीसगढ़ ओडिसा से आये समाजिक,धार्मिक सामाजिक,राजनीतिक, व्यापारी संगठन,यजमान,शिष्य,ईष्ट मित्र श्रद्धालुओं ने उनकी बहुमुखी प्रतिभा गुणी ज्ञानी नीति निपुण,कला पारखी,आध्यात्मिक,भागवत कथा प्रवचन,सत्संग,पूजन अनुष्ठान नाम संकीर्तन,दर्जनों नेत्रहीन बच्चों के पालन पोषण अन्य अनुकरणीय व अविस्मरणीय कार्यो का स्मरण करते उनकी छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते राधा माधव सेवा आश्रम नेत्रहीन विद्यालय कसडोल के कुशल संचालन हेतु तन मन धन से समर्पित होकर सहयोग करने बात कही गई।

श्रद्धांजलि सभा मे भागवताचार्य अशोक पंडा जी,भूदानदाता परिवार देवा साहू,रमेश महाराज,शौक़ी लाल पाणिग्राही,जगन्नाथ पाणिग्राही,ज्योतिषाचार्य किशोर पाणिग्रही,महेंद्र महाराज,करूणाकार जी,रायगढ़ सांसद प्रतिनिधि पूर्व लोक सेवा आयोग मध्यप्रदेश पूर्व सदस्य निरंजन साय,पूर्व मंत्री सुनीति सत्यानन्द राठिया,गोकुलानन्द पटनायक, सतीश चन्द बेहरा,जतिन साव,बंशीधर चौधरी,रवि भगत,कैलाश पटनायक,बिहारी लाल पटेल,कैलाश गुप्ता,सुरेंद्र सिदार,मुकुंद मुरारी पटनायक,राजकुमार डनसेना,गिरजा शंकर पटेल,बबलू साहू,जागेश्वर बेहरा, विनायक पटनायक,गीतांजली पटनायक,सरपंच प्रतिनिधि लक्षिन्दर राठिया,सुश्री गुलापी सिदार,डीडीसी सहोद्रा दुर्गेश राठिया,सरपंच ललित राठिया,डॉ राजू अग्रवाल,डॉ राजेश पटेल,डॉ शौक़ी लाल साव,वर्मा जी बिलासपुर,मुशीर हुसैन,त्रिलोचन पटनायक,रूपेश पटेल,घनश्याम पटेल,पत्रकार गणेश अग्रवाल,पत्रकार दुलेंद्र पटेल,अजयदास,बनमाली सिदार गुरुजी,दुर्योधन पटेल,पंचराम मालाकार,घनश्याम मालाकार,श्याम,तरुनीसेन,रोहित,
प्रेम गुप्ता,रामलाल पटेल,लक्ष्मण पटेल,राजेश पटनायक,उमेश साव,गोपाल गुप्ता,रामचरण कुंभकार, अनिरुद्ध यादव,मुरलीधर सिंह,शंकर गुप्ता,अभिषेक सिंह,नीलध्वज शास्त्री, विष्णु पैकरा सहित सैकड़ो लोगो ने श्रद्धांजलि सभा मे संबोधित किया।सभा का मंच संचालन जनक राम साहू व जतिन्द्र कुमार साव द्वारा किया गया।स्वर्गीय योगेश जी महाराज जी की जीवन वृतांत पम्पलेट का जनकराम साहू सेवा निवृत्तमान प्राचार्य के संयोजन से बाँटा गया।

आश्रम भूमि दानदाता रविचंद साहू भुनेश्वर साहू अर्जुन साहू गोविंद साहू,खिरोद साहू चिंतामणि साहू ग्राम वासियो में रामचरण सिदार,युनामणि पटेल,बसंत कुमार साहू विद्याधर साहू वासुदेव साहू नरेश साहू गणेश साहू रूपेश साहू रोहित कुमार साहू राजेंद्र कुमार साहू नारायण साहू अन्य ग्रामवासियो ने बैठक मंच खान पान भोजन प्रसाद व्यवस्था ग्राम वासियों एवं श्रद्धालुओं के सहयोग से किया गया था। समस्त कसडोल गांव के युवाओं द्वारा भोजन खिलाने में सराहनीय योगदान रहा। भागवताचार्य योगश जी महाराज अपने पीछे पत्नि प्रतिमा व पुत्र अवधेश,भैया दिनेश महापात्र,विजय महापात्र अनुज खीरसागर एवं सखा महेंद्र शर्मा,बंजारी धाम मन्दिर पुजारी रविनानारायन,चक्रधर महाराज,ज्योतिष मार्तण्ड पण्डित किशोर पाणिग्रही दर्जनों नेत्रहीन बच्चे सैकड़ो यजमान ईस्ट मित्र बंधु बांधव ग्राम कसडोल समस्त क्षेत्रवासी तमनार,रायगढ़ छत्तीसगढ़ ओडिसा झारखण्ड के सैकड़ो शिष्य को रोता विलखता छोड़ गए।

भागवताचार्य स्व.योगेश जी महाराज की जीवन वृतांत
स्वनामधन्य लोकप्रिय भागवताचार्य स्व.योगेशजी महाराज राधा माधव आश्रम एवं नेत्रहीन विद्यालय कसडोल तमनार के संस्थापक,संचालक तथा प्रख्यात कथा – वाचक श्री देवकीनंदन ठाकुर जी के कृपा प्राप्त शिष्य का जन्म स्व . सुशील / कुन्ती देवी महापात्र कसडोल , तहसील तमनार , जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़ में दिनांक 03 फरवरी 1989 को हुआ था । बाल्यावस्था में पिता का साया सर से उठ जाने के कारण मुश्किल से हाईस्कूल तक की शिक्षा प्राप्त कर पाये । मातुश्री भी दिनांक 15 जून 2020 में पञ्चतत्व में विलीन हो गई । आपका परिणय प्रतिमा देवी के साथ दिनांक 09 मार्च 2018 में सम्पन्न हुआ एवं 27 नवम्बर 2020 को चि.अवधेश के पिताश्री बने। इसे नियंति की विडम्बना कहें या निष्ठुर प्रारब्ध की क्रूरता कि चि . अवधेश के दूध के दाँत दिखे नहीं और श्रीमती प्रतिमा के हाथों की मेंहन्दी के रंग उतरे नहीं हैं तथा अग्रज दिनेश , विजय अनुज खीरसागर एवं अपना भरापूरा परिवार, दर्जनों नेत्रहीन बच्चे , सैकड़ों यजमान , अनगिनत शिष्य , ईष्ट – मित्र,सखा महेन्द्र एवं बन्धु – बान्धवों को रोता बिलखता छोड़ आप फिर कभी वापस न आने के लिए अनन्त यात्रा पर चले गए । आप बाल्यकाल से ही धर्मशील थे । पढ़ाई छोड़ बंजारी धाम तमनार , रायगढ़ में पुजारी पंडित रविनारायण व पंडित चक्रधर महाराज के साथ रहते हुए माता की सेवा करने लगे । जहाँ पण्डित किशोर पाणिग्राही ( ज्योतिषमार्तण्ड , ज्योतिष , ज्योतिष स्वर्ण पदक दिल्ली ) जैसे विद्वज्जनों का साहचर्य प्राप्तकर आध्यात्म पथ पर अग्रसर होने लगे । माँ घटोरिया धाम कसडोल में पहली बार वर्ष 2008 में नवरात्र अनुष्ठान आचार्य के रूप में सम्पन्न कराये । इसके बाद अनेकों अनुष्ठान सम्पन्न कराते हुए आपकी आध्यात्मिक यात्रा श्रीधाम वृन्दावन पहुँचकर विश्व शान्तिदूत श्रद्धेय देवकीनंदन ठाकुर जी का कृपापात्र शिष्य बनने का सौभाग्य प्राप्त किया । यहाँ से विद्या अध्ययन पश्चात् पूज्य दादा गुरूजी श्रीधाम पीठाधीश्वर , निम्बार्करल पुरूषोत्तम शरण शास्त्री जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्तकर प्रथम बार वर्ष 2012 में ग्राम तराईमाल तमनार में व्यास पीठासीन होकर श्रीमद् भागवत महापुराण का कथा प्रवचन कर सुधि श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया ।

यहाँ से आपकी कीर्ति कौमुदी प्रस्फुटित होकर छत्तीसगढ़ , उड़ीसा , झारखण्ड के बहुत बड़े क्षेत्र में प्रसारित हुई और आपके शिष्य यजमानों की श्रृंखला जुड़ती चली गई । बहुत कम समय में भगवान कृष्णचन्द्र महाराज की असीम कृपा से भागवत कथावाचक के रूप में प्रस्थापित हुए । अब तक आप 300 से ऊपर भागवत कथा प्रवचन , शतचण्डी महायज्ञ , रूद्र महायज्ञ , पाँचलाख पार्थिव शिवलिंग पूजन अनुष्ठान , रूद्राभिषेक , गरीब ब्राह्मण बच्चों का व्रतोपनयन संस्कार के साथ अनेकों यज्ञ अनुष्ठान सम्पन्न किए । अभी कसडोल में बसन्त पञ्चमी के उपलक्ष में सोलह प्रहरी नाम संकीर्तन महायज्ञ सम्पन्न कराते हुए माघ शुक्ल एकादशी को ब्रह्मलीन हुए । में आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे । गुणी- ज्ञानी , नीति – निपुण कला पारखी थे । संकल्पवान , मृदुभाषी तथा प्रत्युपत्रमति के थे । आध्यात्मिक अभिरूचि , स्वाध्याय , सत्संग आपकी दिनचर्या थी ।

आप कर्मयोगी थे , मेहनत से कभी भी जी नहीं चुराया । आपके आदर्श , निष्ठा , जिन्दादिली , दृढ़ता एवं जिन्दगी के प्रति समरसतावादी दृष्टिकोण जैसे दुर्लभ गुण अनुकरणीय व अविस्मरणीय है । आपने अल्प समय में बहुत कुछ किया है और बहुत कुछ करना अभी शेष है यदि हम आपके अधूरे कार्यों को पूर्ण कर पाते हैं तो यह आपके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।अन्त में महाप्रयाण की इस द्वादशकर्म की दुखद बेला में बोझिल मन और सजल नेत्रों से हम आपको श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं साथ ही आपके आराध्य अखिल ब्रह्माण्ड नायक ,परात्पर ब्रह्म कृष्णचन्द्र महाराज एवं रास रासेश्वरी श्री राधा महारानी से प्रार्थना करते हैं कि वे आपको अपने श्रीचरणों में स्थान दें ।
