तमनार में डॉ भीमराव अंबेडकर की 131 वीं जयंती पर बाईक रैली व समारोह भव्य सम्पन्न

तमनार में डॉ भीमराव अंबेडकर की 131 वीं जयंती पर बाईक रैली व समारोह भव्य सम्पन्न
तमनार @संदेशा 24 @ दुलेंद्र पटेल 14.4.2022
केलो बनांचल आदिवासी बाहुल्य तहसील तमनार के मंगल भवन तमनार में 14 अप्रेल को प्रबुद्ध जन कल्याणकारी समिति लैलूंगा तमनार के सौजन्य से डॉ भीमराव अंबेडकर जी की 131 वीं जयंती समारोह तमनार में पहली बार युवाओं की बाईक रैली व भव्य समारोह आयोजित किया गया।
सर्वप्रथम युवाओ द्वारा बाईक रैली बरभांठा चौक,तहसील हाई स्कूल बाजारपारा महंतपारा होते बस स्टैंड तमनार तक निकाली गई। भारत रत्न बाबा साहेब जी की छायाचित्र पर माल्यर्पण कर अतिथियों का पुष्पहार से स्वागत किया गया। मुख्य अतिथि कांग्रेस कमेटी जिलाउपाध्यक्ष मुकुंदमुरारी पटनायक ने भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को उनकी जयंती पर शत-शत नमन करते कहाकि हमे शिक्षित होने के साथ संगठित रहकर हरदिन बाबा साहेब जी के विचारों को आत्मसात करें। डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने अपने जीवन काल में समानता के लिए संघर्ष किया और अपना पूरा जीवन देश के लिए अर्पित कर दिया।

संविधान निर्माता के रूप में उनके योगदान के लिए देश सदैव ऋणी रहेगा। आधुनिक भारत की नींव तैयार करने में उनकी महती भूमिका रही। मुख्य वक्ता अमृत लाल जांगड़े ने देश के संतों व बाबा जी की जीवनी एवं संविधान सम्बंध में विस्तृत जानकारी दिए। अधिवक्ता कैलाश गुप्ता,डॉ एस पी वारे,बीडीसी सम्पति सिदार,देव कुर्रे,राजेश तेंदुलकर,आलोक स्वर्णकार अन्य ने भारत के संविधान व बाबा साहेब के कृतित्व व संघर्षों के बारे में संबोधित किया गया।
समारोह में मुख्य अतिथि मुकुंदमुरारी पटनायक,अध्यक्षता सरपंच सुश्री गुलापी सिदार,अधिवक्ता कैलाश गुप्ता,विमला जोल्हे पूर्व पार्षद,बीडीसी संपति यशवंत सिदार,पंचराम साहू,लक्ष्मण निषाद,शिव चौहान पत्रकार दुलेंद्र पटेल,सरोज श्रीवास अन्य अतिथिगण,प्रमुख वक्ताओं में अमृत लाल जांगड़े,देव कुर्रे,
प्रबुद्ध जन कल्याणकारी समिति अध्यक्ष आलोक स्वर्णकार ,रविकिरण घोघरे,श्रवण टण्डन,शोभत राम भगत,राजेश,योगेश कृष्णा अन्य युवा कार्यकर्ता,गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही।
उल्लेखनीय है कि 14 अप्रैल को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाई जाती है। इस दिन साल 1891 को मध्य प्रदेश के महू के एक गांव में भीमराव अंबेडकर का जन्म हुआ था। बचपन से ही उन्हें आर्थिक और सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। स्कूल में छुआछूत और जाति-पाति का भेदभाव झेलना पड़ा।

विषम परिस्थितियों के बाद भी अंबेडकर ने अपनी पढ़ाई पूरी की। ये उनकी काबलियत और मेहनत का ही परिणाम है कि अंबेडकर ने 32 डिग्री हासिल की। विदेश से डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद भारत में दलित समाज के उत्थान के लिए काम करना शुरू किया। संविधान सभा के अध्यक्ष बने और आजादी के बाद भारत के संविधान के निर्माण में अभूतपूर्व योगदान दिया। जीवन के हर पड़ाव पर संघर्षों को पार करते हुए उनकी सफलता हर किसी के लिए प्रेरणा है


