श्रीमद भागवत कथा तराईमाल में भगवान वामन अवतार की निकाली गई भव्य झांकी जीवन को सतकर्म,सत्संग में लगाकर साधु संतो ब्राम्हणों, दिनदुखियो की सेवा करना चाहिए -देवी राधे प्रिया

श्रीमद भागवत कथा तराईमाल में भगवान वामन अवतार की निकाली गई भव्य झांकी जीवन को सतकर्म,सत्संग में लगाकर साधु संतो ब्राम्हणों, दिनदुखियो की सेवा करना चाहिए -देवी राधे प्रिया तमनार @संदेशा 24 दुलेन्द्र पटेल 18.5.2023 केलो बनांचल आदिवासी बाहुल्य तहसील तमनार के प्रसिद्ध माँ बंजारी के गोद में बसे ग्राम तराईमाल में कथावाचिका पूज्या देवी राधे प्रिया श्रीधाम वृन्दावन की मुखारबिंद से संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन भगवान वामन अवतार की कथा सुनाई।
आधुनिक गीत संगीत की सुमधुर धुनों में श्री राधे कृष्ण की भजनों में माता बहने बच्चे वरिष्ठ श्रद्धालुगण खूब नाच किये। उन्होंने विदुर विदुरानी,भगवान कपिलदेव की कथा के बारे बताये। श्रद्धा-भक्तिपूर्वक भगवान वामन की पूजा करते हैं, उनके सभी कष्ट दूर होते हैं। उन्होंने बताया कि देव माता अदिति ने विष्णु जी की तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वे अदिति के पुत्र के रूप में जन्म लेगें। भगवान विष्णुजी ने देवमाता अदिति के गर्भ से वामन रूप में अवतार लिया।
इसके बाद एक दिन राजा बलि यज्ञ कर रहा था, तब वामनदेव बलि के पास गए और तीन पग धरती दान में मांगी। शुक्राचार्य के मना करने के बाद भी राजा बलि ने वामनदेव को तीन पग धरती दान में देने का वचन दे दिया। इसके बाद वामनदेव ने विशाल रूप धारण किया और एक पग में धरती और दूसरे पग में स्वर्गलोक नाप लिया। तीसरा पैर रखने के लिए कोई स्थान नहीं बचा तो बलि ने वामन को खुद सिर पर पग रखने को कहा। वामनदेव ने जैसे ही बलि के सिर पर पैर रखा, वह पाताल लोक पहुंच गया। बलि की दानवीरता से प्रसन्न होकर भगवान ने उसे पाताललोक का स्वामी बना दिया। राजा बलि की धैर्य से धर्म की रक्षा से भगवान वामन अत्यंत प्रसन्न हुए।
कथा के साथ कहाकि श्री बांके बिहारी जी भी वैष्णव भक्त दीवानों का इंतजार करते हैं। श्री ठाकुर जी की कृपा से मानव जीवन प्राप्त हुआ है।जीवन को सतकर्म के साथ भजन कीर्तन सत्संग में लगाएं। अपने शरीर का ख्याल रखना जरूरी है। साधु संतो ब्राम्हणों, दिन दुखियो की सेवा करना चाहिए। यज्ञ में श्रद्धा भक्तिभाव के साथ तन मन धन जो भी सेवा भाव हो सेवा से यश कीर्ति पुण्य की प्राप्ति होती है।

