तुमीडीह में संगीतमय श्रीमद भागवत कथा का रसपान कर रहे क्षेत्रवासी @ विवाहित महिलाएं अपने पतिदेव के लिए श्रृंगार करें, माथे सिंदूर हाथ मे चूड़ी हो-पं. किशोर पाणिग्राही महाराज

तुमीडीह में संगीतमय श्रीमद भागवत कथा का रसपान कर रहे क्षेत्रवासी @ विवाहित महिलाएं अपने पतिदेव के लिए श्रृंगार करें माथे सिंदूर हाथ मे चूड़ी हो-पं. किशोर पाणिग्राही महाराज
तमनार @संदेशा 24 दुलेन्द्र पटेल 5.4.2024
किसी भी समाज में संस्कृति सभ्यता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए विभिन्न परंपराओं को आत्मसात करने की परंपरा रही है जिसके लिए विविध धार्मिक अनुष्ठान,रामायण,भागवत,भजन कीर्तन हवन पूजन आदि कराए जाते रहे हैं।

मां बंजारी धाम केलो बनांचल औद्योगिक क्षेत्र के ग्राम तुमीडीह में संगीतमय श्रीमद भागवत कथा का आयोजन 30 मार्च से 7 अप्रेल तक स्व. प्रदीप कुमार भोय के स्मृति में माँ बंजारी देवी कृपा पात्र पं. किशोर पाणिग्राही महाराज (ज्योतिषाचार्य गोल्ड मेडलिस्ट) व्यासपीठ में विराजमान होकर कथा का रसपान करा रहे हैं, सैकड़ो श्रद्धालु भक्तजनो ज्ञान, कर्म, भक्ति की पवित्र त्रिवेणी में डुबकी लगा रहे हैं।

वही भजन सम्राट पं संजय शर्मा द्वारा हिंदी ओड़िया धार्मिक भजनो की प्रस्तुति से सैकड़ो बाल गोपाल नर नारी नाचते गाते गदगद हो रहे हैं। कलश यात्रा में सैकड़ो माता बहनो ने शामिल हुए. पं. किशोर महाराज जी भागवत कथा महात्मय,महाभारत कथा,परिक्षीत जन्म कथा,सती चरित्र, ध्रुव चरित्र, प्रहलाद चरित्र, वामन अवतार,श्रीराम कथा श्री कृष्ण जन्म,बाल लीला, माखन चोरी, गोवर्धन पुजा,

5 अप्रेल को मथुरा मंगल,रुकमणी विवाह गोपी प्रेम प्रसंग को सुनाए। उन्होंने कहाकि विवाहित महिलाएं अपने पति के लिए श्रृंगार करें अपने पतिदेव को सुंदरता दिखावें माथे सिंदूर हाथ मे चूड़ी हो,पतिदेव देश प्रदेश गए हो तो उनका तस्वीर रखकर पूजन करें।

6 अप्रेल को सुदामा चरित्र,भागवत विश्राम एवं 7 अप्रेल रविवार को तुलसी वर्षा पूर्णाहुति एवं भंडारा में आयोजक कस्तुरी -द्वारिका भोय परिवार समस्त ग्रामवासी तुमीडीह द्वारा शामिल होकर पुण्य की भागीदार बनने आग्रह किया गया है।


शुक्रवार को कथा में भागवत कथा वाचक पं टीकम प्रसाद दुबे(पप्पू महाराज जी), माँ बंजारी मन्दिर के सदस्य घनश्याम मालाकार,पंचराम मालाकार,तरुणीसेन मालाकार,पितरु मालाकार,श्याम मालाकार,दुलेन्द्र पटेल मुन्ना,बिहारी बलेचा,उमेश मालाकार सहित अन्य भक्तजनो ने व्यासपीठ में माथा टेककर भागवत आचार्य से आशीर्वाद लिया।



