चक्रधर समारोह 2025 रायगढ़ घराने की कथक परंपरा को जीवंत करती वासंती वैष्णव और उनकी टीम की अनूठी प्रस्तुति

चक्रधर समारोह 2025 रायगढ़ घराने की कथक परंपरा को जीवंत करती वासंती वैष्णव और उनकी टीम की अनूठी प्रस्तुति
*सुर, ताल और भाव की बिखेरी अद्भुत छटा, दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
रायगढ़ @संदेशा 24
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह की आठवीं संध्या में रायगढ़ घराने की विशिष्ट छाप छोड़ते हुए बिलासपुर की सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना श्रीमती वासंती वैष्णव, सुश्री ज्योतिश्री और उनकी टीम ने शास्त्रीय नृत्य की ऐसी मोहक प्रस्तुति दी, जिसने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत गणेश स्तुति से हुई, जिसके पश्चात तबले की उठान, शिव तांडव, तबला और घुंघरुओं की जुगलबंदी तथा वर्षा ऋतु की अद्भुत झलकियों को नृत्य में पिरोया गया। सुर, ताल और भाव की इस अनूठी संगति ने सभागार में ऐसा वातावरण निर्मित किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध होकर तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे।
ज्ञात हो कि रायगढ़ घराने की स्थापना राजा चक्रधर सिंह द्वारा की गई थी। कला-संरक्षक के रूप में उनकी दूरदृष्टि और नृत्य-प्रेम के कारण विभिन्न घरानों के महान गुरुओं व कलाकारों ने रायगढ़ को अपना केंद्र बनाया। यहीं से मेघ पुष्प, चमक बिजली, ब्रह्म बीज और दाल-बादल परन जैसी अनुपम नृत्य बंदिशों की रचना हुई, जो आज भी रायगढ़ घराने की पहचान बनी हुई हैं। इस घराने की एक विशेषता यह भी है कि इसके कलाकार या तो अत्यंत धीमी या फिर अत्यंत तेज गति में अपनी प्रस्तुति देते हैं, जो कथक की गहराई और विविधता को दर्शाता है।

श्रीमती वासंती वैष्णव ने रायगढ़ घराने की शिक्षा अपने पिता व सुप्रसिद्ध कलागुरु श्री फिरतूराम महाराज से प्राप्त की है। कठोर साधना और संगतिक अनुशासन के प्रति उनकी निष्ठा ने उन्हें देश की प्रतिष्ठित कथक नृत्यांगनाओं की श्रेणी में स्थापित किया है। वे देश के प्रमुख कला मंचों पर अपनी अद्वितीय प्रस्तुतियों से रायगढ़ घराने की परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रही हैं।



