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रायगढ़

ओपीजेयू में ‘एडवांसेस इन स्टील, पावर एवं कन्स्ट्रक्शन टेक्नालॉजी’ पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन

ओपीजेयू में ‘एडवांसेस इन स्टील, पावर एवं कन्स्ट्रक्शन टेक्नालॉजी’ पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन

रायगढ़ @संदेशा 24

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ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय, रायगढ़ में 3 से 5 सितम्बर 2025 के बीच ‘एडवांसेस इन स्टील, पावर एवं कन्स्ट्रक्शन टेक्नालॉजी’ विषय पर आयोजित छठवां तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह वैश्विक सम्मेलन एएसएम इंटरनेशनल (ईस्टर्न इंडिया चैप्टर), जिंदल स्टील लिमिटेड, सोहर यूनिवर्सिटी (ओमान), और मेट्रोपोलिया यूनिवर्सिटी ऑफ अप्लाइड साइंसेज (फिनलैंड) के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया। सम्मेलन में विश्वभर से वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने भाग लिया और स्टील, ऊर्जा एवं निर्माण प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपने नवीनतम अनुसंधान कार्यों को प्रस्तुत किया। सम्मेलन के चेयरमैन एवं विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. डी. पाटीदार ने बताया कि इस सम्मेलन का उद्देश्य शैक्षणिक जगत और उद्योग के बीच की दूरी को कम करना, विचारों का आदान-प्रदान करना और नवाचारों को साझा करने हेतु एक वैश्विक मंच प्रदान करना था, जिसमें यह सम्मेलन पूर्णतः सफल रहा।

3 सितम्बर को आयोजित उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. रामानुज नारायण (निदेशक, सीएसआईआर-आईएमएमटी, भुवनेश्वर) और विशिष्ट अतिथियों – डॉ. आसिफुल हुसैन शेख (किंग सऊद यूनिवर्सिटी, सऊदी अरब), डॉ. मुस्तफा मोहसिन अल लावती (सोहर यूनिवर्सिटी, ओमान), श्री सब्यसाची बंद्योपाध्याय (कार्यकारी निदेशक, जिंदल स्टील), और कुलपति डॉ. आर. डी. पाटीदार ने सम्मेलन को संबोधित किया।

ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय, रायगढ़ के कुलपति एवं सम्मेलन के चेयरमैन डॉ. आर. डी. पाटीदार ने उद्घाटन सत्र में सभी अतिथियों, विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि ‘एडवांसेस इन स्टील, पावर एवं कन्स्ट्रक्शन टेक्नालॉजी’ विषय पर आधारित यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन न केवल शोधकर्ताओं और अकादमिक जगत को एक साझा मंच प्रदान करता है, बल्कि उद्योग और शिक्षा के बीच सेतु निर्माण की दिशा में भी एक सार्थक पहल है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक नवाचार, अनुसंधान साझेदारी और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देना है,

जिससे स्टील, पावर और निर्माण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके। अपने वक्तव्य में कुलपति डॉ. पाटीदार ने जिंदल स्टील के चेयरमैन श्री नवीन जिंदल के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया, जिनके दृष्टिकोण और समर्थन से यह विश्वविद्यालय निरंतर उन्नति की ओर अग्रसर है। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय की चांसलर श्रीमती शालू जिंदल का भी हृदय से आभार व्यक्त किया, जिनकी रचनात्मक सोच, सांस्कृतिक चेतना और अकादमिक उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता से ओपीजेयू को एक विशिष्ट पहचान मिली है। सोहर यूनिवर्सिटी, ओमान से पधारे डॉ. मुस्तफा मोहसिन अल लावती ने अपने वक्तव्य में ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सम्मेलन की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन वैश्विक शिक्षा और अनुसंधान समुदाय के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि कैसे सीमाओं से परे जाकर सहयोग और नवाचार को बढ़ावा दिया जा सकता है। डॉ. अल लावती ने यह भी कहा कि सोहर यूनिवर्सिटी और ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी के बीच का शैक्षणिक सहयोग आने वाले समय में शोध, छात्र आदान-प्रदान, और संयुक्त परियोजनाओं के रूप में और भी अधिक सशक्त होगा। कार्यकारी निदेशक श्री सब्यसाची बंद्योपाध्याय ने अपने वक्तव्य में कहा कि स्टील, ऊर्जा और निर्माण क्षेत्र की भावी चुनौतियों का समाधान नवाचार, अनुसंधान और उद्योग–शिक्षा के समन्वय से ही संभव है।

उन्होंने कहा की हमारे उद्योग की आवश्यकताएं तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में अकादमिक संस्थानों की भूमिका केवल कौशल विकास तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें इंडस्ट्री के साथ मिलकर समाधान-आधारित अनुसंधान में भागीदार बनना होगा। किंग सऊद यूनिवर्सिटी, सऊदी अरब के प्रोफेसर डॉ. आसिफुल हुसैन शेख ने कहा कि आज के युग में तकनीकी प्रगति केवल एक देश या संस्था की जिम्मेदारी नहीं रह गई है, बल्कि यह एक वैश्विक उत्तरदायित्व बन चुकी है। उन्होंने कहा
की हम ऐसे दौर में हैं जहाँ नवाचार और अनुसंधान की गति बहुत तेज है। लेकिन इन नवाचारों का स्थायी प्रभाव तभी संभव है जब वैश्विक संस्थान आपस में मिलकर कार्य करें।

यह सम्मेलन इसी प्रकार की अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और ज्ञान-साझाकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। डॉ. शेख ने विशेष रूप से स्टील, ऊर्जा और निर्माण जैसे क्षेत्रों में सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) और नवाचार आधारित समाधानों पर बल देते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों में मल्टीडिसिप्लिनरी अप्रोच और इंडस्ट्री–अकादमिक कोलैबोरेशन बेहद आवश्यक होगा। सम्मेलन के मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए सीएसआईआर – खनिज एवं पदार्थ प्रौद्योगिकी संस्थान (IMMT), भुवनेश्वर के निदेशक डॉ. रामानुज नारायण ने कहा कि आज की दुनिया में तकनीक आधारित समाधान, गहन अनुसंधान और व्यावसायिक नवाचार ही किसी भी देश के विकास के प्रमुख स्तंभ हैं।

उन्होंने कहा कि यह अत्यंत हर्ष की बात है कि ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय जैसे उदीयमान संस्थान न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, बल्कि वैश्विक स्तर के तकनीकी विमर्श और अनुसंधान मंच भी उपलब्ध करा रहे हैं। इस सम्मेलन का आयोजन इस बात का प्रमाण है कि भारत में उच्च शिक्षा का परिदृश्य तेजी से वैश्विक सोच की ओर अग्रसर हो रहा है। डॉ. नारायण ने विशेष रूप से खनिज संसाधनों, स्टील निर्माण, अक्षय ऊर्जा, हाइड्रोजन आधारित प्रौद्योगिकी, और एआई/एमएल जैसी उभरती तकनीकों पर बल देते हुए कहा कि यह क्षेत्र केवल औद्योगिक प्रगति नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। शोध कार्य तभी सार्थक होते हैं जब वे उद्योग की व्यावहारिक समस्याओं को सुलझाने में सक्षम हों। इसलिए यह आवश्यक है कि शैक्षणिक संस्थान और औद्योगिक क्षेत्र मिलकर काम करें और एक-दूसरे की ज़रूरतों को समझें।

उद्घाटन समारोह के अवसर पर सम्मेलन की स्मारिका का विमोचन मुख्य अतिथि तथा अन्य विशिष्ट अतिथिगण द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में सम्मेलन के संयोजक डॉ. एम. कल्याण फनी ने सभी उपस्थित अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति हार्दिक आभार प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय कुमार सिंह, प्राध्यापक, मानविकी विभाग द्वारा किया गया।

सम्मेलन में तीन दिनों के दौरान प्लीनरी, राउंड टेबल डिस्कशन सेशन आयोजित किये गए जिसमे दुनिया भर के प्रतिष्ठित वक्ताओं ने सम्मलेन के मूल विषय पर अपने विचार और अपने शोध कार्यों को प्रतिभागियों के साथ साझा किया। कीनोट एवं प्लीनरी सेशंस के प्रमुख वक्ता के रूप में जिन प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की सहभागिता रही, उनमें -श्री सैम एंडरसन (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मैकेनिकल/मेटालर्जी, जैडको मैन्युफैक्चरिंग, अमेरिका), डॉ. जोर्मा सटेरी (प्रोफेसर एवं प्रमुख, सिविल इंजीनियरिंग, मेट्रोपोलिया यूनिवर्सिटी, फिनलैंड), डॉ. प्रिंडल (एसोसिएट प्रोफेसर, इलेक्ट्रिकल, कोलंबिया यूनिवर्सिटी, अमेरिका), डॉ. निरंजन (प्रोफेसर, इलेक्ट्रिकल, एनआईटी, जमशेदपुर), डॉ. सतीश (प्रोफेसर, मैकेनिकल, एनआईटी, जमशेदपुर), डॉ. नरसैय्या (प्रोफेसर, मेटालर्जी, एनआईटी, वारंगल), डॉ. ए. मजूमदार (निदेशक, मेटालर्जी/मैकेनिकल, काजी नजरूल यूनिवर्सिटी, आसनसोल), डॉ. अशुतोष कुमार (एसोसिएट हेड, मेटालर्जी, आईआईटी, भिलाई), डॉ. एस. गांगुली (प्रोफेसर, मेटालर्जी/कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, एनआईटी, रायपुर), डॉ. पियूष सामुई (प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग, एनआईटी, पटना), डॉ. मदन मोहन महतो (प्राचार्य एवं पूर्व प्रमुख, टेक्नोलॉजी ग्रुप, मेटालर्जी/मैकेनिकल, गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, खूंटी बोकारो एवं टायो रोल्स लिमिटेड, टाटा स्टील, जमशेदपुर), श्री देवेंद्र नाहर (उप महाप्रबंधक, पर्यावरण/सस्टेनेबिलिटी, गेल, दिल्ली), श्री वेंकटेशन (महाप्रबंधक, पर्यावरण/सस्टेनेबिलिटी, गेल, दिल्ली),

श्री शैलेन्द्र प्रताप सिंह (महाप्रबंधक, मेटालर्जी, जिंदल स्टील, रायगढ़), श्री सौरभ कुंडू (मुख्य कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी अधिकारी, मेटालर्जी/सिविल, टाटा स्टील, जमशेदपुर), श्री संजीव मनोचा (ग्लोबल डायरेक्टर ऑफ बिज़नेस डेवलपमेंट, मैकेनिकल/मेटालर्जी, लांजा टेक, यूके), डॉ. सुधीर तिवारी (प्रोफेसर, इलेक्ट्रिकल, एसजीएसटीआईएस, इंदौर) और डॉ. शैलेन्द्र शर्मा, (प्रोफेसर, इलेक्ट्रिकल, एसजीएसटीआईएस, इंदौर) आदि रहे । तीनों दिनों में आयोजित तकनीकी सत्रों में कुल 165 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें से सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियों को पुरस्कृत भी किया गया।
5 सितम्बर को आयोजित समापन सत्र में विशिष्ट अतिथि श्री परेश शाह (कार्यकारी निदेशक, JSW, रायगढ़), श्री वेंकटेशन (महाप्रबंधक, गेल, दिल्ली), कुलपति डॉ. आर. डी. पाटीदार और कुलसचिव डॉ अनुराग विजयवर्गीय उपस्थित रहे।

सभी अतिथियों ने सम्मेलन की सफलता पर आयोजकों को बधाई दी और इसे सतत विकास की दिशा में एक सार्थक पहल बताया। अंत में सम्मेलन की संयोजिका डॉ. निथ्या मुथुकुमारन ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, आयोजन समिति एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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