देश के सुप्रसिद्ध बालगीतकार शंभूलाल शर्मा “वसंत”जी का देहावसान,बाल साहित्य जगत के लिये अपूर्णीय छति

देश के सुप्रसिद्ध बालगीतकार शंभूलाल शर्मा “वसंत”जी का देहावसान,बाल साहित्य जगत के लिये अपूर्णीय छति ..

तमनार @संदेशा (प्रमोद सोनवानी ‘पुष्प’) 29.5.2021 उषाकोठी अर्थात औषधि से भरा हुआ पहाड़ के गोद में बसा है , ग्राम करमागढ़ यानी कर्म का गढ़ । जहाँ राजपरिवार की देवी माँ मानकेश्वरी जी का सिद्ध मंदिर भी है । करमागढ़ को हम सभी दो कारणों से जानतें हैं । पहला – माँ मानकेश्वरी सिद्ध दरबार । दूसरा – देश के प्रसिद्ध बालगीतकार श्री शंभूलाल शर्मा वसंत जी की बाल साहित्य साधना ।
कर्म के गढ़ में सिर्फ पसीनों का किला नहीं वरन् वहाँ हरित आभा वाली छाँव की चहल – पहल भी है । ऐसे एकांत छाँव में देश के प्रसिद्ध बालकवि श्री शंभूलाल शर्मा ‘वसंत’ जी का परिवेश मुझे एक लम्बे समय से आकर्षित करता रहा है ।
अपने धुन के पक्के बालकवि ‘वसंत’ मूलतः गाँव के परिवेश में जीवन – यापन करने वाले विलक्षण प्रतिभा सम्पन्न 73 वर्षीय सफल रचनाकार थे ।
ग्राम गोर्रा , रायगढ़ जिले का ही एक साधारण ग्राम है । जहाँ संस्कृत भाषा के विरासतीय वातावरण देने वाले पंडित श्री शिवकुमार शर्मा व श्रीमती वेदमती शर्मा जी के घर में 11 अप्रैल सन् 1948 को श्री शंभूलाल शर्मा ‘वसंत’ जी का जन्म हुआ।
वे बी.ए. , बी. एड. तक शिक्षा प्राप्त किये । तत् पश्चात् एक शिक्षक के रूप में जानें कितनी शालाओं में नौनिहालों को ज्ञानदान देकर , वर्तमान में विश्राम ले चुके थे ।
उनका विवाह श्रीमती प्रेमकुमारी शर्मा जी के साथ हुआ था । बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि , यदि उनका साथ वसंत जी को निरंतर मिला होता तो वे किसी संपन्न ग्राम में निवासरत होते । शायद यह नियति का संकेत ही है कि , “वसंत जी का आधा जीवन सर्वथा बालसाहित्य के लिये ही बना था । ”
कवि वसंत जी , अपने दो पुत्र बड़ा वेदप्रकाश शर्मा व छोटा ओमप्रकाश शर्मा के साथ वन्य परिवेश वाला ग्राम में पिछले साढ़े चार दशक से निरंतर रहकर हिन्दी व छत्तीसगढ़ी में बालगीत लेखन कार्य में बड़े सिद्दत के साथ लगे हुये थे ।
बड़ा पुत्र वेदप्रकाश का अस्वस्थता के कारण विवाह नहीं हुआ है । छोटा पुत्र ओमप्रकाश शर्मा का विवाह श्रीमती प्रतिभा शर्मा जी के साथ हुआ है । जिनका एक पुत्र भी है आरव शर्मा । बाल कवि ‘वसंत’ अपने पौत्र को देखकर , उसके हाव – भाव को समझ बाल साहित्य का एक नवीन अध्याय गढ़नें में लगे हुये थे ।
बच्चों के गीत लिखने में माहिर कवि वसंत जी के गीतों में सप्तरंग का समावेश है । बच्चों के लिये बच्चों की बात , बच्चों की भाषा में कहना बड़ों के लिये एक चुनौती साबित होती है । बच्चों जैसा सरल , निश्छल , तरल होना और भी कठिन है । जिस मापदंड पर वसंत जी खरे कवि थे ।
वसंत जी समकालीन बाल कविता में प्रकृति चेतना के महत्वपूर्ण कवि के रूप में जाने जाते हैं । वे हिन्दी बाल साहित्य जगत में एक ऐसे नाम है जो , भारतीय बाल साहित्य के गगन में ध्रुव तारे की भाँती नजर आते हैं ।
बालकवि श्री शंभूलाल शर्मा वसंत जी की प्रकाशित कृतियां में (1) सतरंगी कलियाँ (2) मामा जी की अमराई (3) चंदा मामा के आँगन में (4) बरखा ले आई पुरवईया (5) मेरा रोबोट (6) है ना , मुझे कहानी याद (7) जंगल में बजा नगाड़ा (8) कोयल आई , धूम मचाई (9) इक्यावन नन्हें गीत के अतिरिक्त काव्य व्यक्तित्व पर केंद्रित समीक्षा की पुस्तक “बगर गया वसंत” (संपादक :- जय प्रकाश मानस )
छत्तीसगढ़ी में (1) बादर के मांदर (2) नोनी बर फूल (3) आजा परेवां कुरु – कुरु शामिल हैं ।
बालकवि ‘वसंत’ जी की अब तक देश की महत्वपूर्ण बाल पत्रिका नंदन , बालहंस , बालभारती , बालवाटिका , बालबोध , हँसती दुनियाँ , मधुमुस्कान , देवपुत्र , समझ झरोखा , अभिनव बालमन , बाल साहित्य समीक्षा , बचपन , बालमित्र एवं नवभारत आदि में शताधिक रचनाएं प्रकाशित हुई है और आकाशवाणी केन्द्र रायगढ़ , अंबिकापुर एवं रायपुर से प्रसारण हुआ है ।
“वसंत” जी को साहित्य सेवा हेतु ग्राम्यभारती शोध संस्थान तमनार द्वारा “भारती सम्मान” , । बहुआयामी सांस्कृतिक संस्था सृजन सम्मान द्वारा “सृजन श्री सम्मान” , ।
नई पीढ़ी की आवाज सम्मान ।
बालवाटिका मासिक भीलवाड़ा (राज.) द्वारा “बालवाटिका सृजन सम्मान” व श्री सिद्धेश्वर साहित्य मंच द्वारा “श्री सिद्धेश्वर साहित्य सम्मान” से अलंकृत किया गया है ।
देश के महान बाल इतिहासकार डॉ. प्रकाश मनु जी अपने हिन्दी बाल कविता का इतिहास व बाल साहित्य का इतिहास में ‘वसंत’ जी की रचना धर्मिता की भूरी – भूरी प्रशंसा किये हैं जो पूरे छत्तीसगढ़ प्रान्त के लिये गौरवमयी तथ्य है ।
छ. ग. के पूर्व शिक्षामंत्री श्री सत्यनारायण शर्मा जी लिखते हैं कि , बालकवि वसंत एक ऐसे रचनाकार हैं जिनकी बाल कृतियां धुंआधार छप रहे हैं । वे छ.ग. ही नहीं वरन् पूरे देश का नाम रौशन करने वाले कवि हैं । ”
वसंत जी के काव्य व्यक्तित्व पर छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण साहित्यकार व शिक्षाविद् डॉ. बलदेव , दिविक रमेश , रमेश चन्द्र पंत , गिरीश पंकज , डॉ. नागेश पाण्डेय ‘संजय’ , डॉ. भैरुंलाल गर्ग , जयप्रकाश मानस , मोहम्मद फहीम , चम्पा मोलवे , मो. अरशद खान , डॉ. चित्तरंजन कर , राम पटवा , डॉ. राजेन्द्र सोनी व डॉ. देवेश दत्त मिश्र आदि ने अपने – अपने कलम चलाये हैं , जो अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है ।
राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध ऐसे महान बाल साहित्यकार “वसंत” जी ब्रेन लकवा के कारण 27 मई 2021 , दिन – गुरुवार को विलासपुर ले जाते वक्त इहिलोक को छोड़कर परमधाम को चले गये । ईश्वर उनकी पुण्य आत्मा को शान्ति प्रदान करे ।
“श्री फूलेन्द्र साहित्य निकेतन” की ओर से , हम सबका अंतिम नमन – विनम्र श्रद्धांजलि …
श्रद्धांजलि स्वरूप आइये पढ़ें बालकवि वसंत जी की कुछ चुनिंदा बाल कविताएँ ….
(1) सूरज दादा करवा लो तूम ,
जल्दी से उपचार ।
तेज बुखार चढ़ा है तुमको ,
कुछ तो करो विचार ।।
उचित नहीं है इस हालत में ,
करना कुछ भी काम ।
कम से कम दोपहरी में तुम ,
करो तनिक विश्राम ।।
(2) मम्मी कहती पढ़ना है ।
तुमको आगे बढ़ना है ।।
पर मुनियाँ मैं छोटी सी ।
हर पुस्तक है मोटी सी ।।
हालत मेरी खस्ता है ।
भारी लगता बस्ता है ।।
इसका बोझ उठाती हूँ ।
सचमुच मैं थक जाती हूँ ।।
इसीलिये मन घबराया ।
और मुझे रोना आया ।।
(3) गर्मी आई , छुट्टी लाई ,
अब तो है आराम ।
मामा जी के घर जायेंगे ,
है न कुछ तो काम ।।
पीले – पीले , बड़े रसीले ,
मीठे – मीठे आम ।
मामा जी की अमराई है ,
नहीं लगेगा दाम ।।
मामा के घर , काहे का डर ,
अपना होगा राज ।
इसीलिये ढेरों खुशियाँ हैं ,
मेरे मन में आज ।।
तमनार / पड़िगाँव – रायगढ़ (छ.ग.)
पिन – 496107



