छत्तीसगढ़ के युग पुरुष लाडले एवं दुलारे नेता नन्दकुमार पटेल

छत्तीसगढ़ के युग पुरुष लाडले एवं दुलारे नेता नन्दकुमार पटेल
बरमकेला @ संदेशा 24 @ मोहन नायक
“म.प्र. आने के बाद तुम्हारा नाम सुना,अब यहॉ आकर देखा समझा तो उससे भी कहीं बेहतर पाया,ऐसे ही लगे रहो,प्रदेश में एक दिन बड़ा नाम होगा।”यह अनमोल शब्द भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने शहादत के सिर्फ दो दिन पूर्व अपने रायगढ़ प्रवास के दौरान खरसिया विधायक नंद कुमार पटेल से उस वक्त कहा जब उन्हें खुली जीप पर साथ लेकर नगर भ्रमण कराया,तब नंदकुमार पटेल विधायक जरूर बन गए थे मगर किसी ने नहीं सोचा था शायद खुद पटेल ने भी नहीं सोचा होगा कि पूरे प्रदेश के लोगों के दिलों में इस कदर जगह बना पाएंगे ।लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को तब शायद पूर्वाभास हो गया था और बाद में राजीव जी के नहीं रहने पर भी उनके एक-एक शब्द शत-प्रतिशत खरे उतरते गये।
जब नन्दकुमार पटेल पहली बार विधायक बने तब विपक्ष में रहे तब भी अपनी सक्रियता एवं मुखरता से न सिर्फ क्षेत्र में बल्कि पूरे प्रदेश में अलग पहचान बनी, फिर लगातार ज्यादा बढ़त के साथ चुनाव जीतते चले गए और ओहदा भी बढ़ता चला गया राज्य मंत्री से गृह मंत्री तक का सफर। वे जिस भी ओहदा में रहे अपने कार्यशैली से उससे ऊंचा ओहदा पाने लायक कार्य कर अपनी काबिलियत का बोध कराया।
छत्तीसगढ़ बनने के बाद पहले सत्ता में फिर विपक्ष में और फिर प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद जो सक्रियता दिखाई एवं सरकार को घेरने की रणनीति बनाई उससे पार्टी हाईकमान को यह कहना पड़ा कि “देश के सर्वाधिक सक्रिय और काबिल प्रदेश अध्यक्ष हैं छत्तीसगढ़ का नंद कुमार पटेल”।जिसने सत्ता को हिला कर रख दिया और पार्टी को मजबूत स्थिति में खड़ा कर दिया। ऐसे महान हस्ती से व्यक्तिगत तौर पर करीब से जुड़ने का सौभाग्य मिला,तब संचार सुविधा इतना विकसित नहीं हुआ था मुलाकात के अलावा तब पत्र से संवाद होता था फिर समय के साथ क्रमशःअन्य संचार माध्यमों से अनवरत संपर्क होता गया जो जीवन पर्यंत जारी रहा।इससे इस बात से वाकिफ हुआ की प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पूरे एक हजार दिन का कार्य योजना का कैलेंडर पहले से तैयार कर पार्टी के एक लक्ष्य तय कर लिया था। जिसमें सप्ताह के 7 दिनों में 5 दिवस का कार्यक्रम तय था और शेष दो दिवस में एक दिन निजी अथवा क्षेत्र के लिए और एक दिन हाईकमान के लिए आरक्षित जरूर रहता था ।बाकि दिनों का लक्ष्य और एक हजार दिवस का प्लान तैयार था जिसमें दिनेश पटेल की सबसे अहम भूमिका थी ।शहीद दिनेश आधुनिक तकनीक के साथ-साथ अनुभवी एवं जानकार भी थे।
नन्दकुमार पटेल की एक बड़ी विशेषता थी कि वे इस क्षेत्र में जब भी आये या गुजरे तो जरूर हम तक सुचना पहुंचाते थे ।इसमें कभी चूक नहीं हुआ। हमेशा उनका अपनत्व बना रहा।कई बार आम जनता की राय जानने धान खरीदी व्यवस्था एवं शासन के अन्य योजनाओं की ग्राउंड रिपोर्ट जानने के लिए कई-कई बार फोन कर आम जनता की प्रतिक्रिया एवं हितों का ध्यान रखते थे।सीधा संवाद स्थापित कर शासन प्रशासन स्तर पर उनके विचार के अनुरूप कार्य योजना बनाते थे ।दो-तीन मर्तबा ऐसा भी हुआ जब वे राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति जैसे देश के सबसे महान हस्तियों से कुछ महत्वपूर्ण कार्यों के लिए मिले।इतनी ब्यस्थता और जिम्मेदारियों के बावजूद रात्रि के 1:00 से 2:00 बजे मोबाइल से संदेश भेजकर रिप्लाई किए हैं ये उनकी कार्य शैली की बहुत बड़ी विशेषता थी। उनके पूरे प्रदेश में चहेतों की बहुत बड़ी फौज थी बावजूद इसके निजी संबंधों को भी बड़ी प्रगाढ़ता से निभाया। सुख में हो या दुख में जब भी उन तक सूचना गई। भोपाल से यहां तक पहुंचने में न देरी की न संकोच किया। ऐसा अपनत्व बिरले नेताओं में शायद ही देखने को मिले।अपने क्षेत्र में सरपंच से लेकर मंत्री बनने तक विकास कार्य को कुछ इस ढंग से जमीन पर उतारा कि वह सबके लिए मॉडल बनता गया ।भले वे आज हमारे बीच नहीं रहे मगर उनका काम और नाम दोनों क्षेत्र के लोगों के दिलों में सदा सदा के लिए अमर हो गया। झूठी तारीफ सुनने के बजाय तथ्यों पर आधारित सत्य को जानने सुनने में रुचि रखने वाले नंद कुमार पटेल एक ऐसी शख्सियत थे ,जो विपक्ष में संघर्ष के दिनों में भी बड़ी भीड़ आसानी से जूटा लेते थे।सच तो यह है कि उन्हें लोग देखने सुनने को लालायित रहते थे ।उनके एक-एक शब्द को लोग ध्यान से सुनते थे और अंगीकार करते थे।वे छत्तीसगढ़ की जनता की आवाज बनते जा रहे थे और इसकी शुरुआत परिवर्तन रैली के माध्यम से बिलासपुर से कर चुके थे जिसमे उमड़ी भीड़ और उनकी प्रतिक्रिया समूचा प्रदेश के लोगो में उनके प्रति अगाध आस्था एवं लोकप्रियता का परिचायक था । जिसका मैं साक्षी और जन प्रतिक्रिया उन तक पहुंचाने का माध्यम भी था। उनके एक से बढ़कर एक कई ऐसे प्रसंग है जो हम सब के लिए प्रेरणास्रोत हैं।उनके पद चिन्हों और जीवन प्रसंगों को विस्तार से जानने और अंगीकार कर वर्तमान और भावी पीढ़ी बहुत कुछ सीख सकता है।ऐसे विराट ब्यक्तित्व के धनी एवं विकास पुरुष थे नंदकुमार पटेल ।उनकी और दिनेश पटेल की शहादत बेकार नहीं जाएगी ।छत्तीसगढ़ के माटी में रच बस गया है जिसे कोई अलग नहीं कर सकता।उनकी खुशबू जो आने वाले पीढ़ी के लिए पथ प्रदर्शक का काम करेगा।युग युगान्तर तक।।।



