प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय पिथौरा द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

पिथौरा @संदेशा 24
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय पिथौरा के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया जिसमें शारीरिक आसन प्राणायाम योग आदि करवाए गए साथ ही ब्रह्माकुमारी पुष्पा दीदी ने योग के बारे में बताया कि योग परमात्मा की इस अवतरन भूमि पर भारत की एक अमूल्य धरोहर है प्राचीन काल से ही योग को हमारी संस्कृति एवं दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा माना गया है

जिसे आज समस्त विश्व अपनाना चाहता है और लोग आज यह मानने भी लगे हैं कि योग ही एक ऐसी संजीवनी बूटी है जो कि हमारे तन और मन को स्वस्थ करती है और यह हमारे लिए बहुत ही खुशी की बात है कि 21 जून 2015 को यूनाइटेड नेशंस द्वारा इंटरनेशनल योगा डे घोषित कर जीवन को और जीवन में योग की पुनर्स्थापना का महत्वपूर्ण योगदान दिया है एक ओर आज हम जहां देख रहे हैं कि योग के प्रति लोगों का रुझान तो बढ़ रहा है पर दूसरी ओर एक मन में सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर भारत का प्राचीन योग कौन सा है जो की गीता में भी वर्णित है जिससे हम अपनी समस्त परेशानियों को दूर कर सकते हैं सर्वांगीण विकास कर सकते हैं तो आज मानव की मूलभूत आवश्यकताएं हैं रोटी कपड़ा और मकान जिसको जुटाने के लिए मनुष्य भरश्क प्रयास भी करता है पर एक कटु सत्य जो बीच आया है कि आज कौन सी भूख है ,वह है सुख शांति की भूख जिससे आज वह ग्रसित है और उसे किसी प्रकार का धन वैभव पदार्थ मिटा नहीं पा रहा भारत का प्राचीन योग कौन सा है

जो की गीता में भी वर्णित है आज कौन सी भूख है वह उसके पास तन को ढकने के लिए कपड़े तो है जो उसकी हर तरह की गर्मी सर्दी से बचा सकते हैं पर विपरीत परिस्थितियों की हवाओं से बचने के लिए उसके पास कोई कपड़ा नहीं है आज उसके पास मकान तो है पर एक ऐसी छत्रछाया जो उसको कदम कदम पर निश्चित कर सके ऐसी छत्रछाया उसके पास नहीं है आज व्यक्ति अपने सपनों की उड़ान से अपने जीवन के सफर को तय करना चाहता है पर और वह किसी प्रकार का समझौता नहीं करना चाहता और संघर्ष करते-करते आज वह कई बार अपने आप को शक्ति हीन महसूस कर रहा है और इस शक्तिहीनता का कारण और उसके प्रभाव जीवन में तनाव का वह अनुभव कर रहा है तो इस आध्यात्मिक शक्ति का अभाव वह कैसे दूर हो और उसका एकमात्र उपाय है

यह राजयोग मेडिटेशन राजयोग हमें जीवन में पूर्णता का अनुभव करता है इस राजयोग में ही सभी प्रकार के योग समाये हुए हैं हम सभी जानते हैं कि हम सभी समस्त शक्तियां लेकर पैदा हुए हैं आज सिर्फ जरूरत है अपने जीवन में इस राजयोग को अपना कर और आत्मा का ज्ञान परमात्मा का ज्ञान समझ कर हम इसे अपनाये क्योंकि एक तरफ हमारी देख रहे हैं कि शारीरिक आसन प्राणायाम योग आदि करने से हमारी शारीरिक बीमारियां दूर हो रही है पर दूसरी ओर इस राजयोग का संबंध है हमारे विचारों से जो कि शरीर के साथ-साथ मन की बीमारियों को भी ठीक कर सकता है

क्योंकि आज यह रिसर्च में पाया गया है कि 90% जो बीमारियां है वो नकारात्मक विचारों का दुष्परिणाम है तो जब हम राजयोग का अभ्यास करते हैं और सकारात्मक विचारों का चिंतन करते हैं तो इससे हम सर्वांगीण विकास कर सकते हैं जिसमें की शारीरिक के साथ मानसिक बौद्धिक सामाजिक एवं आध्यात्मिक सशक्तिकरण हम कर सकते हैं साथ-साथ इस राजयोग में हम जाति भेद संप्रदाय की भावना से ऊपर उठकर एक विश्व बंधुत्व का भाव पैदा करते हैं यही राजयोग की मात्र उपाय है जो सभी को एक सूत्र में बांधता है।

