ओपीजेयू में ‘इनोवेशन एन्ड रिसर्च इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ (ICIRSTSD-25)’ विषय पर दो-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन

ओपीजेयू में ‘इनोवेशन एन्ड रिसर्च इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ (ICIRSTSD-25)’ विषय पर दो-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन
सतत विकास एक सामूहिक उत्तरदायित्व है, जिसे किसी एक क्षेत्र या अनुशासन द्वारा अकेले पूरा नहीं किया जा सकता। इसके लिए इंजीनियर, पर्यावरण विशेषज्ञ, डेटा वैज्ञानिक, सामाजिक शोधकर्ता और नीति निर्माता सभी को मिलकर कार्य करना होगा। शैक्षणिक संस्थानों को इस दिशा में अग्रसर होकर नेतृत्व करना चाहिए और प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी को सुनिश्चित करना चाहिए। सतत विकास तभी संभव है जब हम ग्रीन एनर्जी, ग्रीन बिल्डिंग, रीयूज़, रीसाइकल और संतुलित जीवनशैली को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।“- डॉ एल. पी. पटेरिया, कुलपति , शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय, रायगढ़ )
रायगढ़ @संदेशा 24
ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय , रायगढ़ के स्कूल ऑफ़ साइंस द्वारा ‘इनोवेशन एन्ड रिसर्च इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ (ICIRSTSD-25) विषय पर 29-30 मई 2025 के दौरान आयोजित दो-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। स्कूल ऑफ़ साइंस के इस चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हाइब्रिड माध्यम से किया गया। सम्मेलन के वाइस चेयरमैन एवं स्कूल ऑफ साइंस के डीन, डॉ. गिरीश चंद्र मिश्रा ने जानकारी दी कि आज के दौर में डिजिटल तकनीकें बेहद तेज़ी से विकसित हो रही हैं, और समसामयिक जरूरतों को देखते हुए नवाचार व अनुसंधान की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य था — विश्वभर से संबंधित क्षेत्रों के अग्रणी शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों को एक मंच पर लाकर, टिकाऊ नवाचारों, वर्तमान प्रवृत्तियों, सामाजिक और वैज्ञानिक चिंताओं, और व्यावहारिक चुनौतियों पर संवाद स्थापित करना। साथ ही, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनाए गए समाधानों को साझा करना और उन पर गहन चर्चा करना भी इस सम्मेलन का प्रमुख लक्ष्य था। डॉ. मिश्रा ने बताया कि सम्मेलन का प्रमुख विषय सतत विकास के लिए आवश्यक प्रयासों पर केंद्रित रहा। इसमें अकादमिक जगत और उद्योगों से जुड़े प्रतिष्ठित वक्ताओं ने अनुप्रयुक्त विज्ञान और नवीनतम तकनीकी क्षेत्रों पर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर देश-विदेश से जुड़े प्रमुख वक्ताओं ने भाग लिया, और 120 से अधिक शिक्षाविदों, विद्वानों, इंजीनियरिंग व विज्ञान के शोधकर्ताओं तथा छात्रों ने प्रतिभागी के रूप में सम्मिलित होकर इस संवाद को समृद्ध किया। उन्होंने यह भी कहा कि यह सम्मेलन बदलती वैश्विक चुनौतियों के परिप्रेक्ष्य में नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा बहुविषयक सहयोग के लिए एक सार्थक मंच सिद्ध होगा।
29 मई को आयोजित सम्मेलन के उदघाटन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. एल. पी. पटेरिया (कुलपति, शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय, रायगढ़), सम्मानित अतिथियों डॉ. अरुण त्रिपाठी (प्रोफेसर-गणित, संभलपुर विश्वविद्यालय, ओडिशा), डॉ. मारुति कश्यप (जीएनवी, सीईओ, वीबी ग्रुप, हैदराबाद, तेलंगाना), डॉ. एस.एस. राठी (प्लांट हेड, नलवा स्टील एंड पावर, रायगढ़), ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय के कुलपति एवं सम्मेलन के चेयरमैन डॉ आर. डी. पाटीदार एवं कुलसचिव डॉ अनुराग विजयवर्गीय की उपस्थिति में सम्मलेन का उद्घाटन किया। समारोह की शुरुआत में डॉ. आर. डी. पाटीदार ने सभी सम्माननीय अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने सम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह आयोजन मध्य भारत में एक महत्वपूर्ण और विशिष्ट सम्मेलन है, जो अनुप्रयुक्त विज्ञान, प्रौद्योगिकी, तथा अंतरविषयी क्षेत्रों में नवाचार, शोध और सतत विकास को केंद्र में रखकर आयोजित किया गया है। डॉ. पाटीदार ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य विश्वभर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाकर विचार-विमर्श, चिंतन एवं सहयोग के माध्यम से नवाचार और अनुसंधान को नई दिशा देना है। उन्होंने यह भी बताया कि ओ. पी. जिंदल विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को “फ्यूचर रेडी” बनाने और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने हेतु निरंतर प्रयासरत है। निकट भविष्य में विश्वविद्यालय द्वारा आरंभ किए जाने वाले शोध-आधारित पहलों की जानकारी भी उन्होंने साझा की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सम्मेलन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार और अनुसंधान के माध्यम से सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक सार्थक पहल है, जो अकादमिक संस्थानों, उद्योगों और नीति निर्माताओं के बीच सहयोग एवं अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है। विशिष्ट अतिथियों डॉ. अरुण त्रिपाठी, डॉ. मारुति कश्यप और डॉ. एस. एस. राठी ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में नवाचार और अनुसंधान में निरंतरता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही सतत विकास को मजबूती देगा। साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि शोध और नवाचार के साथ-साथ उद्यमिता को भी बढ़ावा देना समय की मांग है, जिससे आर्थिक और सामाजिक विकास को गति दी जा सके। सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. एल. पी. पटेरिया ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में अनुसंधान और नवाचार की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सतत विकास एक ऐसा साझा उत्तरदायित्व है जिसे किसी एक क्षेत्र या अनुशासन के बलबूते पूरा नहीं किया जा सकता। इसके लिए इंजीनियरों, पर्यावरणविदों, डेटा वैज्ञानिकों, सामाजिक शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को मिलकर समन्वित प्रयास करने होंगे। डॉ. पटेरिया ने इस बात को रेखांकित किया कि शैक्षणिक संस्थानों को इस दिशा में अग्रसर होकर नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए, और समाज के हर व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रीन एनर्जी, ग्रीन बिल्डिंग, रीयूज़, रीसाइकल और संतुलित जीवनशैली को अपनाए बिना सतत विकास की कल्पना अधूरी है। इस अवसर पर सम्मेलन की स्मारिका (सुवेनियर) एवं स्कूल ऑफ साइंस के न्यूज़लेटर के नवीनतम अंक का विमोचन भी किया गया, जिसमें शोधपत्रों, विचारों और आयोजनों की झलक प्रस्तुत की गई। समारोह के समापन पर सम्मेलन के वाइस चेयरमैन डॉ. गिरीश चंद्र मिश्रा ने मंच से सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों और आयोजन से जुड़े सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया और सम्मेलन की सफलता के लिए उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया।

दो दिनों तक चले सम्मलेन के दौरान उदघाटन एवं समापन सत्रों के आलावा कीनोट सेसंस एवं तकनीकी-सत्र आयोजित किए, जिसमे प्रमुख वक्तागणों– डॉ. बिजय कुमार साहू (प्रोफेसर-भौतिकी, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर), डॉ. अरविन्द देशमुख (अध्यक्ष, एमबीएसआई, नागपुर), डॉ. उलरिच बर्क (अध्यक्ष, द जर्मन एसोसिएशन ऑफ होमा थेरेपी, जर्मनी), प्रो. थॉमस अब्दुल्ला, (व्याख्याता; डिप्टी वाइस प्रेजिडेंट और मुख्य पर्यावरण इंजीनियर, एमटीए न्यूयॉर्क सिटी ट्रांजिट), डॉ. सुभा प्रतिहार ( सहायक प्रोफेसर-रसायन विज्ञान, अकांसास टेक यूनिवर्सिटी, यूएसए), डॉ. शिव राज नाइल, (वैज्ञानिक-सी, ब्रिक-एनएबीआई, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, मोहाली), डॉ. प्रशांत एस. अलेगांवकर (प्रोफेसर-भौतिकी विभाग, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय बठिंडा, पंजाब) एवं डॉ. संदीप शिंदे (वरिष्ठ वैज्ञानिक, 1सेल.एआई प्राइवेट लिमिटेड, वाकड, पुणे) आदि द्वारा सारगर्भित एवं उपयोगी व्याख्यान दिए गए। सम्मलेन के दौरान आयोजित तकनीकी सत्रों में 117 रिसर्च पेपर्स भी पढ़े गए।
30 मई को आयोजित सम्मेलन के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. उलरिच बर्क (अध्यक्ष, द जर्मन एसोसिएशन ऑफ होमा थेरेपी, जर्मनी) तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री थॉमस अब्दुल्ला (व्याख्याता; डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट एवं मुख्य पर्यावरण इंजीनियर, एमटीए न्यूयॉर्क सिटी ट्रांजिट) ने गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। समारोह के शुरुआत में ओ. पी. जिंदल विश्वविद्यालय के कुलपति एवं सम्मेलन के चेयरमैन डॉ. आर. डी. पाटीदार ने सभी सम्माननीय अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन की दो दिवसीय उपलब्धियों और प्रमुख चर्चाओं पर प्रकाश डाला। सम्मेलन की संयोजिका डॉ. तानियासेन गुप्ता राठौर ने पिछले दो दिनों की गतिविधियों का सार प्रस्तुत करते हुए विभिन्न सत्रों, प्रस्तुत शोधपत्रों और विचार-विमर्शों का संक्षिप्त विवरण साझा किया। विशिष्ट अतिथि श्री थॉमस अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में सम्मेलन की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए इनोवेशन और रिसर्च की वर्तमान वैश्विक जरूरतों के संदर्भ में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं के लिए संवाद का सशक्त अवसर प्रदान करते हैं। मुख्य अतिथि डॉ. उलरिच बर्क ने अपने विचार साझा करते हुए विश्वविद्यालयों की भूमिका को इनोवेशन और रिसर्च के केंद्र के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के बीच प्रभावी समन्वय को आवश्यक बताया। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही वह माध्यम है जिसके द्वारा सतत विकास को वास्तविक रूप में साकार किया जा सकता है। डॉ. बर्क ने यह भी कहा कि शोध एवं नवाचार शिक्षा व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी, व्यवहारिक और समाधान केंद्रित बनाते हैं। सम्मेलन के अंत में सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार से सम्मानित प्रतिभागियों के नामों की घोषणा की गई, जिन्होंने अनुप्रयुक्त विज्ञान, पर्यावरण प्रौद्योगिकी, डेटा एनालिटिक्स, और सतत विकास जैसे प्रमुख विषयों पर उत्कृष्ट शोध प्रस्तुत किए। समारोह के समापन पर डॉ. अंकुर रस्तोगी ने सभी गणमान्य अतिथियों, विश्वविद्यालय प्रशासन, प्रतिभागियों तथा आयोजन की सफलता में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।



