धरमजयगढ़ बोरो वन परिक्षेत्र में उम्रदराज अस्वस्थ्य हथिनी की थमी सांसे

धरमजयगढ़ बोरो वन परिक्षेत्र में उम्रदराज अस्वस्थ्य हथिनी की थमी सांसे
धरमजयगढ़ @ संदेशा 24 शेख आलम की रिपोर्ट अन्ततः उम्रदराज अस्वस्थ्य हथिनी की थमी सांसे बोरो वन परिक्षेत्र अंतर्गत मिला शव धरमजयगढ़ वन मंडल के बोरो वन परिक्षेत्र अंतर्गत वृद्ध हथिनी का शव मिला है।विदित हो कि यह हथिनी वृद्धावस्था के कारण काफ़ी कमजोर और निःशक्त हो गई थी।यहाँ तक कि उसे चलने फिरने में भी परेशानी हो रही थी।भोजन की तलाश में वह अक्सर गांव के नजदीक पहुंच जाती थी और शांत स्वभाव के कारण ग्रामीण भी उसके लिए भोजन का प्रबंध करते थे।कई जगहों पर डर की वजह से ग्रामीणों द्वारा उसे गांव से दूर भगाया जाता तो वह दूसरे इलाकों में चली जाती थी।इस तरह वह धरमजयगढ़, कोरबा एवं सरगुजा वनमंडल के क्षेत्रों तक पहुंच जाया करती थी।जहां वन विभाग के साथ साथ ग्रामीण भी उसकी देखरेख करते रहे।अभी कुछ समय पूर्व ही खबर आई थी कि कोरबा वनमंडल क्षेत्र में वन विभाग द्वारा उसके इलाज व देखरेख किया जा रहा है।उसके पश्चात उसकी स्थिति के बारे में जानकारी नहीं मिल रही थी।और आज अचानक धरमजयगढ़ वन मंडल अंतर्गत बोरो परिसर के कक्ष क्रमांक 683 RF के हिंझर नामक स्थान पर वह हथिनी मृत अवस्था में पाई गई।मामले की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंच चुके हैं। हाथी मानव द्वंद की घटनाएं अक्सर देखने सुनने को मिलती रही हैं लेकिन जिस प्रकार इस वृद्ध हथिनी की वन अमले व ग्रामीणों द्वारा समय समय पर देखभाल की जाती रही वह इंसानों एवं हथिनी की मित्रता के मिसाल के रूप में हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगी।वृद्ध हथिनी की मृत्यु की खबर सुनकर उसकी सेवा में लगे रहे अधिकांश लोगों के दिल से यही आवाज़ निकलेगी – अलविदा साथी….
