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रायगढ़

केजी कॉलेज रायगढ़ में पुस्तक विमोचन एवं व्याख्यान आयोजित समकालीन हिंदी साहित्य..विविध विमर्श पुस्तक का हुआ विमोचन

केजी कॉलेज रायगढ़ में पुस्तक विमोचन एवं व्याख्यान आयोजित,समकालीन हिंदी साहित्य : विविध विमर्श पुस्तक का हुआ विमोचन रायगढ़ @ संदेशा 24 @ मोहन नायककिरोड़ीमल शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय रायगढ़ के स्नातकोत्तर हिंदी साहित्य परिषद के तत्वावधान में आज पुस्तक विमोचन एवं व्याख्यान-माला कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मीनकेतन प्रधान ने की एवं मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. बेठियार सिंह साहू का विविध विमर्शों पर केंद्रित व्याख्यान हुआ। कार्यक्रम में सर्वप्रथम वाग्देवी सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण किया गया तदुपरांत विभाग के प्राध्यापक डॉ. रवींद्र चौबे द्वारा महाप्राण पं. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला द्वारा रचित सरस्वती वंदना वर दे वीणा वादिनी वर दे प्रस्तुत की गई। अगली कड़ी में राजेन्द्र महाविद्यालय छपरा बिहार में सहायक प्राध्यापक हिंदी के रूप में कार्यरत विभाग के पूर्व छात्र डॉ. बेठियार सिंह साहू एवं सौरभ सराफ द्वारा संपादित ग्रंथ ‘समकालीन हिंदी साहित्य : विविध विमर्श’ का विमोचन किया गया।तत्पश्चात डॉ. मीनकेतन प्रधान का अध्यक्षीय उद्बोधन हुआ। इस दौरान उन्होंने पुस्तक की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला और दलित, स्त्री, किन्नर, दिव्यांग इत्यादि विमर्शों को साहित्य के केंद्र में रेखांकित किया। डॉ. प्रधान ने कहा कि आगामी समय में विद्यार्थियों व पाठकों के लिए इस पुस्तक का विशिष्ट महत्व रहेगा। इसमें विविध विमर्शों के अंतर्गत कुछ बिल्कुल नवीन विषयवस्तु शामिल है भविष्य में उसकी व्यापकता दिखायी देगी। उन्होंने सम्पदाकद्वय के साथ समस्त लेखकों को अपनी मंगलकामनाएँ दी। तत्पश्चात हेमचन्द यादव विश्वविद्यालय दुर्ग छत्तीसगढ़ कला संकाय के डीन, हिन्दी के वरिष्ठ प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष साइंस कॉलेज दुर्ग डॉ. अभिनेष सुराना का उद्बोधन हुआ। उन्होंने कहा कि विमर्श केंद्रित वर्तमान दौर में यह पुस्तक नए लेखकों को अवसर प्रदान करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने पुस्तक की भूमिका और अन्य बिंदुओं की सराहना करते हुए इस कार्य में संलग्न समस्त सदस्यों को शुभकामनाएं दी। तदुपरांत आज के आयोजन के मुख्य वक्ता डॉ. बेठियार सिंह साहू का उद्बोधन हुआ। उन्होंने अपने वक्तव्य में पुस्तक की आरंभिक योजना से प्रकाशन तक की चर्चा की और विभिन्न विषयों में अंतर्निहित सामाजिक समरसता, लेखकीय अभीप्सा पर प्रकाश डाला। उन्होंने सभी प्रमुख विमर्शों से कुछ उदाहरण प्रस्तुत करते हुए सभी के केंद्र में भेदभाव रहित मानवीय समाज की स्थापना के मूल ध्येय पर जोर डाला। इस अवसर पर स्नातकोत्तर हिंदी विभाग की सदस्य डॉ. रवींद्र चौबे ने विभिन्न लेखकों का अंतर्वस्तु विश्लेषण करते हुए ग्रंथ की महत्ता को रेखांकित किया। इसी क्रम में श्री उत्तरा कुमार सिदार ने पुस्तक पर केंद्रित समीक्षा प्रस्तुत की। विभाग की सदस्य प्रो. लक्षेश्वरी ने अपने उद्बोधन में विमर्शों की प्रासंगिकता का रेखांकन किया और इसे वर्तमान साहित्यिक परिदृश्य में अत्यंत महत्वपूर्ण निरूपित किया। कार्यक्रम का मंच संचालन विभाग के पूर्व छात्र एवं अतिथि व्याख्याता सौरभ सराफ द्वारा किया गया। उन्होंने संचालन के मध्य ही पुस्तक की विशिष्टाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में छत्तीसगढ़ के साथ ही देश के विभिन्न राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों जैसे मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, पोर्ट ब्लेयर, दिल्ली इत्यादि के प्राध्यापकों, सहायक प्राध्यापकों, शोधार्थियों, लेखकों के लेख सम्मिलित हैं। उन्होंने कहा कि जुलाई 2021 से एक वर्ष की अवधि के भीतर ही प्रकाशन कार्य सम्पन्न हुआ और आज उसका विमोचन हो रहा है यह हमारे लिए अत्यंत हर्ष का क्षण है। इस अवसर पर उन्होंने ग्रंथ के प्रकाशक राजकुमार परनामी और किरण परनामी के साथ ही राज पब्लिशिंग हॉउस के समस्त स्टाफ के प्रति धन्यवाद भी ज्ञापित किया। अंत में आभार प्रदर्शन स्नातकोत्तर साहित्य परिषद के सचिव छात्र शैलेंद्र सिंह राठिया द्वारा किया गया। पुस्तक के अध्याय लेखकों में डॉ. विद्या प्रधान, चंद्रिका दास वैष्णव, आशुतोष सिंह, प्रो. बाल किशोर भगत, प्रो. अरुणा कुमारी, डॉ. प्राची थवाईत, प्रो. शिवानी शर्मा, श्री टिकेंद्र यदु, बेलमती पटेल, लक्ष्मीन चौहान, निर्मला पटेल, संग्राम सिंह निराला, प्रो. रूमी जायसवाल, प्रो. ऋचा, डॉ. सुरेश बैरागी, प्रो. पुष्पारानी, होरीलाल, हेमलाल इत्यादि ने अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज की। ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम में विभाग के सभी सदस्यों, ग्रंथ के संपादक, लेखकों, सुधि श्रोताओं प्रो. राकेश गिरी, डॉ. गरिमा तिवारी, प्रो. सुधा वर्मा, स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के प्रथम व तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों नागेंद्र निषाद, परमानन्द सिदार, कृष्णा मेहता, पुष्पांजलि गुप्ता, आरती एक्का, उर्मिला कुजूर, मोनिका, अनीता चौहान, लता पटेल, दिव्या गुप्ता, ऋतु चौहान, रेवती भोय, अंजली, ब्रिजभानु, राजकुमार यादव, अनामिका, नरहरि, रमा, निकिता, ओमप्रिया, कौशल, नील माधव, ज्योति, प्रीति, सपना, शिव, ईश्वरी, प्रियंका, छत्तरलाल, अंजली, कैलाश ललिता, दमयंती, गीता, गोपेश्वरी, जानकी, केतकी, उषा, नंदिनी, पूनम, सपना, रंजना, रंजीता, रोशनी, श्वेता, नम्रता, तनु, सरिता, सुषमा, सुष्मिता, लखन कुमार सिदार इत्यादि की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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