ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष दशमी तिथी गुरुवार हस्त नक्षत्र,गङ्गा दशहरा व सुदशा व्रत

ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष दशमी तिथी गुरुवार हस्त नक्षत्र,गङ्गा दशहरा व सुदशा व्रत
तमनार @संदेशा 24 @आचार्य पं.किशोर पाणिग्राही
गङ्गादशमी–ज्येष्ठमासके शुक्लपक्ष की पावन दशमी तिथी को पुण्यसलिला भगवती भागीरथी श्रीगङ्गा जी का हस्त नक्षत्रमें स्वर्गसे भारतकी इस पवित्र धरा पर अवतार हुआ।
दशम्यां शुक्लपक्षे तु ज्येष्ठे मासि कुजेsहनि ।अवतीर्णा ह्यधः स्वर्गाद्धस्तर्क्षे च सरिद्वरा।।
(वराहपुराण)
इस परमपावन तिथी में श्रीगङ्गा स्नान एवं श्रीगङ्गाजी के पूजन से दस प्रकारके पापों (तीन कायिक, चार वाचिक तथा तीन मानसिक) का नाश होता है ।इसीलिये इसे दशहरा कहा गया है—
ज्येष्ठ मासि सिते पक्षे दशमी हस्तसंयुता।
हरते दश पापानि तस्माद् दशहरा स्मृता।।
(ब्रह्मपुराण)
इस दिन गङ्गाजीमें अथवा सामर्थ्य न हो तो समीपकी किसी पवित्र नदी या सरोवर के जलमें स्नान कर अभयमुद्रा युक्त मकरवाहिनी गङ्गाजी का ध्यान करे निम्न मंत्र से आवाहनादि षोडशोपचार पूजन करे—
ऊँ नमःशिवायै नारायण्यै दशहरायै गङ्गायै नमः।।
गङ्गा गङ्गेति यो ब्रूयाद्योजनानां शतैरपि।
नरो न नरकं याति किं तया सदृशं भवेत्।। हर हर गङ्गे
समस्त चराचर जगत् के नर नारियों को गङ्गा दशहरा,सुदशा व्रत व विश्व पर्यावरण दिवश की हार्दिक शुभकामनाएं।।
🌹🙏जय मां बंजारी
आचार्य पं.किशोर पाणिग्राही
(ज्योतिष, कर्मकांड, भागवताचार्य)



