वर्ष का सबसे बड़ा एकादशी 6 जून 2025 निर्जला एकादशी

वर्ष का सबसे बड़ा एकादशी
6 जून 2025 निर्जला एकादशी
तमनार @संदेशा 24 @पं किशोर पाणिग्राही
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी निर्जला एकादशी कहलाती है। अन्य महिनोंकी एकादशीको फलाहार किया जाता है,परंतु इस एकादशीको फल तो क्या जल भी ग्रहण नहीं किया जाता।
यह एकादशी ग्रीष्म-ऋतु में बड़े कष्ट और तपस्या से की जाती है। अतः अन्य एकादशियोंसे इसका महत्त्व सर्वोपरि है।
इस एकादशी के करने से आयु आरोग्य की वृद्धि तथा उत्तम लोकों की प्राप्ति होती है।
महाभारत के अनुसार अधिमास सहित एकवर्ष की छब्बीसों एकादशियाँ न की जा सकें तो केवल *निर्जला* एकादशी ही व्रत कर लेनेसे पूरा फल प्राप्त हो जाता है–
वृषस्थे मिथुनस्थेsर्के शुक्ला ह्येकादशी भवेत् ।
ज्येष्ठे मासि प्रयत्नेन सोपोष्या जलवर्जिता ।।
स्नाने चाचमने चैव वर्जयेन्नोदकं बुधः।
संवत्सरस्य या मध्ये एकादश्यो भवन्त्युत।।
तासां फलमवाप्नोति अत्र में नास्ति संशयः।।
निर्जला व्रत करने वालों को अपवित्र अवस्थामें आचमन के सिवा बिन्दुमात्र भी जल ग्रहण नहीं करना है।
यदि किसी प्रकार जल उपयोग में ले लिया जाय तो व्रत भंग हो जाता है।
* *निर्जला एकादशी को सम्पूर्ण दिन -रात निर्जल -व्रत रहकर द्वादशीको प्रातः स्नान कर सामर्थ्यके अनुसार सुवर्ण और जलयुक्त कलशका दान करना चाहिये।
इसके अनन्तर व्रतका पारायण कर प्रसाद ग्रहण करना चाहिये।
व्यासजी के आदेशानुसार भीमसेन ने इस एकादशी का व्रत किया।इसलिये यह एकादशी भीमसेनी एकादशी के नामसे भी जानी जाती है।
स्कन्दपुराण के मतानुसार
* इस तिथी को निर्जल व्रत करे एवं शर्करायुत मधुर शीतल जलसे भरे हुए सुन्दर कलश कर्मनिष्ठ उत्तम ब्राह्मण को दान करे।
निर्जलां तामुपोष्यात्र जलकुम्भान सशर्करान्।
प्रदाय विप्रमुख्यभ्यो मोदते विष्णुसन्निधौ ।।
ऐसे दानको करने से भावुक भक्त भगवान विष्णु के सान्निध्य को प्राप्तकर परमानन्द-परिपूर्ण होता है।।

जय मां बंजारी,जयश्रीराम🚩🙏
आचार्य पं.किशोर पाणिग्राही
ज्योतिष, कर्मकाण्ड, श्रीभागवत
(गोल्डमैडेलिस्ट)🚩🚩🚩
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