भारतीय चिकित्सा पद्धति ‘आयुर्वेद’ कोरोना की जंग में कारगर

भारतीय चिकित्सा पद्धति ‘आयुर्वेद’ कोरोना की जंग में कारगर
कोरोना काल में आयुर्वेदिक चिकित्सा का है विशेष महत्व ..
तमनार @ संदेशा
तुलसी, अदरक, कालीमिर्च, हल्दी, दालचीनी, लौंग के अतिरिक्त जड़ी-बूटी जैसे ब्राह्मी, अश्वगंधा, सतावरी, मुलेठी, अर्जुनारिष्ट, पीपर, धनिया, काला जीरा, इलाइची की खपत इन दिनों बढ़ गई है। जिन जड़ी बूटी को डिजिटल युग के लोग घास-फूंस कहकर कन्नी काट लेते थे आज वो इन्हें ही इम्युनिटी बूस्टर के रूप में ग्रहण कर रहे हैं। कोरोना वायरस से जंग पूरा देश लड़ रहा है। भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा इसमें एक बड़े वरदान के रूप में सामने आई है।जिले के वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. जीपी तिवारी कहते हैं कि कोरोना एक महामारी है। महामारियों के विषय में हमारे आयुर्वेद में आदिकाल से वर्णन मिलता है। चरक ने महामारी को जनपदोध्वंस, सुश्रुत ने मरक तो भेल ने जनमार जैसे शब्द दिए। आयुर्वेद कहता है कि जनमानस द्वारा विरूद्ध आहार-विहार, पर्यावरण विरोधी जीवन शैली सृष्टि में महामारी पैदा करने में कारणभूत है।वर्तमान में कोरोना वायरस से पूरा विश्व प्रभावित हो रहा है। इसके मूल रूप से ऐसे लोग अधिक प्रभावित हो रहे हैं जिनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता कम है । इस लिए इसमें आयुर्वेद कि रोगप्रतिरोधक क्षमतावर्धक औषधियो का प्रयोग लाभकारी है। इसके अंतर्गत गिलोय, आंवला, पुनर्नवा, मधुयेष्ठी, अश्वगंधा, पिप्पली, सोंठ, काली मिर्च, तुलसी आदि का सेवन प्रभावकारी है। साथ-साथ ऋतुचर्या एवं आयुर्वेद की दैनिकचर्या आदि का पालन करते हुए रोग निवारण में कारगर सिद्ध हो सकता है।आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. नीरज मिश्रा कहते हैं कि इस पूरे कोरोना संक्रमण काल में आयुर्वेदिक डॉक्टर और स्टॉफ पूरी मुस्तैदी से कार्य कर रहा है । साथ ही इंडियन कॉउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए हम लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली औषधियां दे रहे हैं।डॉ. मिश्रा के अनुसार आयुर्वेद में महामारी के 6 लक्षण हैं जिसमें कास (सूखा कफ), श्वास (सांस लेने में दिक्कत), ज्वर (बुखार आना), अतिसार (डायरिया), प्रतिस्याय (सर्दी) और छर्दी (उल्टी) आदि हैं। कमोबेश कोरोना महामारी के लक्षण भी इसी से मिलते हैं। इसी कारण कोरोना को हराने में काढ़ा और आयुर्वेदिक औषधियों को प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उपयोग किया जा रहा है।पहले छत्रधारण (छाता लेकर चलना) भी चलन में था जिससे अपने आप सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होता था। आइसोलेशन को आयुर्वेद से जोड़ते हुए डॉ. तिवारी बताते हैं कि सुश्रुत के अनुसार ग्रामाघात (जिस गांव में महामारी फैली हो वहां न जाएं), कलह, युद्ध, हिंसक पशु इत्यादि से दूर रहना एक तरीके से आइसोलेशन ही है।टेलीमेडिसीन का सहारा लें लोग
आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ. नीरज मिश्रा की मानें तो इस कोरोना संकट के दौर में लोग टेलीमेडिसीन की सहारा लें यानी टेलीफोन में डॉक्टर से चिकित्सीय परामर्श लें। आजकल सारी चीजें ऑनलाइन मौजूद हैं, कोई भी डॉक्टर फोन पर परामर्श देने से मना नहीं करेगा।
वाट्सअप जैसे ऐप से आप फोटो या वीडियो कॉल से इस पद्धति को आसान बना सकते हैं। डॉ. मिश्रा आगे कहते हैं कि बीपी, शुगर के मरीज के घरवालों को घर में ही इनके डिजिटल डिवाइस खरीद कर रख लेने चाहिए ये ज्यादा मंहगे भी नहीं आते इससे संक्रमण का खतरा भी नहीं रहेगा।ORAC बढ़ाने पर ध्यान दें लोगऑक्सीजन रेडिकल एब्सॉरबेन्ट केपेसिटी (ORAC) जितना अधिक होगा उतनी ही ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता हमारे फेफड़ो को और रक्त की होगी। भविष्य में हमें हमारे अस्तित्व, जीवन बचाने के लिए हमें हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति (इम्युनिटी) को बढ़ाना होगा। लौंग, दालचीनी, कॉफी, हल्दी, कोका,जीरा,अजवाइन के फूल, तुलसी, अदरक ORAC बढ़ाने में मददगार हैं। साथ ही यह फलों, हरी साग-सब्जी, पत्तेदार सब्जियों, मसालों, वनस्पतियों, जड़ीबूटियों आदि से भरपूर मात्रा में प्राप्त किया जा सकता है


