सांसद गोमती की दहाड़ शेरनी जिंदा है… रिचार्ज कार्यकर्ता…चौकन्ना हुआ प्रशासन ….राजनैतिक गलियारों में हड़कम्प

सांसद गोमती की दहाड़ शेरनी जिंदा है… रिचार्ज कार्यकर्ता…चौकन्ना हुआ प्रशासन ….राजनैतिक गलियारों में हड़कम्प

🔹ओपी चौधरी विष्णु गोमती साय उमेश अग्रवाल की जुगलबंदी से भाजपा में नया समीकरण
अनिल रतेरिया की कलम से
संदेशा रायगढ़ 4.7.2020
आजादी के बाद पुष्पा देवी रजनी गंधा का संसदीय कार्यकाल रहा उसके बाद नन्दकुमार साय अजीत जोगी विष्णु देव साय भी रायगढ़ जशपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे लेकिन जशपुरांचल के बीहड़ वनों में रहने वाली सांसद गोमती के जूदेव अंदाज का बयान… *कि शेरनी जिंदा है..* ने जशपुर से लेकर रायपुर के राजनैतिक गलियारों में हड़कम्प मचा दिया।इस बयान को जूदेव के आक्रामक अंदाज की शैली से जोड़ कर देखा जा रहा है।आदिवासी महिला सांसद की दहाड़ का नया अंदाज आम जनता को खूब रास आ रहा है ।कांग्रेस इस बयान की गुगली में फँस गई है। जिले में भाजपा ने जूदेव लखी के संघर्ष को नजदीक से देखा है । जूदेव की मुंछो के दाँव ने भाजपा को सत्ता के सिंहासन तक पहुँचा दिया।भाजपा की सत्ता के दौरान भी जूदेव अपनी सरकार के खिलाफ प्रशासनिक आतंकवाद की परिभाषा गढ़ कार्यकर्ता के पक्ष में सरकार से दो दो हाथ करते नजर आये। जूदेव के नेतृत्व के दौरान कार्यकत्ताओं सत्ता के खिलाफ संघर्ष था जोश व समर्पण था जनता के हक की आवाज थी।यही वजह है कि जूदेव के त्याग तपस्या का फल पार्टी को मिला। जूदेव व लखी का निधन ने भाजपा के लिए बड़ी रिक्तता ला दी l रमन राज की सत्ता के दौरान अवसरवादीता पदलोलुपता गुटबाजी में अपनी जमीन तैयार कर ली यह जमीन निष्ठावान कार्यकर्ताओ के पौध की जड़ो को कमजोर करती रही। यही वजह है कि पिछले विधान सभा चुनाव के दौरान भाजपा उसी शून्य पर पहुंच गई जहां से कभी जूदेव ने यात्रा प्रारम्भ की थी। रमन के 15 साल के दौरान कार्यकर्ताओ के अंदर हताशा व निराशा घर कर गई l इस दौरान कार्यकर्ता बिखरने लगे व टूट कर निराश हो गए । कार्यकताओ की हताशा विधान सभा चुनाव परिणाम के दौरान नजर आई । जूदेव लखी की कमी का एहसास कार्यकर्ताओ को पल पल हो रहा था l जूदेव लखी के बाद का दौर भाजपा के लिए संक्रमण का दौर रहा लंबे समय तक भाजपा की सत्ता में मलाई चखने वाले नेताओं को गोमती साय ने आक्रामक बयान ने यह बता दिया कि उनके बिना भी भाजपा कुछ कर गुजरने की मादा रखती है।जूदेव लखी के जाने से आई रिक्तता को अब ओपी गोमती व उमेश की त्रिमूर्ति ने भली भांति भर दिया।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी से सांसद की कुर्सी तक पहुंचने वाली गोमती साय ने शेरनी को जिंदा बताकर सियासी फिजा के अंदर कार्यकर्ताओ में उत्साह व उमंग का जोश भर दिया। लखी जूदेव की जोड़ी के बाद ये ओपी उमेश व गोमती की नई भाजपा है जो विपक्ष की लड़ाई में कार्यकर्ताओं के हर गतिविधि के साथ कंधा के कंधा मिला कर खड़ी नजर आ रही ही है l पिछले एक माह में भाजयुमो कार्यकर्ता के खिलाफ नगर निगम में धरना दिए जाने पर एफआईआर का मामला हो या फिर सोशल मीडिया में टिका टिपण्णी किये जाने पर एफआईआर का मामला हो या फिर पुतला दहन किये जाने पर गिरफ्तार भाजयुमो कार्यकर्ताओ से थाने में मारपीट का मामला हो भाजपा के यूथ विंग ओपी चौधरी सांसद गोमती साय व जिला ध्यक्ष उमेश अग्रवाल की जुगलबंदी ने जिला प्रशासन को बैक फुट पर ला खड़ा किया।ओपी गोमती उमेश की त्रिमूर्ति ने जूदेव लखी के संघर्ष के दौर की पुरानी याद को पुनः ताजा कर दिया। जिले के इन शीर्ष नेताओं की जुगल बंदी ने मृतप्राय भाजपा में नए सिरे से उत्साह के प्राण वायु का संचार कर दिया। शीर्ष नेताओं की सक्रियता ने कार्यकर्ताओं को सड़क की लड़ाई के लिए एक तरह का सियासी सन्देश भी दे दिया कि वे सत्ता रूढ़ दल की हर वादा खिलाफी पर पुरजोर विरोध के लिए तैयार रहे। शेरनी जिंदा है इस बयान ने अपरोक्ष रूप से यह बता दिया कि सत्ता मे बैठे लोग मनमानी नही कर सकते उनकी नकेल कसना विपक्ष को भली भांति आता है।गोमती साय के दहाड़ की गूंज क्या सत्ता के जंगल राज को समाप्त कर पायेगी यह तो रहस्य के गर्भ में है बरहाल सांसद साय के इस बयान के पीछे जूदेव की आक्रामक छवि की झलक स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है जो आने वाले दिनों में सियायत का नया मंच मजबूती से तैयार करेगी।


