केलो बनांचल आदिवासी बाहुल्य तमनार के चहुँओर हर्षोल्लास से मनाया गया देवउठनी एकादशी त्यौहार

केलो बनांचल आदिवासी बाहुल्य तमनार के चहुँओर हर्षोल्लास से मनाया गया देवउठनी एकादशी त्यौहार
तमनार @ संदेशा 24 केलो बनांचल आदिवासी बाहुल्य तहसील तमनार के चहुँओर कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी त्यौहार हर्षोल्लास से मनाया गया। ज्ञात हो कि देवउठनी एकादशी के दिन से ही चतुर्मास समाप्त हो रहे हैं और शुभ व मांगलिक कार्य शुरू होंगे।

शास्त्रों के अनुसार, देवउठनी एकादशी के दिन ही सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चार महीने बाद योग निद्रा से जागते हैं। इस दिन भगवान शालीग्राम और माता तुलसी का विवाह कराया जाता है। एकादशी तिथि 15 नवंबर तुलसी विवाह कराया किया गया।

एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। ऐसे में इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। देवउठनी एकादशी के दिन कुछ नियमों का पालन करना भी अनिवार्य होता है।



